
Ranchi. 25 अप्रैल से रमजान का महीना शुरू होने वाला है. कोरोना आपदा और लॉकडाउन के कारण इस बार सार्वजनिक तौर पर भीड़ नहीं जुटाए जाने का निर्देश झारखंड स्टेट सुन्नी वक्फ बोर्ड की ओर से दिया गया है. रमजान के दौरान मस्जिद, दरगाह, इमामबाड़ा जैसी जगहों पर गैदरिंग पर रोक रहेगी.
सुन्नी वक्फ बोर्ड ने इस संबंध में झारखंड के सभी जिलों के डीएम को पत्र भेजकर सूचना दे दी है. सोशल डिस्टेंसिंग के खतरे के बीच मुस्लिम अकीदतमंद घरों में ही नमाज पढ़ेंगे.
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सेन्ट्रल वक्फ काउन्सिल ने जारी किये हैं निर्देश
सेन्ट्रल वक्फ काउन्सिल, भारत सरकार (अल्पसंख्यक मंत्रालय) ने कोरोना आपदा में बचाव और सावधानी के मद्देनजर कुछ जरुरी निर्देशों का पालन करने की अपील की है. ऐसे सभी देश जहां बड़ी संख्या में मुस्लिम अकीदतमंद रहते हैं, उन्होंने रमजान के मौके पर मस्जिदों और अन्य जगहों पर होने वाली भीड़ को रोकने के लिए पहल की है. कई ऐसे आयोजनों से बचा जा रहा है जिसमें बड़ी संख्या में भीड़ जुट सकती है.
नमाज, इफ्तार, तरावीह जैसी इबादतों को पहले की तरह मस्जिदों और संबंधित स्थानों पर न किया जाना ठीक रहेगा. इसके लिए प्रमुख धर्मगुरुओं, प्रबुद्ध लोगों और लोकल प्रशासन की मदद ली जायेगी. सोशल डिस्टेंसिंग के उल्लंघन के मामले पर वक्फ एक्ट 1995 के तहत कार्रवाई की जा सकती है. झारखंड स्टेट सुन्नी वक्फ बोर्ड ने इसी पत्र को आधार बनाकर सबों से सहयोग की मांग की है.
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तरावीह की विशेष नमाज होती रमजान में
पवित्र रमजान के महीने में मुस्लिम आम दिनों की तरह पांच समय मस्जिदों, इमामबाड़ों या अन्य जगहों पर नमाज पढ़ते हैं. इसके अलावा तरावीह की नमाज विशेष तौर पर पढ़ी जाती है. जो रात को इशा की नमाज के बाद पढ़ी जाती है. एदार-ए-शरिया, झारखंड के अनुसार इस बार रमजान के दौरान मस्जिदों में केवल 4 से 7 लोग ही नमाज के दौरान मौजूद रहेंगे.
एक इमाम और नायब इमाम, एक मोअजिम, नायब मोअजिम औऱ एक खादिम नमाजों के दौरान मस्जिद में रहेंगे. इस दौरान सोशल डिस्टेंसिंग का भी पालन किया जाएगा.
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