
Ranchi: एक बेहतर समाज बनाने में शिक्षकों की भूमिका को सदियों से अहम माना गया है. कहने को तो इनका काम बच्चों को पढ़ना होता है. पर बेहतर समाज बन सके. जीवन को एक दिशा मिल सके. इसके लिए हर दौर में शिक्षकों ने खुद को साबित किया है. राज्य के शिक्षकों ने सदी की सबसे बड़ी त्रासदी कोराना महामारी के इस दौर में भी रियल वॉरियर की भूमिका निभायी.
स्कूल बंद होने के बाद भी इन्होंने न केवल अपने मूल पेशा को डिजिटल माध्यम से बरकरार रखा बल्कि आवश्यकता पड़ने पर लोगों को राशन दिलाने से लेकर उन्हें घर पहुंचाने तक का काम किया.
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कोरोना संकट के बीते पांच महीने के कठिन दौर में डॉक्टर, पारा मेडिकल के साथ-साथ मिल कर समाज के लिए काम किया. प्रतिनियुक्ति के तौर पर जनवितरण प्रणाली की दुकानों में रह कर लोगों को राशन दिलाया. क्वारेंटिन सेंटर्स पर आठ-आठ घंटे की ड्यूटी भी की. आवश्यकता पड़ने पर लोगों को उनके घरों तक पहुंचाया.
जनवितरण प्रणाली की दुकानों से हुई शुरुआत
कोरोना संकट के दौर में जब लोग घरों से निकलने से डरते थे, तब राज्य के शिक्षकों ने जनवितरण प्रणाली की दुकानों में दिन भर की ड्यूटी कर लोगों को समुचित तरीके से अनाज दिलाने का काम किया. इस दौरान शिक्षकों ने दो से तीन दुकानों में बिना रुके काम किया. लोगों के राशन कार्ड की जांच की. जरूरतमंद लोगों को राशन मिल सके, इसके लिए घर-घर जा कर राशन कार्ड की जांच की. लोगों को अनाज दिलाना सुनिश्चित कराया.
अप्रवासी मजदूरों को उनके घर पहुंचाया
पढ़ाने के मूल से इतर शिक्षकों ने लोगों को उनके घरों तक पहुंचाने काम भी किया. जून के महीने में जब सरकार रेलवे के सहयोग से अप्रवासी मजदूरों को ला रही थी, तब हटिया रेलवे स्टेशन से लोगों को उनके घरों तक पहुंचाने के लिए सामने आये. रांची से हजारीबाग, धनबाद, गोड्डा, देवघर, साहेबगंज तक लोगों को पहुंचाया. इसी दौर में विभिन्न स्टेट बोर्डर और सर्चिंग प्वाइंट्स पर अधिकारियों के साथ मिल कर दिन-रात जांच करने की ड्यूटी भी.
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यू-ट्यूब और व्हाट्स एप से करा रहे पढ़ाई
मार्च महीने से स्कूल बंद हैं. बच्चों की पढ़ाई रूके नहीं इसके लिए भी शिक्षकों ने पहल की. कई शिक्षकों ने बच्चों की पढ़ाई कराने के लिए नयी तकनीक भी सीखी. इस दौरान राज्य भर के शिक्षकों ने व्हाट्स एप ग्रुप बनाये. बच्चों को जोड़ा. ऑडिया-वीडियो फॉर्मेट में स्टडी मैटेरियल तैयार किये. आवश्यकता पड़ने पर बच्चों के मोबाइल रिचार्ज करने से लेकर लॉउडस्पीकर लगाकर उन्हें पढ़ाया. यह सिलसिला शिक्षकों की ओर से अब तक चल रहा है.
घर-घर पहुंचाया एमडीएम राशन और पैसे
स्कूल बंद होने से बच्चों का मध्याहन भोजन बंद हो गया था. बच्चों को यह पोषाहार मिलता रहे इसके लिए भी शिक्षकों ने काम किया. मध्याहन भोजन का अनाज और अनाज को पकाने के दौरान आने वाले कुकिंग कॉस्ट को उनके घरों तक पहुंचाया. जून महीने से शुरू हुए इस अनाज घर-घर पहुंचाने का सिलसिला का 31 अगस्त तक चला. इसके अलावा स्कूल किट और किताब भी बांटीं.
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