
Gyan Ranjan
Ranchi: राजनीति में कोई किसी का परमानेंट दोस्त या दुश्मन नहीं होता. मौके की नजाकत को समझते हुए राजनीतिक पार्टियों की दोस्ती और दुश्मनी चलती है. ताजा घटनाक्रम यूपी विधानसभा चुनाव में देखने को मिल रहा है. बिहार में जो दल यारी कर सत्ता की मलाई चाभ रहे हैं, वही दल यूपी में एक दुसरे से दो-दो हाथ करने पर उतारू हो गए हैं. बिहार जो तीन पार्टियां एक दूसरे के साथ मिलकर सरकार चला रही हैं वो यूपी के चुनावी रण में एक-दूसरे के सामने खड़ी नजर आ रही हैं. शराबबंदी को लेकर बिहार सरकार घर में तो दो हिस्सों में बंटी दिख ही रही है, यूपी चुनाव के मैदान में तीन हिस्सों में बंट गई है. गठबंधन में देरी का हवाला देते हुए राज्य में जदयू ने भाजपा से अलग चुनाव मैदान में अकेले उतरने की घोषणा कर दी है.
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उधर, बिहार सरकार के कैबिनेट मंत्री और वीआईपी प्रमुख मुकेश सहनी पहले ही यूपी की 160 सीटों पर ताल ठोक चुके हैं. जदयू ने भी पूर्वांचल की 51 सीटों पर उम्मीदवार तय कर लिए हैं. लखनऊ में पार्टी के यूपी प्रभारी केसी त्यागी ने प्रदेश इकाई के साथ बैठक की हैं. इसमें पूर्वांचल के 11 जिलों से 51 प्रत्याशियों को भी बुलाया गया. इनके साथ अन्य जिलों के प्रत्याशियों का नाम जल्द ही घोषित कर दिया जाएगा.
बिहार सरकार के गठबंधन में शामिल विकासशील इंसान पार्टी (वीआईपी) ने यूपी की 160 विधानसभा सीटों पर अपने प्रत्याशी उतार चुकी है. पार्टी के प्रमुख व बिहार सरकार के कैबिनेट मंत्री मुकेश सहनी ने पूर्वांचल के कई जिलों में भी प्रत्याशी तय कर लिए हैं. यूपी में सत्तारूढ़ रही भाजपा ने प्रमुख रूप से अपना दल और निषाद पार्टी के साथ गठबंधन करते हुए चरणबद्ध तरीके से अपने प्रत्याशी उतारने शुरू कर दिए हैं. वीआइपी की ओर से मंगलवार को ही जौनपुर के बदलापुर, शाहगंज, जौनपुर सदर, जफराबाद, केराकत तो वहीं गाजीपुर में जंगीपुर और मीरजापुर के चुनार से अपना प्रत्यानशी घोषित किया है.
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बिहार के क्षेत्रीय दलों का प्रभाव यूपी में ना के बराबर
यह कटु सत्य है कि बिहार के क्षेत्रीय दलों का यूपी में काफी कम प्रभाव रहा है. लेकिन, पूर्वांचल बिहार से काफी करीब होने की वजह से बिहार की सियासत से भली भांति अवगत है तो वहां के नेताओं का संपर्क भी पूर्वांचल से बना रहा है. जबकि पूर्वांचल में जड़ें जमाने के लिए भी बिहार के क्षेत्रीय दलों ने पूर्वांचल में खूब जनसंपर्क भी किया है. बीते दिनों भी पूर्वांचल में बिहार के नेताओं के दौरे खूब चर्चा में रहे हैं. विधानसभा सीटों के लिहाज से देश के सबसे बड़े राज्य उत्तर प्रदेश की राजनीति में अपनी पैठ बनाने की कोशिश हर राजनीतिक पार्टी की होती है.
