न्यूज़ विंग
कल का इंतज़ार क्यों, आज की खबर अभी पढ़ें

पांच सालों में UPSC बहाली में 40% की गिरावट, IAS के 1459, IPS के 970 व IFS के 560 पद खाली

3,296
  • अब अफसरों की कमी पाटने के लिए यूपीएससी की चौखट लांघे बिना ठेके पर आईएएस कैडर में बहाली
  • वेकेंसी से कम लोगों को ही किया जा रहा शॉर्टलिस्ट, 2014 में 1236 उम्मीदवार हुए थे शॉर्टलिस्ट, 2018 में घटकर हो गया 759

Ranchi : पिछले पांच सालों में यूपीएससी के जरीए आईएएस, आईपीएस और आईएफएस की बहाली में 40 फीसदी की गिरावट आई है. कार्मिक मंत्रालय के आंकड़ों के अनुसार वर्तमान में आईएएस के 1459, आईपीएस के 970 और आईएफएस के 560 पद खाली हैं.

इसकी वजह यह है कि यूपीएससी जितने पद के लिए वेकेंसी जारी करती है, उससे कम उम्मीदवारों का चयन हो रहा है. वर्ष 2018 में 812 पदों के लिए विज्ञापन जारी किया गया था, जिसके विरूद्ध 759 उम्मीदवारों का ही चयन किया गया. 53 पद खाली रह गये. इसी तरह 2017 ग्रुप ए कटेगरी में 710 सीटें थीं, जो 2018 में घटकर 384 सीट हो गई.

इसे भी पढ़ेंःबैन हटते ही चुनाव आयोग पर बरसीं मायावती, पूछा- सीएम योगी पर मेहरबानी क्यों?

2014 से बहाली में लगातार गिरावट

2014 से यूपीएससी (आईएएस, आईपीएस और आईएफएस) की बहाली में लगातार गिरावट आई है. 2014 में यूपीएसी ने 1236 उम्मीदवारों को शॉर्ट लिस्ट किया था, जो 2018 में घटकर 759 हो गया. इसी तरह 2015 में 1078, 2016 में 1099 और 2017 में 990 कैंडिटेड शॉटलिस्ट किए गये.

क्या है अफसरों की कमी की वजह

यूपीएससी जितनी वेकेंसी जारी कर रही है उससे कम उम्मीदवारों का चयन किया जा रहा है. इसके अलावा जो रिजर्व कैटेगरी के उम्मीदवार जेनरल कैटेगरी में क्वालिफाई कर रहे हैं, उन्हें रिजर्व कैटेगरी में बेहतर पद मिल जाने के बाद वे जेनरल से वापस रिजर्व कैटेगरी में चले आते हैं.

इसे भी पढ़ेंःदंतेवाड़ाः विधायक भीमा मंडावी की हत्या में शामिल वर्गीस समेत दो नक्सली ढेर

पिछले पांच सालों में नहीं बढ़ी पदों की संख्या

कार्मिक मंत्रालय के अनुसार पिछले पांच सालों में पदों की संख्या में वृद्धि नहीं हो पाई है. हर साल लगभग 180 आईएएस, 150 आईपीएस और 30 से 45 आईएफएस अफसरों का चयन किया जाता है. कार्मिक मंत्रालय ने यह भी स्पष्ट किया है कि एक या दो साल में इतने बड़े पैमाने में खाली पदों को नहीं भरा जा सकता. अगर बड़े पैमाने पर बहाली हुई तो कैडर बंटवारे में समस्या होगी.

उच्च पदों की संख्या भी है सीमित

कार्मिक मंत्रालय के अनुसार यूपीएससी से चयनित अफसरों का करियर 30 से 35 साल का ही होता है. वहीं उच्च पदों की संख्या सीमित है. ऐसे में उसी हिसाब से बहाली करनी पड़ रही है. जिससे आगे चलकर अफसरों के प्रमोशन की समस्या नहीं हो.

इसे भी पढ़ेंः12 राज्यों की 95 सीटों पर मतदान आज, EVM में कैद हो जाएगी इन नेताओं की किस्मत

Related Posts

राज अस्पताल में विश्व मरीज सुरक्षा दिवस मनाया गया

हाल ही में दुनिया में डब्ल्यूएचओ द्वारा मरीजों की सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता देने का संकल्प किया गया है.

