
Ranchi: कांके विधायक समरी लाल द्वारा वर्ष 2019 झारखंड विधानसभा चुनाव में दिए गए जाति प्रमाण पत्र गलत बताते हुए कांग्रेस प्रत्याशी सुरेश बैठा की चुनाव याचिका की सुनवाई झारखंड हाईकोर्ट में सोमवार को हुई. मामले में वरीय अधिवक्ता अनिल सिन्हा ने कोर्ट को बताया कि समरी लाल की ओर से गवाही को बंद करने के झारखंड हाईकोर्ट के आदेश को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी गई है, जिस पर संभवत 20 जनवरी के आसपास सुनवाई हो सकती है. हाईकोर्ट ने मामले की सुनवाई 30 जनवरी निर्धारित की है. कोर्ट ने कहा कि अगर प्रतिवादी समरी लाल के पक्ष में सुप्रीम कोर्ट से कोई आदेश नहीं आता है तो कोर्ट और समय नहीं देगा.
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बता दें कि समरी लाल की ओर से कुल 17 गवाही हुई है. 15 गवाही और 3 ऑफिशियल गवाही यानी कुल 18 गवाही होनी थी , इसमें से एक ऑफिशियल गवाह की गवाही नहीं हो सकी है. 5 जनवरी को समरी लाल की ओर से गवाही बंद कर दी गई है, लेकिन उनकी ओर से कहा गया है की वे और गवाह लाना चाहते हैं, लेकिन कोर्ट ने उन्हें और गवाह लाने से मना कर दिया, इस पर हाईकोर्ट के आदेश को उनकी ओर से सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी गई है. समरी लाल की ओर से लगभग सभी गवाहों ने कोर्ट में बताया है कि समरी लाल का परिवार आजादी के पहले से रांची में रह रहा है, लेकिन इससे संबंधित कोई दस्तावेज उसके पास उपलब्ध नहीं है.
प्रार्थी की ओर से अधिवक्ता विभास सिन्हा और अखौरी अविनाश ने पैरवी की. वही प्रतिवादी की ओर से वरीय अधिवक्ता अनिल कुमार सिन्हा ने पैरवी की. बता दें कि वर्ष 2019 के झारखंड विधानसभा चुनाव में कांके से भाजपा के टिकट पर समरी लाल जीते थे. सुरेश बैठाने उनके जाति प्रमाण पत्र को गलत बताते हुए उनके निर्वाचन को रद्द करने का आग्रह कोर्ट से किया है.




