
Ranchi: राज्य में बालू घाटों की नीलामी नहीं होने से लगातार बालू के दाम बढ़ते जा रहे है. जिससे निर्माण कार्य पूरी तरह प्रभावित है. सरकारी प्रोजेक्ट्स भी बालू की किल्लत झेल रहे है. अलग अलग बालू कारोबारियों से बात करने से जानकारी हुई कि 15 जून से 15 अक्टूबर तक एनजीटी की रोक बालू घाटों से बालू के उठाव पर रही. इसके बाद 16 अक्टूबर से बालू घाटों से बालू का उठाव शुरू होना था. लेकिन राज्य में मात्र 28 बालू घाटों का ही टेंडर पिछले कुछ समय में किया गया. जबकि राज्य में लगभग 440 बालू घाट है. ऐसे में अभी भी लगभग 412 बालू घाटों से बालू उठाव नहीं किया जा रहा है. जिससे राज्य में बालू की कमी है.
बालू की कीमतों में हुई बेतहाशा वृद्धि
वर्तमान दर की बात करें तो प्रति टरबो एनजीटी की रोक के पहले 4500 रूपये लिये जा रहे थे. जबकि 16 अक्टूबर से ये दर 6500 रूपये प्रति टरबो हो गयी है. वहीं, बालू घाटों की नीलामी सामान्य रहने पर प्रति टरबो 2200 रूपये बालू की कीमत रहती. जबकि हाईवा में ये दर और भी अधिक है. जो प्रति हाईवा 25 से 30 हजार है. ऐसे में बालू की कीमत में बेतहाशा वृद्धि से निर्माण कार्य से जुड़ा रोजगार बुरी तरह प्रभावित हो रहा है. कारोबारियों की मानें तो फिलहाल पश्चिम बंगाल, छत्तीसगढ़ और उड़ीसा से बालू मांगा कर काम किया जा रहा है.
दो साल से रोक जारी
राज्य में बालू की समस्या पिछले साल से जारी है. यहां पिछले साल लगे एनजीटी की रोक के पहले ही बालू घाटों का टेंडर नहीं किया गया था. अक्टूबर में रोक हटने के बाद भी विभाग ने टेंडर नहीं किया. इस साल साहेबगंज और धनबाद के दस बालू घाटों के लिये टेंडर किया गया. इसके पहले 18 बालू घाट राज्य में संचालित थे. ऐसे में कुल 28 बालू घाट राज्य में संचालित है. कारोबारियों की मानें तो जिन इलाकों में बालू घाट नीलाम किया गया है. वहां अधिकांश घाटों में अब बालू नहीं है. जबकि राज्य सरकार ने नीलामी की जिम्मेवारी झारखंड माइंस एंड मिनरल डेवलपमेंट कॉरपोरेशन को दिया है.
ग्रामीण इलाकों में रोजगार अधिक प्रभावित
बालू घाट में रोक जारी रहने से निर्माण कार्य अधिक प्रभावित है. चैंबर ऑफ कॉर्मस की मानें तो निमार्ण कार्य में सबसे अधिक ग्रामीण आबादी प्रभावित हो रही है. राजधानी और उसके आस पास के इलाकों की मानें तो लगभग 75 हजार ग्रामीण निर्माण कार्य से जुड़े है. ऐसे मे बालू की कीमत बढने के कारण रोजगार प्रभावित हो रहा है.




