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मनरेगा का सच: एक के बाद अब दूसरी किस्त के लिए लगा रहे चक्कर, की जाती है घूस की मांग

Ranjit Kumar Singh
Dhanbad : टुंडी प्रखंड के कोकराद गांव में सिंचाई की सुविधा नहीं है. लोगों को पीने के पानी के लिए भी परेशानियों का सामना करना पड़ता है. गर्मी के दिनों में यह स्थिति और विकट हो जाती है. लोग बूंद-बूंद पानी के लिए इधर-उधर भटकने को मजबूर हो जाते हैं.

सरकार ने इस जल संकट को दूर करने के लिए मनरेगा के तहत कुआं निर्माण की योजना बनायी. इस योजना के तहत कोकराद गांव के सोनोलाल के खेत में कुआं खोदने का काम शुरू किया गया.

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इसके तहत उन्हें एक लाख पांच हजार रुपये दो किस्तों में मिलने थे. पहली किस्त के रूप में उन्हें 60 हजार रुपये का भुगतान तो कर दिया गया. लेकिन दूसरी किस्त के लिए वे आज भी कार्यालयों का चक्कर लगा रहे हैं.

भुगतान के लिए की जाती है रिश्वत की मांग

रघुवर राज में तकरीबन तीन वर्ष पहले उन्हें पहली किस्त का भुगतान किया गया था. इस पहली किश्त से उन्होंने कुएं का निर्माण शुरू किया लेकिन दूसरी किस्त नहीं मिलने के कारण कुएं का निर्माण अधूरा ही रह गया.

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तब से वे दूसरी किस्त की राशि के लिए लगातार प्रखंड कार्यालय का चक्कर लगा रहे हैं. लेकिन उनकी दूसरी किस्त का भुगतान अब तक नहीं किया गया है जिस कारण कुएं निर्माण अधर में लटका हुआ है.

सोनोराम बताते हैं कि जब वे दूसरी किस्त की राशि के लिए प्रखंड कार्यालय जाते हैं तो उन्हें भुगतान के एवज में उनसे रिश्वत की मांग की जाती है. सोनोराम बताते हैं कि उनकी आर्थिक स्थिति ऐसी है कि वे घूस की रकम दे पायें.

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मवेशियों की मौत का भरना पड़ता है मुआवजा

सोनोराम बताते हैं कि अब वे फंस गये हैं. कुएं का निर्माण अधूरा रहने के कारण आये दिन कुएं के लिए बनाये गये गड्ढे में मवेशी गिर जाते हैं. गड्ढे में मवेशी के गिर जाने के कारण अब तक कई मवेशी की मौत भी हो चुकी है. जिसका हर्जाना उन्हें मवेशी मालिक को देना पड़ा है.

मवेशी की मौत का हर्जाना भरने के लिए भी उन्हें कर्ज लेना पड़ा. अब उन्हें लगता है कि सरकारी काम के चक्कर में उन्हें नहीं फंसना चाहिए था. वे बताते हैं कि उन्हें उम्मीद थी कि मनरेगा के तहत कुएं का निर्माण हो जायेगा तो लोग अपने खेतों की सिंचाई के साथ-साथ घरेलू काम-काज भी इसके पानी से कर पायेंगे. लेकिन अब तो उनकी उम्मीदों पर भी पानी फिर गया है.

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