
Ranchi : अपने स्थापना काल से ही अफसर से लेकर कर्मचारियों तक की कमी झेल रहा झारखंड यूनिवर्सिटी ऑफ टेक्नोलॉजी (जेयूटी) अब भी कर्मचारियों की स्थायी नियुक्ति नहीं कर सका है. यहां वीसी के अतिरिक्त अधिकारी वर्ग के किसी पद पर स्थायी नियुक्ति नहीं हो सकी है. आलम यह है कि यहां प्रतिनियुक्ति पर आये अधिकारियों को सेवा विस्तार दे कर कर्मियों की कमी को पूरा किया जा रहा है. लेकिन पदों में स्थायी नियुक्ति हो इसके लिए जोर नहीं दियां रहा है.
तीन अधिकारियों को तीसरी बार मिला प्रतिनियुक्ति विस्तार
बताते चलें कि झारखंड यूनिवर्सिटी ऑफ टेक्नोलॉजी (जेयूटी) में सहायक कुलसचिव (प्रभारी रजिस्ट्रार), परीक्षा नियंत्रक व सहायक परीक्षा नियंत्रक की प्रतिनियुक्ति अवधि को तीसरी बार विस्तार दिया गया है. इनकी प्रतिनियुक्ति का दूसरा टर्म पांच नवंबर को समाप्त हो गया.
विवि ने उच्च व तकनीकी शिक्षा विभाग से कामकाज के बढ़ते दबाव को देखते हुए और नयी नियुक्ति नहीं होने की स्थिति में प्रतिनियुक्ति विस्तार देने का आग्रह किया, लेकिन विभाग द्वारा अब तक तीनों अधिकारियों को विस्तार नहीं मिल सका है. इसके बाद कुलपति ने अपने स्तर से तीनों अधिकारियों को विभाग से विस्तार मिलने की प्रत्याशा में 30 दिनों का विस्तार दिया है.
अलग-अलग जगहों से आये हैं अधिकारी
विवि में कार्यरत सहायक कुलसचिव (प्रभारी रजिस्ट्रार), परीक्षा नियंत्रक व सहायक परीक्षा नियंत्रक राज्य के दूसरे तकनीकी संस्थान से आये हैं. विवि में सहायक कुलसचिव के पद पर बीआइटी सिंदरी रसायन शास्त्र विभाग के असिस्टेंट प्रोफेसर डॉ कुणाल कुमार प्रतिनियुक्ति पर हैं और रजिस्ट्रार के प्रभार में भी हैं. इसी प्रकार परीक्षा नियंत्रक के पद पर पॉलिटेक्निक संस्थान के व्याख्याता राजेश प्रसाद प्रतिनियुक्ति पर हैं. वहीं सहायक कुलसचिव के पद पर पॉलिटेक्निक संस्थान के व्याख्याता राजदेव कुमार प्रतिनियुक्ति पर हैं.
2011 में हुई थी विश्वविद्यालय की स्थापना
इस विश्वविद्यालय की स्थापना 2011 में हुई थी, लेकिन उस दौरान कुलपति छोड़कर शिक्षकों की स्थायी नियुक्ति हुई ही नहीं थी. कुलपति की नियुक्ति भी यूजीसी की गाइडलाइन के आधार पर की गयी है. इस विश्वविद्यालय के अंतर्गत सरकारी निजी पीपीपी मोड पर 17 इंजीनियरिंग कॉलेज, 42 पॉलिटेक्निक कॉलेज और दो फार्मेसी कॉलेज संचालित हैं. इसके बावजूद अधिकारी और शिक्षकों का ना होना यह झारखंड के लिए दुर्भाग्यपूर्ण है.




