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#TTPS नियुक्ति घोटाले के साक्ष्य न्यूज विंग के पास, पूर्व एमडी के खिलाफ जांच समिति ने नहीं सौंपी तय समय पर अपनी रिपोर्ट

Akshay Kumar Jha

Ranchi: टीटीपीएस के पूर्व एमडी रामावतार साहू का कार्यकाल विवादों से घिरा रहा है. ज्यादातक ऊंगली रामावतार साहू के कार्यकाल के दौरान नियुक्तियों पर उठी है.  अब न्यूज विंग के पास ऐसे साक्ष्य मौजूद हैं, जिससे टीटीपीएस की नियुक्ति घोटाले की बात और पुख्ता हो रही है. इस घोटाले को लेकर बीजेपी के पूर्व प्रदेश अध्यक्ष ताला मरांडी आवाज उठाते रहे हैं. कंपनी की 134 नियुक्तियों पर ताला मरांडी सवाल खड़े करते आये हैं. सात अगस्त को ऊर्जा विभाग की सचिव वंदना डाडेल ने एक समिति बना कर सभी नियुक्तियों की जांच करने के लिए समिति बनायी थी.

समिति की अध्यक्षता ऊर्जा उत्पादन निगम लिमिटेड के प्रबंध निदेशक निरंजन कुमार कर रहे हैं. वहीं टीटीपीएस के एमडी अरविंद कुमार समेत मुख्य विद्युत अभियंता विजय कुमार सिन्हा और ऊर्जा विभाग की उपसचिव संगीता तिर्की सदस्य हैं. विभाग की सचिव वंदना डाडेल ने समिति को जांच कर रिपोर्ट दो महीने में सौंपने को कहा था. लेकिन अभी तक समिति ने जांच रिपोर्ट विभाग को नहीं सौंपी है. मामले पर किसी तरह की प्रतिक्रिया देने से टीटीपीएस के एमडी ने मना कर दिया.

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सबूतों से कैसे पुख्ता हो रहे हैं आरोप

टीटीपीएस ने 2017 में 40 पदों के लिए असिस्टेंट ऑपरेटर की नियुक्ति निकाली, जिसमें अनारक्षित-20, एसटी-10, एससी-4 बीसी1-03 और बीसी2-3  पद शामिल थे. लिखित परीक्षा और इंटरव्यू के आधार पर उम्मीदवारों का चयन करना था. रिजल्ट में 70 फीसदी लिखित और 30 फीसदी इंटरव्यू के आधार तय किया जाना था. असिस्टेंट ऑपरेटर के पद पर नियुक्ति के लिए एसटी का कटऑफ मार्क्स 69.88 और एससी का कटऑफ मार्क 85.02 जबकि बीसी2 के लिए कटऑफ मार्क्स 81.8 निर्धारित किया गया. नियुक्ति की यह शर्त ही अपने आप में सवाल खड़ा कर रही है. इससे संदेह पैदा हो रहा है कि आखिर क्यों बीसी2 का कटऑफ मार्क्स एससी से कम है. इन दोनों के बीच का अंतर 3.22 है.

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केस स्टडी वन

40 चयनित उम्मीदवारों में से 26 नंबर के उम्मीदवार की नियुक्ति बीसी2 केटेगरी के तहत हुई है. उसे लिखित परीक्षा में 100 में से 74 अंक आये हैं. चयन के लिए उम्मीदवार को लिखित परीक्षा में मिले नंबर का 70 फीसदी लेना है. इसलिए हिसाब से चयन के लिए उसे लिखित परीक्षा में 51.80 अंक मिले. वहीं बीसी2 के कटऑफ मार्क्स की बात जाए तो वो 81.80 है. चयन के लिए इंटरव्यू से अब इस उम्मीदवार को तीस नंबर और चाहिए. इंटरव्यू का तीस फीसदी चयन के लिए जुटता है. इस उम्मीदवार का सेलेक्शन हो जाता है. इसका मतलब उम्मीदवार को इंटरव्यू में 100 में से 100 अंक मिले. जिसका तीस फीसदी जोड़कर उम्मीदवार का चयन हुआ. क्या ऐसा संभव है कि किसी ओरल इंटरव्यू में उम्मीदवार को 100 फीसदी अंक मिल जाए.

केस स्टडी टू

40 चयनित उम्मीदवारों में से 39 नंबर के उम्मीदवार की नियुक्ति एसटी केटेगरी के तहत हुई है. उसे लिखित परीक्षा में 100 में से 59 अंक आए हैं. चयन के लिए उम्मीदवार के लिखित परीक्षा में मिले नंबर का 70 फीसदी लेना है. इसलिए हिसाब से चयन के लिए उसे लिखित परीक्षा में 41.30 अंक मिले. वहीं एसटी के कटऑफ मार्क्स की बात जाए तो वो 69.88 है. चयन के लिए इंटरव्यू से अब इस उम्मीदवार को तीस नंबर और चाहिए. इंटरव्यू का तीस फीसदी चयन के लिए जुटता है. इस उम्मीदवार का सेलेक्शन हो जाता है. यानी इंटरव्यू में अब चयन के लिए उम्मीदवार को 28.58 नंबर चाहिए. इसका भी चयन हो जाता है. तो क्या इंटरव्यू पैनल ने इन्हें 95.27 नंबर दिये. जबकि इंटरव्यू में पूरे नंबर दिये जाते हैं. ना कि अंक देने में दशमलव का इस्तेमाल होता है.

केस स्टडी तीन

इस परीक्षा में चयनित होने वाले उम्मीदवार की कहानी अजीब है. उम्मीदवार एससी कैटेगेरी में आता है. एससी का कटऑफ मार्क्स 85.02 है. उम्मीदवार को लिखित परीक्षा में 97 अंक आते हैं. चयन के लिए 70 फीसदी लिखित परीक्षा के प्राप्तांक से लिये जाने के हिसाब से उम्मीदवार को 67.90 अंक प्राप्त हुए. चयन के लिए अब सिर्फ 17.12 चाहिए थे. उम्मीदवार का दावा है कि उसने ओरल इंटर्व्यू में सेलेक्शन कमेटी के सारे जवाब सही दिये. बावजूद इसके उसे इंटरव्यू में सिर्फ 34 अंक दिये गये. जिससे उसका चयन नहीं हो पाया. मामले की शिकायत मुख्यमंत्री जनसंवाद केंद्र की गयी है. लेकिन 12 बार रिमांइडर के बावजूद टीटीपीएस की तरफ से कोई जवाब नहीं आया है.

अभी तक समिति की तरफ से जांच रिपोर्ट नहीं सौंपी गयी हैः सचिव

ऊर्जा विभाग की सचिव वंदना डाडेल ने इस मामले में कहा है कि जांच के लिए समति बनी है. लेकिन अभी तक उनके पास किसी तरह की कोई जांच रिपोर्ट नहीं आयी है.

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