
Ranchi : रिम्स अस्पताल का नाम सुनते ही अव्यवस्था का आलम मन में आने लगता है. 1500 बेड के इस अस्पताल में दूर दराज से लोग इलाज के लिए आते हैं. डॉक्टर मरीजों का इलाज कर उन्हें ठीक करते हैं. लेकिन सबसे अधिक दुर्दशा वैसे लोगों की होती है जो यहां लावारिश अवस्था में लाए जाते हैं. ऐसा ही एक मामला सामना आया है. जब 60 वर्षीय लावारिश व्यक्ति का शव पिछले 22 घंटे से रिम्स के न्यूरोसर्जरी वार्ड में पड़ा रहा. व्यक्ति की मौत के बाद डॉक्टरों से शव ले जाने की अनुमति में 22 घंटे का वक्त लग गया. लेकिन उसे एक ट्रॉली मुर्दाघर ले जाने के लिए नसीब नहीं हो सकी. शायद इसलिए की वो लावारिश है. उसका इस समाज में अपना कोई नहीं. तभी तो शव को उचित सम्मान और जगह तक पंहुचने में 22 घंटे तक इंतजार करना पड़ा.
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धुर्वा से इलाज के लिए लाया गया था रिम्स
अज्ञात व्यक्ति को धुर्वा के एचईसी से 14 जुलाई की रात करीब नौ बजे रिम्स लाया गया था. सड़क हादसे में व्यक्ति के सिर पर गंभीर चोट आई थी. जिसके इलाज के लिए उसे रिम्स के न्यूरोसर्जरी विभाग में डॉ सीबी सहाय के यूनिट में भर्ती किया गया था.
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ट्रॉली मैन को सूचना देने पर भी नहीं ले गए शव
न्यूरोसर्जरी विभाग में इलाजरत एक मरीज के परिजन तरुण सिंह चौहान ने बताया कि व्यक्ति की मौत के बाद ट्रॉली मैन को भी सूचना दी गयी पर किसी ने शव को नहीं उठाया. 22 घंटे बीत जाने के बाद वार्ड से शव को ले जाया गया. उन्होंने कहा कि समाज के साथ डॉक्टरों की मानवता भी मर गयी है.
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