
Ranchi. कोरोना संकट के खतरे के बीच लंबे समय से राज्यभर में आंगनबाड़ी केंद्रों में ताला लगा है. इसके चलते नौनिहालों के सामने भुखमरी और कुपोषण का खतरा भी खड़ा होने लगा है. पश्चिमी सिंहभूम के आंगनबाड़ी केंद्रों में रजिस्टर्ड बच्चों को नियमित तौर पर निर्धारित मात्रा में पोषाहार नहीं मिल रहा है. यह स्थित पिछले साल मार्च से शुरू हुए कोरोना की चुनौतियों के साथ ही अब तक जारी है.
जिलेभर में 2330 केंद्र हैं. इनमें प्रति केंद्रों में औसतन 30 बच्चे इनरॉल्ड हैं. इस हिसाब से देखा जाये तो दो वर्षों से 70 हजार से भी अधिक बच्चों के सामने भूखमरी और कुपोषण का संकट खड़ा होने को है. अब खाद्य संगठन से जुड़ी संस्थाओं ने सरकार के पास फरियाद लगायी है.
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तुरंत खुले आंगनबाड़ी केंद्रः मंच
खाद्य सुरक्षा जन अधिकार मंच, पश्चिमी सिंहभूम की सदस्य नागी खलखो बताती हैं कि जिलेभर में आंगनबाड़ी सेवाओं की स्थिति दयनीय है. 6 माह से 3 वर्ष के बच्चों और 3-6 वर्ष के बच्चों को हर महीने नियमित रूप से और उचित मात्रा में पोषाहार देना है. यह रेगुलर नहीं मिल रहा है.
पोषाहार व सूखा राशन हर महीने की बजाये 3-4 महीने में एक बार ही दिया जा रहा है. कई जगहों पर निर्धारित मात्रा से बहुत कम सप्लाई हो रही है. पिछले दो वर्षों में (17 महीने में) अब तक केवल 4-5 बार ही कुछ-कुछ मिला है. कायदे से 16 बार राशन मिलना ही चाहित था. कहीं कुछ ही महीनों का चावल मिला है तो कहीं कहीं-कहीं इसके साथ में आलू.
गर्भवती और धात्री महिलाओं को मिलने वाले पोषाहार की भी ऐसी ही दयनीय स्थिति है. अभी जो स्थिति बनी हुई है, उसमें जरूरी है कि आंगनबाड़ी केंद्रों को भी खोला जाये. इसके लिये समाज कल्याण मंत्री जोबा मांझी को लिखित रूप में आवेदन तीन दिनों पहले ही दिया गया है.
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दोषियों पर एक्शन की मांग
आंगनवाड़ी सेवाओं के कारण कई लाभुकों का निवाला छीना गया. मंच ने इसके लिये दोषियों पर कार्रवाई करने की भी मांग मंत्री जोबा मांझी से की है. उन्हें एक ज्ञापन सौंपकर कहा है कि आंगनवाड़ियों को जल्दी से खोलें. वर्तमान मेन्यू में स्थानीय व पारंपरिक साग, दलहन, कंद आदि को जोड़ने के लिए भी विशेष प्रावधान हो. आंगनवाड़ी सेवाओं से वंचित होने पर दोषी कर्मियों व पदाधिकारियों पर खाद्य सुरक्षा अधिनियम के अनुसार कार्यवाई हो.
इसके साथ ही सम्बंधित बच्चों, महिलाओं के लिए खाद्य सुरक्षा भत्ता सुनिश्चित किया जाए. केंद्र में गर्भवती व धात्री महिलाओं एवं बेसहारा व्यक्तियों को पोषणयुक्त पका हुआ भोजन मिले. ज़िले के सुदूर टोलों में मिनी आंगनबाड़ी केंद्र शुरू किये जायें.
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क्या कर रहा है जिला प्रशासन
पश्चिमी सिंहभूम की जिला कल्याण पदाधिकारी अनिशा के मुताबिक अभी चावल आ चुका है. जेएसएलपीएस की महिला समूह के माध्यम से इसका वितरण शुरू है. बीच में जेएसएलपीएस के पास समय पर चावल उपलब्ध नहीं हो पाने के कारण समस्या आयी थी. इनके जरिये ही मुंगफली और अन्य निर्धारित सामग्री की खरीद करके वितरण किया जाता है. टीएचआर (टेक होम राशन) की व्यवस्था उन्हीं पर है. उम्मीद है कि समस्या का निदान अब हो जायेगा.
जेएसएलपीएस की सीइओ बोलीं, लॉकडाउन के कारण डिस्ट्रीब्यूशन हुआ प्रभावित
जेएसएलपीएस की सीइओ नैंसी सहाय ने न्यूजविंग से कहा कि सभी जिलों में टीएचआर का जिम्मा महिला समूहों के ऊपर है. समाज कल्याण विभाग का भी इसमें सहयोग है. बीच में कोरोना और लॉकडाउन के कारण डिस्ट्रीब्यूशन का काम प्रभावित हुआ था. 10 दिनों पहले से सभी जिलों में डिस्ट्रिब्यूशन का काम फिर से रेगुलर हो गया है. अगर किसी जिले में शिकायत आ रही है तो सरकार उसे प्राथमिकता के आधार पर देखते हुए निदान करेगी.
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