
Ranchi: राज्य के सबसे बड़े हॉस्पिटल रिम्स में अव्यवस्था कम होने का नाम नहीं ले रही है. प्रबंधन दावा कर रहा है कि हॉस्पिटल की व्यवस्था सुधर रही है. वहीं दूसरी ओर दावों की पोल खुल जा रही हैं. रिम्स अब सिटी की हवा में जहर घोल घोलने में कोई कसर नहीं छोड़ रहा है. खुले में बायोवेस्ट को जलाया जा रहा है. अपना बोझ कम करने के लिए सफाई कर्मी वेस्ट को रास्ते में ही जला दे रहे हैं. वहीं जहां-तहां कचरा डालकर भी अपनी ड्यूटी पूरी कर दे रहे हैं. जिससे संक्रमण का खतरा बढ़ गया है. उनकी ये लापरवाही कितने लोगों को बीमार बना सकती है इसका अंदाजा भी नहीं है. वहीं प्रबंधन ने भी आंखे मूंद रखी है. जबकि कुछ महीने पहले ही मेडिकोज ने भी खुले में बायोमेडिकल वेस्ट जलाने पर रोक लगाने की मांग की थी.
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बड़ी आबादी को इंफेक्शन का खतरा
हॉस्पिटल के चारों ओर घनी आबादी बस गई है. ऐसे में कचरा इंसीनरेटर में जलाया जाए तो चिमनी की मदद से ऊंचाई पर निकल जाता है. लेकिन खुले मैदान में बायो मेडिकल वेस्ट जलाए जाने से आसपास के लोगों को भी इंफेक्शन का खतरा मंडराने लगा है. चूंकि बायो मेडिकल वेस्ट में यूज्ड पीपीइ किट, ग्लव्स, मास्क जैसी चीजें भी होती है. ऐसे में यूज़ किए गए इन चीजों में वायरस के होने से इनकार नहीं किया जा सकता.
बायोवेस्ट मैनेजमेंट रुल भी फेल
बायो मेडिकल वेस्ट मैनेजमेंट रुल्स 2016 और बायो मेडिकल वेस्ट मैनेजमेंट अमेंडमेंट रुल्स 2018 के अनुसार बायो मेडिकल वेस्ट को उनके कैटेगरी के हिसाब से चार भागों में बांटकर उसका डिस्पोजल किया जाना है. इसके लिए चार तरह के डस्टबिन का प्रयोग करना हैं. जिसमें रेड, येलो, वाइट और ब्लू डस्टबिन का यूज किया जाना है. अगर बायो वेस्ट को अलग नहीं किया जाता है तो दूसरे वेस्ट से मिलकर ज्यादा इंफेक्शन फैला सकता है.
बायोमेडिकल वेस्ट में कई चीजें शामिल
बायोमेडिकल वेस्ट में ह्यूमन ब्लड, कटे अंग, दवाइयां, मानव टिश्यू, कफ, डिस्पोजल सूई, खराब इंजेक्शन, ग्लब्स, स्लाइन की बोतलें शामिल होती हैं. अब कोविड में कई और चीजें भी बायो मेडिकल में जुड़ गई है. पीपीई किट, मास्क, फेस शील्ड, गॉगल्स इन सबमें हानिकारक केमिकल होने के साथ कोरोना का वायरस भी है. जिसे खुले में सफाई कर्मी फेक दे रहे है. कचरा चुनने वाले इनमें से अपनी काम की चीजें चुनकर ले जाते हैं. जाने अनजाने उन्हें भी इंफेक्शन होने का खतरा बढ़ जाता है.
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