
GYANRANJAN
Ranchi : दिन 23 दिसंबर 2019. मौसम आज ही की तरह सर्द. हां, उस रोज थोड़ा कोहरा छाया हुआ था. तापमान 7-8 डिग्री के करीब. मगर सूबे का राजनीतिक तापमान चरम पर था. सर्द मौसम के बावजूद राजनीतिक गहमागहमी पूरे शबाब पर थी. सुबह से ही सबकी निगाहें टेलीविजन पर अटकी हुई थीं. झारखंड विधानसभा की 81 सीटों पर हुए चुनाव के नतीजों पर लोगों की नजर थी. सभी के मन में एक ही सवाल, किसपर गिरेगी गाज और किसके सिर सजेगा ताज. दोपहर बाद मौसम पर छाये कोहरे पूरी तरह साफ़ हो गए और साफ़ हो गयी थी झारखण्ड की सियासी तस्वीर भी. यह तय माना जाने लगा कि भाजपा के हाथ से झारखण्ड की सत्ता जा रही है. लगभग शाम चार बजे के यह स्पष्ट हो गया था कि झारखण्ड की पूर्ण बहुमत की सरकार पलट गयी है और हेमंत सोरेन सत्ता के नए बाजीगर बनकर निकले हैं.
झामुमो, कांग्रेस, राजद महागठबंधन की धमाकेदार जीत
झारखंड में हेमंत सोरेन की अगुवाई वाले झामुमो, कांग्रेस और राजद के महागठबंधन ने राज्य विधानसभा चुनावों में धमाकेदार जीत दर्ज की. 81 सदस्यीय विधानसभा में जहां महागठबंधन ने बहुमत से ज्यादा 47 सीटें जीतीं, वहीं सत्तारूढ़ भाजपा को सिर्फ 25 सीटों से ही संतोष करना पड़ा.चुनावों में भाजपा का 65 सीटें जीतने का अभियान ध्वस्त हो गया. इसी के साथ महाराष्ट्र में सत्ता से बाहर होने के बाद अब झारखंड भी भाजपा के हाथ से फिसल गया. एक साल में भाजपा ने पांच राज्यों (राजस्थान, मध्यप्रदेश, छत्तीसगढ़, महाराष्ट्र और अब झारखंड) में सत्ता गंवा दी. हलांकि बाद में भाजपा को मध्यप्रदेश में सरकार बनाने के सफलता मिल गयी. झारखंड के बनने के 19 साल के इतिहास में कोई भी सत्तारूढ़ पार्टी सत्ता में वापसी नहीं कर पाई है.
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सीएम रघुवर दास समेत पांच मंत्री हारे
चुनाव में मुख्यमंत्री रघुवर दास समेत भाजपा के 5 मंत्री हार गए. विधानसभा अध्यक्ष सहित भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष को जनता ने नकार दिया. कोल्हन प्रमंडल में तो भाजपा का खाता तक नहीं खुला. भाजपा को उत्तरी और दक्षिणी छोटानागपुर प्रमंडल में सर्वाधिक जीत को लेकर भरोसा था, लेकिन यहां भी भाजपा पहले की जीत को दोहरा नहीं सकी. रघुवर सरकार के समय संथालपरगना को फोकस किया गया था. मुख्यमंत्री रहते रघुवर दास ने सबसे ज्यादा समय संथालपरगना प्रमंडल को दिया था जहां महज चार सीट पर ही भाजपा को संतोष करना पड़ा.
दलबदलुओं को भी जनता ने खूब सबक सिखाया
कांग्रेस के पूर्व प्रदेश अध्यक्ष सुखदेव भगत चुनाव के समय कांग्रेस को छोड़कर भाजपा का दामन थामे थे, जनता ने उन्हें भी नकार दिया. इसी तरह रघुवर सरकार में विधानसभा में सत्तारूढ़ दल के मुख्य सचेतक रहे राधाकृष्ण किशोर ने भाजपा से टिकट नहीं मिलने पर आजसू का दामन थामा, मगर जनता को अपने साथ नहं कर पाये. इसी तरह कांग्रेस के पूर्व प्रदेश अध्यक्ष प्रदीप कुमार बालमुचू ने भी आजसू के टिकट पर चुनाव लड़ा, हार गए. चुनाव पूर्व सीटों के बंटवारे को लेकर भाजपा से पहली बार अलग होकर चुनाव लड़ने वाली ऑल झारखंड स्टूडेंट यूनियन (आजसू) पार्टी को भी 2 सीटें ही मिलीं.
पांचवी बार सोरेन परिवार को सत्ता मिली
15 नवंबर, 2000 को बिहार से अलग होकर नया राज्य बनने के बाद झारखंड में 19 साल में पांचवीं बार सोरेन परिवार को सत्ता मिली. हेमंत के पिता शिबू सोरेन तीन बार राज्य के सीएम रहे. हलांकि शिबू सोरेन का कार्यकाल कभी भी लम्बा नहीं रहा. वहीं हेमंत सोरेन दूसरी बार सीएम बने.
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