
Ranchi: झारखंड एटीएस के कर्मियों को अब 50% अतिरिक्त वेतन नहीं मिलेगा. राज्य पुलिस मुख्यालय ने इस संबंध में आदेश जारी कर दिया है.
मिली जानकारी के अनुसार एटीएस के कर्मियों को सातवां वेतनमान मिल रहा है, ऐसे में प्रोत्साहन राशि के तौर पर मिलने वाली 50% राशि की कटौती की जा रही है.
एटीएस में तैनात पुलिसकर्मियों को मई महीने से 50 फ़ीसदी अतिरिक्त प्रोत्साहन भत्ता नहीं मिलेगा.
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वर्ष 2015 में मिली थी झारखंड में एटीएस को मंजूरी
झारखंड से आतंकियों के तार लगातार जुड़ते रहने के कारण इस पर नकेल कसने के लिए आखिरकार रघुवर सरकार ने आतंकवाद एटीएस के गठन की मंजूरी वर्ष 2015 में कैबिनेट की बैठक में दे दी थी.
पिछले पांच सालों से पुलिस मुख्यालय और सीआइडी के स्तर से एटीएस के लिए पांच प्रस्ताव भेजे गये थे. दस्ते के लिए कुल 243 पद सृजित किये गये थे जिसमें एक एसपी, छह डीएसपी, 11 पुलिस इंस्पेक्टर, 31 दारोगा, 21 जमादार, 20 हवलदार और 112 पुलिस के पद स्वीकृत किये गये थे.
एटीएस के अफसरों और पुलिसकर्मियों को काम काफी खतरनाक माना जाता है. इसको देखते हुए राज्य सरकार ने सभी कर्मियों को वेतन का 50 फीसद अतिरिक्त भत्ता देने का भी निर्णय लिया था.
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एनआइए की तर्ज पर काम करता है एटीएस
आतंकियों से जुड़े मामलों की जांच के लिए देश स्तर पर बनायी गयी एनआइए जिस तरह से काम करती है, उसी तरह से एटीएस भी राज्य स्तर पर काम कर रही है. इसकी रिपोर्टिग एजेंसी सीआइडी है.
तीन सालों के लिए प्रतिनियुक्त होते हैं पुलिसकर्मी
एटीएस में पुलिस अफसर और कर्मियों की तैनाती कम से कम तीन सालों के लिए होती है. इस दस्ते में झारखंड जगुआर के तीन बटालियन के पुलिसकर्मियों को शामिल कराया गया है.
इस बटालियन के कर्मी ग्रे-हाउंड की तर्ज पर दिये गये प्रशिक्षण से लैस हैं जो विपरीत परिस्थिति में काम करने में दक्ष बताये जाते हैं.
सभी की प्रतिनियुक्ति पुलिस मुख्यालय द्वारा गठित चयन बोर्ड द्वारा की जाती है. इसमें सीआइडी के अलावा मुख्यालय के भी वरीय अधिकारी शामिल रहते हैं.
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