
Ranchi: राज्य में एक बार फिर से काबिल अफसर को किनारा किया गया. सरकार का भरोसा भी काम नहीं आया. सीएस रैंक के लिये सरकार ने फिर एक चौंकाने वाला फैसला लिया. वर्तमान मुख्य सचिव सुधीर त्रिपाठी को अगले तीन माह के लिये एक्सटेंशन दिया गया. अब सुधीर त्रिपाठी दिसंबर तक मुख्य सचिव के पद पर बने रहेंगे.
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सत्ता के गलियारों में चर्चा थी कि वर्तमान विकास आयुक्त डीके तिवारी को मुख्य सचिव की जिम्मेवारी सौंपी जायेगी. सूत्रों की मानें तो, सरकार ने उन्हें मुख्य सचिव बनाने का भरोसा भी दिया था. तिवारी 1986 बैच के अफसर हैं. उनका कार्यकाल 31 मार्च 2020 तक का है. ऐसे में सरकार का यह फैसला चौंकाने वाला रहा. इसी चौंकाने वाले फैसले के कारण झारखंड कैडर के आईएएस केंद्रीय प्रतिनियुक्ति में जाना उचित समझ रहे हैं.
सीएस नहीं बनने के कारण दो अफसर छोड़ चुके हैं झारखंड
सीएस नहीं बनने के कारण दो अफसरों ने झारखंड छोड़ केंद्रीय प्रतिनियुक्ति में ही जाना उचित समझा. पूर्व मुख्य सचिव राजीव गौबा के केंद्रीय प्रतिनियुक्ति में जाने के बाद सीएस रैंक के अफसर यूपी सिंह को झारखंड बुलाया गया. झारखंड आने पर उन्हें खान व उद्योग विभाग की जिम्मेवारी सौंपी गई. लेकिन उन्हें सीएस न बनाकर राजबाला वर्मा को सीएस बनाया गया. इसके बाद यूपी सिंह केंद्रीय प्रतिनियुक्ति में चले गये. इसी तरह पूर्व मुख्य सचिव राजबाला वर्मा के कार्यकाल के समाप्त होने के बाद अमित खरे को सीएस बनाने का पूरा भरोसा दिया गया, लेकिन उन्हें सीएस नहीं बनाया गया. वे भी केंद्रीय प्रतिनियुक्ति में चले गये.
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झारखंड छोड़ रहे आईएएस
सरकार के चौंकाने वाले फैसले के कारण कई आईएएस केंद्रीय प्रतिनियुक्ति में जाना बेहतर समझ रहे हैं. स्वास्थ्य विभाग की प्रधान सचिव निधि खरे, गृह विभाग के प्रधान सचिव एसकेजी रहाटे भी केंद्रीय प्रतिनियुक्ति में जा रहे हैं. इसके अलावा राजीब गौबा, अमित खरे, एनएन सिन्हा, राजीव कुमार, यूपी सिंह, अलका तिवारी, एनएन सिन्हा, एसएस मीणा, एमएस भाटिया केंद्रीय प्रतिनियुक्ति में हैं. वहीं राज्य में सीएस रैंक के अफसर डीके तिवारी, सुखदेव सिंह, केके खंडेलवाल, एल खियांग्यते और इंदू शेखर चतुर्वेदी हैं. इसमें केके खंडेलवाल को वीआरएस की मंजूरी मिल गई है. इंदू शेखर भी केंद्रीय प्रतिनियुक्ति में जाने का आवेदन दे चुके हैं.
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