अब जबकि यूपी में चुनाव होने हैं तो तमाम पार्टियां अपने लिए अवसर समझते हुए राजनीतिक समीकरण तय करके मैदान में उतरने को तैयार हैं. बिहार सरकार के गठबंधन में शामिल पार्टियों ने यूपी में अकेले चुनाव लड़ने के लिए अपनी-अपनी जमीन तलाश ली है. जेडीयू को पूर्वांचल का सामाजिक समीकरण अपने पक्ष में नजर आ रहा है. पटेल, मौर्य, चौहान, राजभर जैसी पिछड़ी व अति पिछड़ी जातियों को अपने पक्ष में लाने की उसकी कोशिश होगी. वहीं विकासशील इंसान पार्टी की नजर निषाद और उनकी अन्य उपजातियों पर है. इनका प्रभाव यूपी की 144 से अधिक विधानसभा की सीटों पर है.
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जदयू को पिछड़ी और अति पिछड़ी जाति पर भरोसा
जदयू का अकेले चुनावी मैदान में उतरने का फैसला यूं ही नहीं सामने आया है. पूर्वांचल का सामाजिक समीकरण उसके पक्ष में जाता है. पटेल, मौर्य, चौहान, राजभर और निषाद जैसी पिछड़ी व अति पिछड़ी जातियों के प्रमुख चेहरे भाजपा का साथ छोड़कर सपा से जा मिले हैं. ऐसे में अब जदयू की रणनीति इन जातियों में से ही नए चेहरों को सामने लाकर पूर्वांचल में अपनी अलग पैठ बनाने की है. नीतीश कुमार की पार्टी की नजर पूर्वांचल के उन प्रमुख राजनीतिक चेहरों पर भी है जिन्हें टिकट से वंचित होना पड़ रहा है. भाजपा या सपा से टिकट की दावेदारी में पिछड़ने वाले वैसे कई दिग्गज भी संपर्क में हैं.
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चर्चा है कि जौनपुर के एक बाहुबली भी जद-यू का दामन थाम सकते हैं. जदयू का आरोप है कि यूपी चुनाव के लिए गठबंधन के प्रस्ताव पर भाजपा की ओर से जवाब नहीं मिला. गठबंधन में हो रही देरी के बाद पार्टी ने अकेले चुनाव लड़ने का निर्णय लिया है. सभी पार्टियां प्रत्याशियों की घोषणा कर रही हैं और भाजपा की ओर से गठबंधन का कोई संकेत नहीं मिला. इसके बाद पार्टी के प्रवक्ता केसी त्यागी ने यूपी में अकेले चुनाव लड़ने की घोषणा की. जदयू सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार उन सभी 51 लोगों को जदयू चुनाव मैदान में उतारेगा जिन्होंने इलेक्शन लड़ने का आवेदन पार्टी की प्रदेश इकाई को दिया हुआ है.
पूर्व में जब भाजपा के साथ सीट शेयरिंग के साथ चुनाव मैदान में जाने की बात थी तब जदयू ने तीस प्रत्याशियों की सूची भाजपा नेतृत्व को सौंपी थी. जदयू के यूपी प्रभारी केसी त्यागी ने कहा कि जदयू किसी एक इलाके में चुनाव नहीं लड़ेगा. बिहार से सटे विधानसभा क्षेत्रों के अतिरिक्त पार्टी पूर्वांचल की अन्य सीटों, पश्चिमी उत्तर प्रदेश तथा सेंट्रल यूपी से भी अपने प्रत्याशी उतारेगा.
जातीय जनगणना का मसला भी रहेगा आगे
त्यागी ने कहा कि बिहार में मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के नेतृत्व में हुए सामाजिक बदलाव को मतदाताओं के समक्ष रखा जाएगा. बिहार में अति पिछड़ा वर्ग के लिए किए गए कार्यों पर चर्चा होगी. पूर्वांचल में यह अनुभव रहा है कि सीएम नीतीश कुमार की जहां-जहां सभाएं हुई थीं वहां बड़ी संख्या में लोगों की भीड़ जुटी थी. पार्टी ने अभी यह तय नहीं किया है कि यूपी चुनाव में उसके स्टार प्रचारक कौन होंगे. जदयू पूरी ताकत के साथ चुनाव मैदान में उतरने की तैयारी में है. त्यागी ने कहा कि जाति आधारित जनगणना कराए जाने का मसला भी यूपी चुनाव में जदयू आगे करेगा.
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