कमी पाटने के लिए ठेका में बहाली

आईएएस अफसरों की कमी पाटने के लिये आईएएस कैडर में ठेका (कांट्रैक्ट) में बहाली की प्रक्रिया केंद्र ने शुरू की है. इसके तहत तीन साल के लिए आईएएस कैडर में ज्ज्वाइंट सेक्रेटरी का पद दिया जा रहा है. अगर परफॉरमेंस बेहतर रही तो पांच साल तक अवधि विस्तार देने का प्रावधान रखा गया है. ज्वाइंट सेक्रेटरी के लिये राजस्व, वित्त, इकोनॉमी, कृषि, परिवहन, शिपिंग, इंवायरमेंट, फॉरेस्ट और रिन्यूवल एनर्जी के विशेषज्ञों की बहाली की जा रही है.

ज्वाइंट सेक्रेटरी के पद पर 10 विशेषज्ञों की बहाली

केंद्र सरकार ने विभिन्न क्षेत्रों के 10 विशेषज्ञों की बहाली आईएएस कैडर में ज्वाइंट सेक्रेट्री के पद पर की है. इसमें अमर दूबे (केपीएमजी), राजीव सक्सेना (सार्क डेवलपमेंट फंड), सुजीत कुमार वाजपेयी (एनएचपीसी), दिनेश दयानंद जगदले ( पनामा रिन्यूवल एनर्जी ग्रुप), कालोली घोष (कृषि), भूषण कुमार (शिपिंग), अरूण गोयल (कॉमर्स), सौरभ मिश्रा ( वित्त) और सुमन प्रसाद सिंह (परिवहन) शामिल हैं. इनका वेतन 144200 से 218200 रुपये है.

इसे भी पढ़ें- 12 राज्यों की 95 सीटों पर मतदान आज, EVM में कैद हो जाएगी इन नेताओं की किस्मत

देशभर में आईएएस के 6212 पद हैं स्वीकृत

देशभर में आईएएस के 6217 पद स्वीकृत हैं. इसमें 4758 पदों पर ही अफसर कार्यरत हैं. कुल 1459 पद रिक्त पड़े हैं. वहीं केंद्रीय प्रतिनियुक्ति के 1345 पद हैं. इसमें 645 अफसर ही केंद्रीय प्रतिनियुक्ति में हैं. झारखंड में आईएएस संवर्ग में 49 पद रिक्त हैं. कुल स्वीकृत पदों की संख्या 205 है, जिसमें 156 अफसर ही कार्यरत हैं.

झारखंड को भी नहीं मिल रहे आईएएस अफसर

झारखंड को केंद्र से आईएएस अफसर भी नहीं मिल रहे हैं. राज्य सरकार ने केंद्र से 12 आईएएस मांगे थे. लेकिन इस पर कोई कार्रवाई नहीं हुई. इसके लिए राज्य सरकार ने कई बार रिमांडर भी भेजा पहले आईएएस का इंटेक 110 था. इस कारण राज्य को अधिक संख्या में आईएएस नहीं मिल रहे थे. अब आईएएस का इंटेक बढ़ाकर 170 कर दिया गया है. इसे देखते हुए राज्य सरकार ने 12 आईएएस की मांग की है.

इसे भी पढ़ें- बिहार की पांच लोकसभा सीटों पर मतदान, चुनावी मैदान में 68 उम्मीदवार 

वीआरएस भी है अफसरों की कमी का कारण

अफसरों के वीआरएस लेने के बाद निजी क्षेत्र में चले जाना भी अफसरों की कमी का एक कारण माना जा रहा है. राज्य गठन से लेकर अब तक छह अफसर विभिन्न कारणों से वीआरएस ले चुके हैं. इसमें मुनीगला, वीके चौहान, विमल कीर्ति सिंह, जेबी तुबिद, संत कुमार वर्मा शामिल हैं. इसके साथ ही निजी क्षेत्र के विस्तार के साथ नियामक तंत्र का विस्तार हो रहा है. जिसमें आईएएस की मांग बढ़ रही है. इस कारण आईएएस अफसर निजी क्षेत्र की ओर भी रूख कर रहे हैं.

हमें सपोर्ट करें, ताकि हम करते रहें स्वतंत्र और जनपक्षधर पत्रकारिता...

Get real time updates directly on you device, subscribe now.

You might also like

you're currently offline

%d bloggers like this: