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एक ओर जर्जर भवन में जान हथेली पर लेकर पढ़ रहे छात्र, वहीं विभाग नहीं कर पा रहा राशि खर्च

Chhaya

Ranchi : केंद्र सरकार की महत्वकांक्षी योजनाओं में से एक है सर्व शिक्षा अभियान. जिसके तहत  समग्र शिक्षा कार्यक्रम के तहत स्कूलों के विकास समेत अन्य मदों में खर्च के लिये राशि आवंटित की जाती है. लेकिन इन राशियों का स्कूली शिक्षा साक्षरता विभाग की ओर से विकास कार्यों में झारखंड में पूरा खर्च नहीं किया गया. पिछले दो सालों में इस मद से बहुत कम राशि खर्च की गयी.

सरकारी स्कूलों में आधारभूत संरचनाओं और अन्य कार्यों के लिए साल 2018-19 में 45746.29 लाख राशि केंद्र से झारखंड को दी गयी. जिसमें से 4592.75 लाख राशि ही खर्च की गयी. जो कुल बजट का दस प्रतिशत रहा.

इसी तरह से साल 2017-18 में इसी मद के लिए 9058.20 लाख में से 1880.71 लाख राशि ही खर्च की गयी. जो कुल बजट का 21 प्रतिशत रहा. 2016-17 में 15495.61 लाख में से 9669.22 लाख राशि ही खर्च की गयी. जो कुल बजट का 62 प्रतिशत है.

इसी तरह साल 2015-16 में इस मद के लिए 35204.41 लाख में से 19796.80 लाख खर्च हुआ. जो 56 प्रतिशत रहा.

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आवासीय स्कूलों में 2017-18 में मात्र 35 प्रतिशत राशि खर्च की गयी

एक ओर जर्जर भवन में जान हथेली पर लेकर पढ़ रहे छात्र, वहीं विभाग नहीं कर पा रही राशि खर्च
खर्च की राशि का ब्यौरा

इस अभियान तहत आवासीय स्कूलों और हॉस्टलों में विकास कार्य के लिए अलग से राशि आवंटित की जाती है. इस मद से हॉस्टलों में आधारभूत संरचना समेत अन्य विकास कार्य किये जाने हैं. साल 2018-19 में 675.70 लाख बजटीय प्रावधान था. जिसमें से 398.96 लाख खर्च किये गये. जो बजट का 57 प्रतिशत है.

साल 2017-18 की बात की जाये तो खर्च प्रतिशत और भी कम है. इस साल 846.90 लाख राशि आवंटित की गयी. जिसमें से 299.47 लाख ही खर्च की गयी. जो मात्र बजट का 35 प्रतिशत है. साल 2016-17 में 507.70 लाख में से 208.54 लाख खर्च की गयी.

वहीं 2015-16 में 202 में से 116.03 लाख राशि खर्च की गयी. साल 2016-17 में कुल बजट का 41 प्रतिशत, वहीं 2015-16 में 57 प्रतिशत रहा.

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डिजिटलाइजेशन में मात्र 26 प्रतिशत राशि खर्च की गयी

विगत कुछ सालों से देश में सरकारी स्कूलों के डिजिटलाइजेशन में जोर दिया जा रहा है. जिसके तहत स्कूलों में छात्रों को ई पाठशाला से पढ़ाना. इसके लिए अन्य प्रावधान भी बच्चों को शिक्षित करने के लिए है.

साल 2018-19 में 5906.78 लाख राशि केंद्र ने आवंटित की. इसमें से 1520.75 लाख ही खर्च की गयी. जो कुल बजट का 26 प्रतिशत रहा. केंद्र की ओर से यह योजना साल 2018 में लागू की गयी. जबकि सूबे के मुख्यमंत्री भी कई बार डिजिटल झारखंड की घोषणा करते सुने गये हैं.

इसके बाद भी राज्य में स्कूलों के डिजिटलाइजेशन पर विभाग राशि खर्च नहीं कर पा रही. यह योजना सम्रग शिक्षा कार्यक्रम के तहत ही संचालित है. जिसमें एनसीईआरटी पैर्टन को इंफॉर्मेशन  और कम्यूनिकेशन टेक्नोलॉजी डिपार्टमेंट की ओर से निर्गत किताबों को पढ़ाना है.

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