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सोशल मीडिया से आतंकवादी वैधता हासिल कर लेते हैं : रिपोर्ट

चरमपंथी गुमनाम रहकर टि्वटर और यू ट्यूब जैसे सोशल मीडिया नेटवर्कों के जरिए खुद के लिए एक तरह की वैधता ढूंढ़ लेते हैं

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  London :  ब्रिटेन की आंतरिक सुरक्षा एजेंसी एमआई 5 की व्यवहार विज्ञान इकाई ने कहा है कि चरमपंथी विचारों वाले लोग आतंकवादियों को हमलों के लिए प्रोत्साहित करने के वास्ते सोशल मीडिया नेटवर्कों का इस्तेमाल कर रहे हैं. यह खुफिया इकाई मनोवैज्ञानिकों, मानवविज्ञानियों और मनश्‍चिकित्सकों सहित अपने दायरे को विस्तारित कर रही है. ये लोग चरमपंथियों के ऐसे ऑनलाइन विचारों की पहचान करते हैं जिनसे हमला हो सकता हो. इसने पाया है कि चरमपंथी गुमनाम रहकर टि्वटर और यू ट्यूब जैसे सोशल मीडिया नेटवर्कों के जरिए खुद के लिए एक तरह की वैधता ढूंढ़ लेते हैं. द संडे टाइम्स ने एमआई 5 के अधिकारी एलेक्स के हवाले से कहा, सोशल मीडिया एक ऐसा मंच उपलब्ध कराता है जहां लोग समान विचारधारा वाले लोगों के साथ अपने अनुचित विचारों को तलाश सकते हैं. 

एमआई 5 की व्यवहार इकाई के सदस्य ने कहा कि इससे चरमपंथी विचार वाले लोगों को एक तरह की वैधता और कृत्य करने के लिए प्रोत्साहन मिलता है. सुरक्षा कारणों से इस अधिकारी का पूरा नाम नहीं दिया गया है. कहा जाता है कि इस इकाई ने लंदन में मार्च 2017 में पांच लोगों की जान लेने वाले वेस्टमिंस्टर ब्रिज हमले के बाद से 14 आतंकी साजिशों को नाकाम कराने में मदद की है.  इस हमले में 49 लोग घायल भी हुए थे. 

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