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कॉस्ट घटाने के लिए जियो में बंपर छंटनी, हटाये गये 5000 कर्मचारी

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Mumbai: रिलायंस जियो इन्फोकॉम ने कॉस्ट में कमी करने और ऑपरेटिंग मार्जिन में सुधार के लिए अपने एंप्लॉयीज की संख्या में बड़ी कटौती की है. जनवरी-मार्च क्वॉर्टर में कंपनी के ऑपरेटिंग मार्जिन में गिरावट आई थी.

जियो ने कॉन्ट्रैक्ट वाले एंप्लॉयीज के साथ ही कुछ परमानेंट स्टाफ की भी छंटनी की है. सूत्रों ने बताया कि कंपनी ने कंज्यूमर से जुड़े फंक्शंस के साथ ही सप्लाई चेन, ह्यूमन रिसोर्सेज, फाइनैंस, एडमिनिस्ट्रेशन और नेटवर्क जैसे एरिया में एंप्लॉयीज की संख्या घटाई है.

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इस बारे में ईटी की ओर से भेजे गए प्रश्नों के उत्तर में जियो के प्रवक्ता ने कहा, ‘हम अपने कंज्यूमर बिजनस को बढ़ा रहे हैं और जियो इंडस्ट्री में नेट रिक्रूटर बनी हुई है. हम कॉन्ट्रैक्टर्स के साथ भी कार्य कर रहे हैं जो हमारे विभिन्न प्रॉजेक्ट्स के लिए तय समय वाले कॉन्ट्रैक्ट पर स्टाफ को हायर कर सकते हैं.’

5000 की छंटनी

सूत्रों ने कहा कि कंपनी ने लगभग 5,000 लोगों की छंटनी की है. इनमें से करीब 600 परमानेंट एंप्लॉयी थे. बाकी का स्टाफ कॉन्ट्रैक्ट पर था. लेकिन इसकी स्वतंत्र तौर पर पुष्टि नहीं हो सकी है.

मैनपावर को संतुलित करने की कोशिश

एक सूत्र ने बताया, ‘इसका बड़ा असर कस्टमर्स हासिल करने वाले सेगमेंट पर पड़ा है.’ मैनपावर को संतुलित करने की कोशिश एक तिमाही पहले शुरू हुई थी. कंपनी कॉस्ट में कमी करना जारी रख सकती है. एक अन्य सूत्र का कहना था, ‘मैनेजरों को टीम का साइज कम करने को कहा गया है. एडमिनिस्ट्रेशन, सप्लाई चेन, फाइनैंस और ह्युमन रिसोर्सेज पर असर पड़ा है.’

15 से 20 हजार एंप्लॉयी

जियो के पास 15,000-20,000 एंप्लॉयी पेरोल पर होने का अनुमान है. हालांकि, कंपनी के लिए कार्य करने वाले एंप्लॉयीज की संख्या इससे काफी अधिक है, लेकिन वे थर्ड-पार्टी एंप्लॉयीज हैं. थर्ड-पार्टी एंप्लॉयीज को एक स्टाफिंग फर्म हायर कर सकती है और फर्म को इसके लिए कंपनी से पेमेंट मिलती है.

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ऑपरेटिंग मार्जिन स्थिर

एक ब्रोकरेज हाउस के सीनियर टेलिकॉम एनालिस्ट ने कहा, ‘जियो जब मार्केट में आई थी तो उसे अधिक एंप्लॉयीज की जरूरत थी. अब कंपनी का फोकस कॉटेंट और एंटरप्राइज सेगमेंट पर है. इसका ऑपरेटिंग मार्जिन पिछले दो वर्षों से स्थिर है, जबकि कंपनी इसमें काफी बढ़ोतरी की उम्मीद कर रही थी.’

8 पर्सेंट बढ़ा खर्च

जनवरी-मार्च क्वॉर्टर में जियो का एबिट्डा मार्जिन 0.5 पर्सेंट गिरकर 39 पर्सेंट पर रहा. कंपनी का कुल खर्च लगभग 8 पर्सेंट बढ़ा है. एनालिस्ट्स का कहना है कि टेलिकॉम कंपनी की एंप्लॉयी कॉस्ट 5-6 पर्सेंट के बीच होती है. कॉस्ट को कम करने के लिए अक्सर टेलिकॉम कंपनियां पहले छंटनी का कदम उठाती हैं.

31 पर्सेंट मार्केट शेयर

सितंबर 2016 में मार्केट में एंट्री के बाद से जियो ने सस्ते टैरिफ के साथ मार्केट में बड़ी हलचल बनाई थी और इससे कंपनी को मार्च के अंत तक लगभग 30.7 करोड़ सब्सक्राइबर्स हासिल करने में मदद मिली. जियो का रेवेन्यू मार्केट शेयर लगभग 31 पर्सेंट का है.

(साभार- नवभारत टाइम्स)

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