West Bengal

TMC नेताओं को 25 लाख में चुनाव जिताने का मिल रहा ऑफर

Kolkata : लोकसभा चुनाव में तृणमूल की हार और भाजपा की शानदार जीत के बाद मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने 2021 के विधानसभा चुनाव में जीत के लिए राजनीतिक रणनीतिकार प्रशांत किशोर से समझौता किया है.

इस बीच खबर है कि कुछ जिलों में कई ऐसी संस्थाएं सक्रिय हो गयी हैं जो तृणमूल नेताओं से संपर्क कर रही हैं. ये संस्थाएं नेताओं को 25 लाख रुपये के एवज में चुनाव जिताने का दावा कर रही हैं.

पहला मामला पश्चिमी मेदिनगर से

पहला मामला पश्चिम मेदिनीपुर से सामने आया है. इस क्षेत्र से भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष दिलीप घोष सांसद और विधायक दोनों हैं. पता चला है कि यहां वोटर्स कनेक्ट डिजिटल नाम की एक संस्था के कर्मचारियों ने जिले में तृणमूल के कई नेताओं से संपर्क किया है.

इनका कहना है कि ये किसी भी नेता को जनता के बीच सबसे अधिक लोकप्रिय बनाने का माद्दा रखते हैं. इसके अलावा उन्हें पार्टी से टिकट दिलाने, प्रचार-प्रसार की रणनीति बनाने और जीत सुनिश्चित कराने की गारंटी भी दे रहे हैं.

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पहले करना होगा समझौता

संस्था की शर्त है कि इसके लिए पहले उक्त नेता को समझौता करना पड़ेगा. समझौते के लिए एक लाख 25 हजार रुपये लगेंगे. उसके बाद धीरे-धीरे उन्हें पांच लाख देना होगा और जीत के बाद 20 लाख रुपये देने पड़ेंगे. अगर हार गये तो पहले दिये गये पांच लाख रुपये लौटाये नहीं जायेंगे.

हालांकि संस्था के कर्मचारी यह नहीं बता रहे हैं कि वह कैसे जीत दिलायेंगे. इस बारे में प्रतिक्रिया के लिए संस्था के एरिया सेल्स मैनेजर नितेश कुमार गुप्ता से संपर्क किया गया तो उन्होंने कहा कि हम इसे कैसे सफल करेंगे, यह हमारी रणनीति का हिस्सा है, इसका खुलासा नहीं कर सकते लेकिन यह तय है कि जो भी नेता हमारे साथ समझौता कर आगे बढ़ेंगे उन्हें जनप्रिय बनाएंगे.

उन्होंने दावा किया कि उनकी संस्था ने पंजाब, राजस्थान, ओडिशा व झारखंड में भी काम किया है और वहां सफल रहे हैं.

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संदेह हुआ तो दर्ज करायेंगे प्राथमिकी

हालांकि इस बारे में प्रतिक्रिया के लिए शनिवार को जब तृणमूल के जिला अध्यक्ष अजीत माइती से संपर्क किया गया तो उन्होंने कहा कि यह सच है कि एक संस्था हमारे नेताओं के पास जा रही है. अभी किसी तरह की कोई धांधली का मामला सामने नहीं आया  है इसलिए प्राथमिकी दर्ज नहीं कराया हूं लेकिन संदेह होने पर निश्चित तौर पर शिकायत दर्ज कराऊंगा.

जिला पुलिस अधीक्षक दिनेश कुमार से इस मामले में प्रतिक्रिया के लिए संपर्क किया गया लेकिन उन्होंने फोन नहीं उठाया. हालांकि जिला पुलिस के एक शीर्ष अधिकारी  ने बताया कि इस मामले में अभी जानकारी मिली है इसकी जांच की जायेगी.

‘ऑफर आया था, मैंने मना कर दिया’

खबर है कि उक्त संस्था ने तृणमूल कांग्रेस के जिला सभाधिपति उत्तरा सिंह, कार्यकारी अध्यक्ष शैवाल गिरी, रमा प्रसाद गिरी के साथ संपर्क किया है. हालांकि शैवाल गिरी ने कहा कि संस्था के लोग हमारे पास आये थे. उन्होंने समझौता करने का ऑफर दिया था लेकिन मैंने मना कर दिया.

इस बारे में प्रतिक्रिया के लिए जब शनिवार को भाजपा  के राज्य सचिव तुषार मुखर्जी से पूछा गया तो उन्होंने कहा कि कट मनी के बहाने ममता ने अपनी पार्टी के नेताओं को ही चोर साबित कर खुद को ईमानदार बताने की साजिश रची है. इससे उनकी पार्टी के नेता मुश्किल में पड़े हुए हैं.

उसके बाद प्रशांत किशोर जैसे रणनीतिकार की मदद लेकर उन्होंने ऐसी संस्थाओं के लिए भी राज्य में दरवाजा खोल दिया है.

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