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रांची के इलाहाबाद बैंक से संयुक्त निदेशक राजीव सिंह के भाई ने फरजी दस्तावेज पर लिया कर्ज

विशेष सचिव राकेश अस्थाना की ओर से लिखा गया पत्र मामला : सीबीआई के दो वरिष्ठ अधिकारियों के बीच की लड़ाई का

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Ranchi: सीबीआई के विशेष निदेशक राकेश अस्थाना ने अपने पत्र में अपनी ही एजेंसी के संयुक्त निदेशक राजीव सिंह के खिलाफ भी कई गंभीर आरोप लगाये हैं. उन्होंने केंद्रीय मंत्रिमंडल और समन्वय विभाग के सचिव को लिखे पत्र में कहा है कि संयुक्त निदेशक राजीव सिंह के भाई ने गलत तरीके से इलाहाबाद बैंक से कर्ज लिया. इस कर्ज के लिए फरजी दस्तावेज प्रस्तुत किये गये. पूरे प्रकरण में बैंक फ्राड केस संख्या -आरसी 4 (एस)-2016-इक्यूडब्ल्यू रांची भी दर्ज किया गया है. 31 मार्च 2016 को इस संबंध में इलाहाबाद बैंक की तरफ से एक लिखित शिकायत भी की गयी थी. इसमें सीबीआई के संयुक्त निदेशक के भाई संजय सिंह की फर्म द्वारा बैंक से कर्ज लिये जाने को लेकर फरजी दस्तावेज प्रस्तुत कये गये थे. मामले में संजय सिंह के फर्म और आवास पर सीबीआई की तरफ से सर्च अभियान भी चलाया गया. उस समय कई बार संयुक्त निदेशक ने जांच प्रक्रिया बाधित करने की कोशिश की. पटना से लगातार संयुक्त निदेशक का फोन आने से जांच प्रभावित भी हुई थी.

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85 एकड़ जमीन गलत तरीके से हड़पे गये

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श्री अस्थाना ने अपने पत्र में नयी दिल्ली के एसी-मुख्यालय, के संयुक्त आयुक्त शाखा के मामले का भी जिक्र किया है. इसमें कहा गया है कि हरियाणा के उल्हावा में जमीन अधिग्रहण में कई अनियमितताएं की गयीं. गुड़गांव के सेक्टर-58 से लेकर सेक्टर-63 और सेक्टर 65 से 67 में हाउसिंग डेवलपमेंट के लिए 1417 एकड़ भूमि अधिग्रहित की गयी थी. इसमें बिल्डर की तरफ से 85 एकड़ जमीन गलत तरीके से हड़पे गये. इस घोटाले में हरियाणा के तत्कालीन टाउन कंट्री प्लानिंग के तत्कालीन निदेशक टीसी गुप्ता की मिलीभगत प्रथम दृष्टया प्रमाणित भी हुई थी. ललित गोयल की कंपनी मेसर्स इरको के खिलाफ हो रही जांच को प्रभावित करने में तत्कालीन संयुक्त निदेशक और वर्तमान निदेशक आलोक वर्मा के हस्तक्षेप करने की कई प्रमाण भी हैं. हस्तक्षेप करने पर राजेंद्र पाल सिंह ने भी शिकायत की थी. इसकी जांच बाद में विशेष इकाई द्वारा की गयी, जो सीबीआई की आंतरिक निगरानी यूनिट है. राजेंद्र पाल सिंह जो प्रतिनियुक्ति पर सीबीआई में आये थे, उन्होंने कई एडवर्स कमेंट सीबीआई के अधिकारियों के खिलाफ दी थी.

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