Ranchi: अपनी सेवा को नियमित करने समेत विभिन्न मांगों को लेकर मोरहाबादी मैदान में पिछले चार दिनों सहायक पुलिसकर्मियों का आंदोलन जारी है. गौरतलब है कि 2350 सहायक पुलिसकर्मी नियुक्ति के समय दायर किए गए शपथ पत्र के विरुद्ध जाकर आंदोलन कर रहे हैं.
सहायक पुलिसकर्मियों की बहाली के समय ही बताया गया था कि वो स्थायी नियुक्ति के लिए दावा नही कर सकते. इसके लिए चयनित अभ्यर्थियों ने भी शपथ पत्र दायर किया था,अब इस मामले में आंदोलन हो रहा है सिर्फ तीन साल की अनुबंध पर नौकरी करने के बाद अब स्थायी नौकरी मांग रहे हैं.
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जानिये क्या थी सहायक पुलिस कर्मियों के लिए सेवा शर्त
सहायक पुलिसकर्मियों की बहाली के समय ही बताया गया था कि इनकी सेवा दो वर्षों के लिए अनुबंध के आधार पर होगी. कार्य संतोषप्रद होने पर जिले के एसपी की अनुशंसा के आधार पर एक-एक वर्ष के लिए अधिकतम तीन वर्षों तक के लिए संबंधित क्षेत्र के डीआइजी के अनुमोदन पर विस्तारित किया जा सकेगा. किसी भी परिस्थिति में कॉन्ट्रैक्ट की अवधि पांच वर्ष से अधिक नहीं होगी.
सहायक पुलिस के पद पर की गई सेवा मात्र अनुबंध के आधार पर की गई सेवा होगी और इसके आधार पर भविष्य में किसी प्रकार की अस्थायी नियोजन अथवा अन्य कोई दावा मान्य नहीं होगा. इस संबंध में प्रत्येक चयनित अभ्यर्थियों से चयन होने के बाद इसको लेकर शपथ पत्र देना अनिवार्य किया गया था.
सहायक पुलिस की ड्यूटी के दौरान मृत्यु की स्थिति में राज्य के होमगार्ड के समान अनुग्रह अनुदान दिए जाने का प्रावधान है. लेकिन आश्रित को नौकरी देने का कोई प्रावधान नहीं है.
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पिछले चार दिनों से रांची में डटे हैं सहायक पुलिसकर्मी
नक्सलियों से लड़ने के लिए तीन साल पहले बहाल किये गये 2,350 सहायक पुलिसकर्मी पिछले चार दिनों से रांची में डटे हुए हैं. 12 जिलों से आये ये सहायक पुलिसकर्मी मोरहाबादी मैदान में अपनी मांगों के समर्थन में आंदोलनरत हैं. बीते 12 सितंबर की रात को रांची रेंज के डीआइजी अखिलेश झा, रांची के एसएसपी सुरेंद्र कुमार झा और गृह सचिव राजीव अरुण एक्का के साथ उनकी वार्ता विफल हो गयी थी. इसके बाद कोई सरकारी अधिकारी उनसे बात करने नहीं आया. 12 सितंबर को अधिकारियों ने आंदोलन कर रहे सहायक पुलिसकर्मियों से कहा था कि क्षेत्र में धारा 144 लगा हुआ है, इसलिए मोरहाबादी मैदान को खाली कर दें. लेकिन, आंदोलनकारी इस बात पर अड़े रहे कि जब तक मुख्यमंत्री उनसे बात नहीं करेंगे, वह अपनी जगह से नहीं हिलेंगे.
2350 सहायक पुलिसकर्मियों की साल 2017 में हुई थी नियुक्ति
बता दें कि राज्य के 12 नक्सल प्रभावित जिलों से कुल 2350 सहायक पुलिसकर्मियों की साल 2017 में नियुक्ति हुई थी. सरकार द्वारा 10 हजार का मानदेय तय किया गया था. सहायक पुलिसकर्मी के पद पर बहाल हुए अभ्यर्थियों को तीन साल के बाद स्थायी करने की बात कही गयी थी. हालांकि 3 वर्ष पूरा होने के बाद भी किसी का स्थायीकरण नहीं किया गया है.
यही वजह है कि राज्य भर के 2350 पुलिसकर्मी आंदोलन को उतारू हैं. आंदोलन कर रहे 2,350 सहायक पुलिसकर्मियों में से 1000 पर सोमवार को प्राथमिकी दर्ज कर ली गयी है. इनमें से 20 लोगों को नामजद किया गया है. इससे पहले, सुबह एक बार फिर सरकार के प्रतिनिधियों के साथ इनकी वार्ता हुई, जो विफल रही. ये लोग अपनी मांगें पूरी होने तक आंदोलन पर डटे हुए हैं.
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