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गढ़वा: तीन अभियंता और संवेदक के विरुद्ध परिवाद दायर

Palamu:  पलामू प्रमंडल के गढ़वा जिला अंतर्गत कांडी प्रखंड में सतबहिनी झरना के ऊपर बन रहा पुल हर दिन चर्चा रह रहा है. निर्माण में जहां गुणवत्ता से खिलवाड़ किया जा रहा है, वहीं विरोध करने वाले ग्रामीणों को झूठे केस में फंसाने और मारपीट करने की धमकी दी जा रही है. इससे परेशान सरकोनी निवासी गुंजन सिंह ने गढ़वा व्यवहार न्यायालय में चार लोगों के विरुद्ध परिवाद दायर किया है. गुंजन सिंह ने कार्यपालक पदाधिकारी (विशेष प्रमंडल, गढ़वा) महेन्द्र कुमार चैधरी, मनोज केसरी (कनीय अभियंता विशेष प्रमंडल गढ़वा), सुरेश पासवान (सहायक अभियंता विशेष प्रमंडल गढ़वा) तथा अरविंद तिवारी संवेदक के विरुद्ध गाली गलौज करते हुए मारपीट करने व पूरे परिवार को झूठे केस में फंसाने की धमकी देने का आरोप लगाया है.

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शिकायत करने पर धमकी देने का आरोप 

परिवादी के अनुसार 24 फरवरी को पुल के घटिया निर्माण के विरुद्ध निर्माण स्थल पर जाकर शिकायत करने के दौरान उपरोक्त लोगों द्वारा बिना जाने पूछे गाली गलौज व मारपीट की जाने लगी. विदित हो कि सरकोनी पंचायत मुखिया मीना देवी द्वारा भी उक्त पुल निर्माण को लेकर कई बार पदाधिकारियों को लिखित शिकायत की गई थी. किन्तु अभी तक कोई कारवाई नहीं हुई. सतबहिनी झरना तीर्थ में झरना के उपर निर्माणाधीन पुल में भारी अनियमितता को लेकर सरकोनी पंचायत मुखिया मीना देवी ने गढ़वा के उपायुक्त, अनुमंडल पदाधिकारी व कार्यपालक अभियंता को लिखित शिकायत की थी.

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क्या कहती हैं मुखिया

मीना देवी ने तीनों पदाधिकारियों को लिखित शिकायत देकर अविलंब जांच की मांग की थी. आवेदन के अनुसार पुल के पिलर की खुदाई सिर्फ चार से पांच फीट की गयी है, जिसके निर्माण के साथ ही ध्वस्त होने की संभावना है. कहा है कि पिलर में लगने वाला छड़, छर्री व सीमेंट की मात्रा भी गुणवत्ता पूर्ण नही है. ऐसे में पुल निर्माण का औचित्य समझ से परे है. ठेकेदार की लापरवाही से निम्न स्तर का काम हो रहा है, जो किसी भी हालत में बर्दाश्त नहीं किया जाएगा.

कार्रवाई नहीं होने पर आमरण अनशन करेंगे

उपायुक्त को दिये गये आवेदन के अनुसार मुखिया द्वारा भी ठेकेदार पर धमकी देने की शिकायत की गयी थी. ठेकेदार द्वारा कहा जाता है कि ज्यादा इधर-उधर करने पर रंगदारी मांगने के झूठा केस में फंसा दूंगा. पदाधिकारियों को दिये गये आवेदन के अनुसार मुखिया मीना देवी ने कहा था कि यदि जल्द निर्माण कार्य की जांच कर दोषियों पर कार्रवाई नहीं की जाती तो बाध्य होकर उनके द्वारा आमरण अनशन किया जायेगा.

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