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कांग्रेस के नए ‘ठाकुर’ के समक्ष चुनौतियां अपार

Gyan Ranjan

Ranchi: कांग्रेस आलाकमान ने बुधवार को झारखंड कांग्रेस में बड़ा फेरबदल किया है. एक झटके में प्रदेश अध्यक्ष और कार्यकारी अध्यक्षों को बाहर का रास्ता दिखाया गया है. आलाकमान के इस निर्णय के पीछे कई निहितार्थ हैं. झारखंड कांग्रेस में चल रही नूर कुश्ती के बीच न्यूज़ विंग ने पिछले महीने ही यह संकेत दे दिया था कि बहुत जल्द पार्टी के संगठन में बड़ा फेरबदल होने जा रहा है. जिसपर बुधवार को मुहर लगी है. यह भी जानकारी मिल रही है कि बहुत जल्द झारखंड कांग्रेस में बड़े पैमाने पर सफाई अभियान चलाया जायेगा. बहरहाल कांग्रेस के नए अध्यक्ष राजेश ठाकुर बनाए गए हैं और सांसद गीता कोड़ा, विधायक बंधु तिर्की, पूर्व मंत्री जलेश्वर महतो और शहजादा अनवर को कार्यकारी अध्यक्ष बनाया गया है. पिछले दो दशक से कांग्रेस में जो परिपाटी देखने को मिल रही है उस हिसाब से राजेश ठाकुर को झारखंड कांग्रेस का ताज तो मिल गया है लेकिन उनके समक्ष चुनौतियां भी अपार हैं.

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संगठन विस्तार सबसे बड़ी चुनौती

राजेश ठाकुर के समक्ष सबसे बड़ी चुनौती है संगठन का विस्तार. झारखंड कांग्रेस में संगठन का विस्तार करना कितनी बड़ी चुनौती है इसका अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि पार्टी के दो-दो प्रदेश अध्यक्ष का कार्यकाल समाप्त हो गया लेकिन वे कार्यसमिति का गठन नहीं कर सके. जब कभी भी कार्यसमिति के गठन को लेकर सुगबुगाहट हुई पार्टी में ताना-तानी शुरू हो जाती थी. झारखंड अलग राज्य बनने के बाद यह देखा गया है कि जब भी संगठन का विस्तार हुआ है पार्टी के भीतर जबरदस्त तरीके से हंगामा हुआ है. कई बार तो हाथापाई तक की नौबत आई है. पार्टी में कुछ नेता तो ऐसे हैं जो विरोध करने के लिए ही जाने जाते हैं. यहां तक कि उन्हें पार्टी में बड़ा पद भी दिया जाता है तब भी उनका विरोधी तेवर कायम रहता है. राजेश ठाकुर के समक्ष यह चुनौती बड़ी है कि वे कैसे संगठनिक विस्तार करते हैं और वैसे नेता जो कांग्रेस को अपनी जागीर समझकर काम करते हैं उनपर अंकुश लगाते हैं.

बड़े नेताओं को साधने में कितने सफल होते हैं ठाकुर

राजेश ठाकुर के समक्ष पार्टी के बड़े नेताओं को साधना भी एक बड़ी चुनौती है. आलाकमान ने रामेश्वर उरांव को हटाकर ठाकुर को प्रदेश नेतृत्व की जिम्मेवारी दी है. जाहिर है रामेश्वर गुट को यह पच नहीं रहा होगा. पहले भी प्रदेश कार्यालय में रामेश्वर गुट और राजेश ठाकुर के बीच तनातनी हो चुकी है. एक दूसरे को देख लेने तक की भी नौबत आई थी. अब राजेश ठाकुर कैसे उस गुट को हैंडल करते हैं यह देखना दिलचस्प होगा. साथ ही राजेश ठाकुर के समक्ष सुबोधकांत सहाय, डॉ अजय कुमार, धीरज साहू, आलमगीर आलम, दीपिका पाण्डेय, इरफ़ान अंसारी, केशव महतो कमलेश सरीखे नेताओं के लोगों को भी साधना होगा. मालूम हो कि सुबोधकांत सहाय का नाम भी प्रदेश अध्यक्ष के लिए उछाला जा रहा था. इसके आलावा इरफ़ान अंसारी और केशव महतो कमलेश भी प्रदेश अध्यक्ष की लाइन में थे. लेकिन इन सभी पर राजेश ठाकुर भारी पड़े. प्रदेश कांग्रेस प्रभारी आरपीएन सिंह की नजदीकी का फ़ायदा राजेश ठाकुर को मिला है और यह बात भी साफ़ हो गयी है कि आज भी आलाकमान के समक्ष सबसे मजबूत स्थिति में आरपीएन सिंह ही हैं. पार्टी के भीतर प्रदेश प्रभारी के लाख विरोध के बावजूद भी संगठन के फेरबदल में उनकी ही चली है.

सभी वर्गों को साधने का  प्रयास

बुधवार को जो फेरबदल प्रदेश कांग्रेस में हुआ है उसमें आलाकमान ने सभी वर्गों को साधने का प्रयास किया है. सवर्ण को प्रदेश अध्यक्ष बनाया गया है तो कार्यकारी अध्यक्ष में दो आदिवासी, एक पिछड़ी जाति और एक अल्पसंख्यक को जगह दी गयी है. मिशन 2024 को ध्यान में रखकर आलाकमान ने यह कदम उठाया है. अब सबकी निगाहें कार्यसमिति के गठन और जिला अध्यक्षों के चयन पर है. जानकारी के अनुसार कांग्रेस का ध्यान राज्य के अल्पसंख्यकों के साथ अगड़ी और पिछड़ी जाति पर है. विधायक दल के नेता अल्पसंख्यक समुदाय से हैं. विधानसभा में सचेतक का पद भी अल्पसंख्यक और अगड़ी जाति के जिम्मे है. ऐसी सम्भावना व्यक्त की जा रही है कि संगठन के विस्तार में भी इन्हीं समुदाय को तवज्जो दी जायेगी.

कई पुराने चेहरे की हो सकती है घर वापसी

सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार कांग्रेस पार्टी में कई पुराने चेहरे की घर वापसी हो सकती है. इसमें मुख्य रूप से पूर्व प्रदेश अध्यक्ष प्रदीप कुमार बालमुचू, सुखदेव भगत, पूर्व विधायक दल के नेता मनोज यादव, वरिष्ठ नेता राधाकृष्ण किशोर समेत कई अन्य हैं. प्रदीप बलमुचू पर तो पहले ही बात बहुत आगे बढ़ चुकी थी लेकिन सुखदेव भगत को लेकर सबसे बड़ा काँटा रामेश्वर उरांव और धीरज साहू बने हुए थे. अब यह सम्भावना जताई जा रही है कि राजेश ठाकुर के आने के बाद इन नेताओं की घर वापसी हो सकती है.

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