
New Delhi : अभी तक आपने आमतौर पर ट्रेन को पटरियों पर चलते ही देखा होगा! जमीन के अंदर चलनेवाली मेट्रो ट्रेन भी पटरी के ऊपर ही चलती है. लेकिन पटरियों से नीचे लटकती ट्रेनों के बारे में आपने कम ही देखा सुना होगा.हो सकता है कि कुछेक लोगों ने इसमें सफर भी किया हो, लेकिन ज्यादातर लोगों के लिए यह आश्चर्य और रोमांच से भरा है. इस ट्रेन को हैंगिंग ट्रेन भी कहा जाता है.
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जर्मनी में चलती है ये ट्रेन
यह ट्रेन है भारत में नहीं, बल्कि जर्मनी में है. ये ट्रेनें पटरी के ऊपर नहीं, बल्कि उल्टी लटकती हुई अपना सफर तय करती हैं. Wuppertal Suspension Railway के अंतर्गत जर्मनी में इन ट्रेनों का संचालन होता है. रोप-वे की तरह ये ट्रेनें चलती हैं. इन ट्रेनों में सफर करना रोमांच से भरा होता है. यह ट्रेन हर दिन 13.3 किलोमीटर का सफर करती है. इसके रास्ते में 20 स्टेशन पड़ते हैं.
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ऐसे चलती है हैंगिंग ट्रेन
उल्टी ट्रेन को लेकर आप ये न सोचें कि लोग भी इसमें उल्टे लटककर यात्रा करते हैं! ट्रेन भले ही पटरी से लटककर चलती है, लेकिन लोगों के बैठने के लिए आम ट्रेनों जैसी ही व्यवस्था है. यानी इसमें लोग आराम से सीधे बैठकर यात्रा करते हैं. बिजली से चलने वाली यह ट्रेन जमीन से 39 मीटर की ऊंचाई पर चलती है.
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ट्रेन की शुरुआत करीब 120 साल पहले हुई थी
उल्टी चलने वाली इस ट्रेन के बारे में जिसे भी पहली बार पता चलता है, वह हैरान रह जाता है. इस ट्रेन की शुरुआत करीब 120 साल पहले 1901 में हुई थी. कहा जाता है कि यह दुनिया की सबसे पुरानी मोनोरेल में इसकी गिनती होती है. जर्मनी जाने वाले पर्यटक एक बार जरूर इस ट्रेन में सफर का आनंद उठाना चाहते हैं.
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हर दिन लगभग 85,000 लोग करते हैं इस्तेमाल
जर्मनी के वुपर्टाल शहर में इस सस्पेंशन मोनोरेल की शुरुआत हुई थी. दुनिया की सबसे पुरानी लटकती कारों वाले इलेक्ट्रिक एलिवेटेड रेलवे के तहत चलने वाली ट्रेनों का सफर बाकी ट्रेनों से अलग और रोमांचक होता है. 1901 में इसे करीब 19,200 टन स्टील के इस्तेमाल से बनाया गया था. बताया जाता है कि हर दिन लगभग 85,000 लोग इसका इस्तेमाल करते हैं.
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