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धनबाद के विधायक राज सिन्हा की राजनीति का राज क्या है?

अंततः राज सिन्हा के राजदार वही बने जो पहले से उनके राजदार थे, मनोज मालाकार. अब तो मिल्टन पार्थसारथी भाईजी यानी पीएन सिंह की सेवा में पूर्ववत लगे हैं और संजय भाईजी के करीब और दूर जाते रहे हैं.

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Dhanbad : वह किसके साथ हैं? वह किसके खिलाफ हैं? धनबाद की पूर्व सांसद प्रो. रीता वर्मा के रिश्तेदार और उनके साथ ही राजनीति में आनेवाले राज सिन्हा की राजनीतिक महत्वाकांक्षा असीमित है. कल जिनके वह बहुत करीबी थे उनसे बहुत दूर हैं. धनबाद भाजपा के महामंत्री संजय कुमार झा उनको एक अबूझ पहेली बताते हैं. विधानसभा चुनाव के समय तो राज सिन्हा के दायें बायें संजय और मिल्टन पार्थसारथी चले. एक समय मिल्टन की उनका पीए बनने की बात खूब चर्चा में थी. फिर न जाने क्या हुआ. एक बड़े दैनिक के पत्रकार उनका पीए बनाने का लोगों को आफर दे रहे थे तब एक अन्य पत्रकार को नौकरी छुड़ाकर उन्होंने अपना पीए रख लिया. पर यह चंद दिनों की ही बात हुई. अंततः राज सिन्हा के राजदार वही बने जो पहले से उनके राजदार थे, मनोज मालाकार. अब तो मिल्टन पार्थसारथी भाईजी यानी पीएन सिंह की सेवा में पूर्ववत लगे हैं और संजय भाईजी के करीब और दूर जाते रहे हैं.

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राजनीतिक महत्वाकांक्षा के लिए कुछ भी कर गुजरने को तैयार

एक समय था जब राज सिन्हा भी भाईजी के ही दरबार का रत्न बने थे. रीता वर्मा से रिश्तेदारी तोड़कर भाईजी से राजनीतिक रिश्तेदारी गांठ ली थी. मगर, राजनीतिक महत्वाकांक्षा के लिए कुछ भी कर गुजरने को तैयार राज सिन्हा की भाईजी से तब खटपट हो गयी जब राज सिन्हा को उनके ही प्रभाव वाले धनसार क्षेत्र में कम वोट आने से हार का सामना करना पड़ा. इस बार फिर भाईजी को साथ लेकर जीते. चुनाव के बाद रघुवर दास के करीब जाने की भरसक कोशिश की. पहले विस्तार में मंत्रिमंडल में जगह नहीं मिली तो उस दिन के इंतजार में बैठे कि मंत्रिमंडल की एक खाली सीट उनको ही मिलेगी.

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धनबाद से नहीं बल्कि बक्सर से संसद में जाने को उतावले

अपनी पात्रता सिद्ध करने के लिए विधानसभा में सवालों से लैस होकर सक्रिय हुए. मुख्यमंत्री के साथ धनबाद की समस्याओं के बहाने बहुत से फोटो सेशन किए. धनबाद में बिनोद बिहारी महतो कोयलांचल विश्वविद्यालय की स्थापना के लिए निरसा के विधायक अरूप चटर्जी के सुर में सुर मिलाया. यह राज सिन्हा की पालिटिक्स का चरमोत्कर्ष था जब मुख्यमंत्री ने विधानसभा में कोयलांचल विवि बनाने की घोषणा की. विवि के शिलान्यास कार्यक्रम में मुख्यमंत्री ने राज सिन्हा को महत्व दिया तो इनको राजनीतिक प्रभाव में वृद्धि का एहसास होने लगा. जबकि, अपनी बीमारी के बाद जब राज सिन्हा स्वास्थ्य लाभ ले रहे थे तब अफवाह उड़ी थी कि वह धनबाद से नहीं बल्कि बक्सर से संसद में जाने को उतावले हैं. ऐसे में धनबाद से विधानसभा का टिकट भी लोग बांटने लगे थे. एक नंबर में भाईजी के बेटे का नाम था. दो नंबर में चंद्रशेखर सिंह आदि आदि का नाम आने लगा.

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इसके बाद राज सिन्हा फिर आशंकाओं को झुठलाते धनबाद की सक्रिय राजनीति में दौड़ पड़े. इस बीच कुछ समय के लिए धनबाद से सांसद के भावी प्रत्याशी के रूप में इनका नाम उछला पर तेजी से दृश्य बदल गया. सरयू राय की धनबाद में सक्रियता बढ़ी तो राज सिन्हा उनके भी साथ दिखे. अब महेंद्र सिंह धोनी के नाम की चर्चा है. हालांकि राज सिन्हा की राजनीतिक महत्वाकांक्षा सभी सीमा से परे है.

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