
- शव निकालने में जिला प्रशासन ने नहीं की कोई मदद
- ग्रामीणों की ही 25 घंटे की मेहनत के बाद बाहर निकाला जा सका शव
Garhwa : गढ़वा के सदर प्रखंड के अंचला नावाडीह में उमेश भुइयां (35 वर्ष) का गांव के नाले में शुक्रवार को दोपहर बाद फंसा शव 25 घंटे के बाद शनिवार को निकाला जा सका. ग्रामीणों द्वारा शव निकालने के लिए आहर काटने से लेकर कई स्तरों पर प्रयास करने के बाद उमेश का शव बाहर निकालने में सफलता मिली. इस बीच प्रशासन द्वारा पीड़ित परिवार को पारिवारिक लाभ योजना के तहत नकद 20 हजार रुपये देकर और सरकारी प्रावधान के तहत लाभ दिलाने का आश्वासन दिया गया है, हालांकि शव को नाले से निकलवाने में प्रशासन द्वारा कोई सहयोग नहीं किया गया. इससे ग्रामीणों में आक्रोश देखा जा रहा है.

बता दें कि गांव के किसी व्यक्ति के कहने पर उमेश भुइयां शुक्रवार को अपराह्न तीन बजे आहर का पानी निकालने के लिए गया था. पानी निकालने के दौरान वह पानी के तेज बहाव के कारण नाले में फंस गया. पानी में फंसे रहने के कारण उसकी दम घुटने से मौत हो गयी. सूचना के बाद ग्रामीण सक्रिय हुए और शव निकालने का प्रयास किया, लेकिन सुविधा के अभाव में रातभर प्रयास करने के बाद भी उन्हें सफलता नहीं मिली.
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हाइड्रा से भी नहीं निकला शव
पुलिस ने कुछ देर के लिए हाइड्रा का प्रबंध कर मौके पर भेजा. ग्रामीणों ने हाइड्रा से शव निकालने का प्रयास किया, लेकिन इससे भी सफलता नहीं मिली. बल्कि हाइड्रा से शव का एक हाथ उखड़कर बाहर आ गया. जिला प्रशासन की ओर से मौके पर कोई नहीं आया. पुलिस ने कहा कि शव सुबह में निकाला जायेगा. इतना कहकर पुनः गढ़वा थाना लौट गयी.
ग्रामीणों ने आहर काटकर बहाया पानी
ग्रामीणों ने कहा कि हाइड्रा से शव नहीं निकलने और प्रशासन की ओर से कोई मदद नहीं मिलने पर आहर काटने का निर्णय लिया गया. ग्रामीणों द्वारा रात भर में तालाब की मेड़ काट दी गयी. पानी ज्यादा होने के कारण दोपहर बाद तक पानी निकलता रहा. जब जलस्तर कम हुआ, तो शनिवार की शाम करीब चार बजे शव निकाला जा सका. शनिवार की दोपहर में गढ़वा के सीओ कुमुद झा उमेश भुइयां के परिजनों से मिलने पहुंचे और पारिवारिक लाभ योजना के तहत 20 हजार रुपये नकद दिये. साथ ही, अन्य सुविधाएं देने का आश्वासन दिया.
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शव निकालने में सहयोग नहीं करने पर नहीं दिया कोई जवाब
गढ़वा के सीओ कुमुद झा ने कहा कि उन्हें शव फंसे होने की जानकारी शनिवार को पूर्वाह्न 11 बजे मिली. पीड़ित परिवार को फिलहाल पारिवारिक लाभ योजना के तहत 20 हजार रुपये नकद दिये गये हैं. अन्य लाभ भी दिये जायेंगे.
इस बीच जब उनसे पूछा गया कि घटना के 24 घंटे बीत गये, प्रशासन द्वारा शव निकालने में कोई सहयोग नहीं किया गया, तो उन्होंने इसका जवाब देने से इनकार कर दिया. कहा कि यह सवाल किसी और से पूछिये.
एसडीओ को नहीं थी कोई जानकारी
शव निकालने में प्रशासनिक सहयोग के संबंध में गढ़वा के एसडीओ से भी जानकारी लेने की कोशिश की गयी. इस पर एसडीओ ने कहा कि उन्हें इसकी कोई जानकारी नहीं मिली है. पता करके जानकारी देंगे.
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ग्रामीण बोले- गरीब होने के कारण हुई उपेक्षा
उमेश भुइयां का शव निकालने में प्रशासनिक उपेक्षा हुई. इस पर कई तरह के सवाल उठ रहे हैं. ग्रामीणों ने कहा कि तालाब में उमेश भुइयां के फंसने के बाद मछलियों द्वारा उसके शव को नुकसान पहुंचाने की संभावना थी. यही मामला अगर बड़े लोगों का रहता, तो शव कब का ही निकल चुका होता. गरीब होने के कारण दो तरह की नीति अपनायी गयी.
परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल
घटना के बाद परिजनों का रो-रो कर बुरा हाल है. उमेश भुइयां की पत्नी और दो बच्चे हैं. वह अपने परिवार में अकेला कमानेवाला था. उसके सात भाई हैं, लेकिन शादी के बाद उमेश अपने परिवार का भरण-पोषण ट्रैक्टर चलाकर करता था.
400 एकड़ भूमि में पटवन पर पड़ेगा असर
इधर, शव को बाहर निकालने के लिए आहर को काटे जाने से खेतों में सिंचाई सुविधा पर बुरा असर पड़ेगा. ग्रामीणों के अनुसार 400 एकड़ खेत में पटवन के लिए पानी नहीं मिल पायेगा.
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