
New Delhi: रेल यात्रियों को सुरक्षा-संरक्षा के साथ तेज सफर मुहैया कराने के लिए 10 वंदे भारत एक्सप्रेस (ट्रेन-18) चलाने की सरकार की योजना है. लेकिन इस ट्रेन से सफर करने की चाह रखनेवाले यात्रियों का इंतजार फिलहाल लम्बा हो सकता है.
खबर है कि भारत के पहले सेमी हाई स्पीड ट्रेन ट्रेन-18 यानी वंदे भारत एक्सप्रेस के प्रोडक्शन में अड़चनें पैदा हो गई हैं. गौरतलब है कि इन ट्रेनों का उत्पादन चेन्नई स्थित इंटीग्रल कोच फैक्ट्री (ICF) में होता है.
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अंग्रेजी अखबार द हिन्दू की रिपोर्ट के मुताबिक, चालू वित्तीय वर्ष यानी मार्च 2020 तक 10 ट्रेनें तैयार करने की सरकार की योजना थी. इसके लिए टेंडर भी जारी हो चुके थे. लेकिन खबर है कि काम की शुरुआत अबतक नहीं हो पायी है.
इसके पीछे ट्रेन-18 के डिजाइन को लेकर पैदा हुई दिक्कत को कारण बताया जा रहा है. खबर है कि ट्रेन-18 के डिजाइन में कुछ खास मापदंडों के उल्लंघन की बात सामने आयी थी, जिसके बाद इसे दोबारा से डिजाइन किया जाना है.
द हिंदू की रिपोर्ट के अनुसार, निर्माण में पहली बड़ी समस्या यह है कि इसे बनाने के दौरान रिसर्च डिजाइंस ऐंड स्टैंडर्ड ऑर्गनाइजेशन यानी आरडीएसओ द्वारा सुझाये गये दर्जनों स्पेसिफिकेशन का पालन नहीं हुआ.
वहीं विजिलेंस के अधिकारियों की जांच के बाद इंजीनियर ट्रैक्शन ट्रांसफॉर्मर और दूसरे इलेक्ट्रिक कलपुर्जों का इस्तेमाल करने में झिझक रहे हैं. पहली ट्रेन को तैयार करने के लिए इन कलपुर्जों को खरीदा गया था.
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सूत्रों के मुताबिक, आईसीएफ ने आरडीएसओ के सुझाये मापदंडों का पालन करने की बात मानी है. ऐसे में टेंडर की पूरी प्रक्रिया नये सिरे से शुरू होगी. हालांकि, आईसीएफ के इंजीनियर्स का कहना है कि पहली ट्रेन-18 के निर्माण के दौरान भी इंडस्ट्री स्टैंडर्ड का पालन किया गया और सेफ्टी के मापदंड पर कोई समझौता नहीं किया गया.
रेलवे सूत्रों की मानें तो इस बात की भी जांच की जा रही है कि क्या 97 करोड़ रुपये की लागत से तैयार होने वाले ट्रेन सेट के लिए एक कंपनी को वरीयता दी गई?
गौरतलब है कि आईसीएफ द्वारा रिकॉर्ड वक्त में पूर्णतया स्वदेश निर्मित ट्रेन-18 को तैयार किया गया है. बाद में इसे वंदे भारत एक्सप्रेस नाम दिया गया.
ट्रेन का उद्घाटन नई दिल्ली से वाराणसी के बीच 15 फरवरी को पीएम नरेंद्र मोदी द्वारा किया गया था. और इस ट्रेन को मोदी सरकार के मेक इन इंडिया अभियान के सबसे सफल प्रोडक्ट के तौर पर पेश किया गया था. वंदे भारत एक्सप्रेस के बीते छह महीने के ऑपरेशन के दौरान कोई बड़ी समस्या सामने नहीं आयी है.
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