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JSSC नियुक्ति नियमावलीः भाषा विवाद को ले सियासत शुरू, सत्तारूढ़ दलों में भी दरार

तृतीय और चतुर्थ श्रेणियों की नौकरी की परीक्षा में सिर्फ 12 क्षेत्रीय भाषाएं ही हुई हैं शामिल

Ranchi: जेएससीसी नियुक्ति में भाषा विवाद के मामले ने तूल पकड़ लिया है. पिछले दिनों राज्य सरकार ने तृतीय और चतुर्थ श्रेणियों की नौकरी में 12 क्षेत्रीय भाषाओं को शामिल किया है. अब इसपर राजनीति शुरू हो गयी है. यह मामला पूरे राज्य में आंदोलन का रूप ले रहा है. भाजपा और आजसू पार्टी इसे राजनीतिक मुद्दा बना रहे हैं.

दिलचस्प यह है कि सरकार को समर्थन करनेवाले दल भी इस निर्णय के पक्ष में नहीं दिख रहे हैं. सरकार के इस निर्णय ने मंत्रियों व विधायकों की भी परेशानी बढ़ा दी है. वहीं राज्यभर के छात्रों में भी इस मामले को लेकर उबाल है. अब क्षेत्र के युवा सरकार से जवाब मांग रहे है. अगस्त में आंदोलन की तैयारी चल रही है.

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Sanjeevani

नियमावली पर क्या है विभिन्न राजनीतिक पार्टियों का स्टैंड :

भाजपाः

भाजपा ने राज्य सरकार की नयी नियुक्ति नियमावली को झारखंड की जनता के बीच भेदभाव करने वाला बताया है. पार्टी ने इसका विरोध करने का निर्णय भी लिया है. भाजपा ने कहा है कि इस नीति को लागू नहीं होने दिया जायेगा.

आजसूः

नियुक्ति नियमावली को लेकर आजसू ने भी पुरजोर विरोध किया है. पार्टी प्रवक्ता देवशरण भगत ने इसे झारखंड आंदोलन की मूल भावना के विपरित बताया है. भगत ने कहा कि हेमंत सरकार ने नियुक्ति नियमावली में संशोधन कर खतियानी अहर्ता को खत्म कर कागजी अहर्ता को लागू कर दिया है.

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JMM में भी दो तरह की राय

झामुमो ने राज्य सरकार की नियोजन नीति को ऐतिहासिक बताया है. आदिवासी मूलवासी के हक में बनायी गयी नीति बताया है. झामुमो प्रवक्ता व महासचिव सुप्रियो भट्टाचार्य ने कहा है कि सारी खामियों को दूर कर सरकार ने नीति बनायी है. अधिसूचित और गैर अधिसूचित क्षेत्र में बांट कर तृतीय व चतुर्थ वर्ग की नियुक्तियों में किये गये घालमेल को हेमंत सोरेन सरकार ने विराम लगा दिया है. जिसकी नाभी इस मिट्टी में गड़ी हो, उसी को नौकरी में स्थान मिलेगा.

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मगही और भोजपुरी को भी मिले जगहः मिथिलेश

झामुमो कोटे से पेयजल एवं स्वच्छता मंत्री बने मिथिलेश ठाकुर ने भाषा को लेकर अपनी आपत्ति दर्ज करायी है. उन्होंने 12 क्षेत्रीय भाषाओं को शामिल करने के अलावा मगही और भोजपुरी को भी क्षेत्रीय भाषा की सूची में शामिल करने की मांग की है. ताकि, पलामू प्रमंडल के तीन जिलों गढ़वा, पलामू व लातेहार के अलावा चतरा जिले के युवाओं को JSSC की परीक्षा में समान रूप से मौका मिले.

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निर्णय पर हो दोबारा विचारः कांग्रेस

इधर, सरकार ने जो JSSC नियुक्ति नियमावली जारी की है उसको लेकर हेमंत सरकार में शामिल कांग्रेस भी पक्ष में नहीं है. कांग्रेस की विधायक दीपिका पांडेय ने भी मुख्यमंत्री को पत्र लिख कर इस मामले पर दोबारा विचार करने का आग्रह किया है. उन्होंने कहा कि मंत्रिपरिषद द्वारा झरखण्ड कर्मचारी आयोग द्वारा आयोजित किये जाने वाले परीक्षाओं में क्षेत्रीय भाषाओं की सूची में हिंदी, अंगिका, मैथिली मगही, भोजपुरी आदि को शामिल नहीं करने से राज्य के युवाओं में घोर निराशा है.

इस विषय पर सोशल मीडिया से लेकर सड़क तक सरकार के इस निर्णय की आलोचना हो रही है. उन्होंने आग्रह किया है कि क्षेत्रीय भाषाओं में उक्त भाषाओं को भी शामिल किया जाए. ऐसा नहीं करने से झारखंड के हजारों युवाओं का भविष्य प्रभावित होगा.

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क्या कहते हैं छात्र संगठन

संशोधित नियुक्ति नियमावली को कतई स्वीकार नहीं करेंगेः झारखंड यूथ एसोसिशन

झारखंड यूथ एसोसिशन ने नियुक्ति नियमावली को झारखंड विरोधी बताया है. छात्रों ने कहा कि यह नियमावली झारखंड के शहीदों के सपनों के विपरीत है. इस प्रस्ताव को झारखंडी युवा कतई स्वीकार नहीं करेंगे. छात्रों ने कहा कि इस प्रस्ताव में हिंदी, अंग्रेजी, संस्कृत को पेपर टू से हटाना झारखंडी छात्रों के लिए महज लॉलीपॉप है. झारखंड में सिर्फ नौ क्षेत्रीय और जनजातीय भाषा के रूप में मान्यता है लेकिन क्षेत्रीय और जनजातीय भाषाओं के साथ बांग्ला, उर्दू और उड़िया शामिल किया गया है जो झारखंडी छात्रों के साथ धोखा है.

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