
Akshay/ Sanjay
Ranchi: शायद शासन-प्रशासन के अधिकारी सत्ताशीर्ष तक सही इनपुट नहीं दे पा रहे हैं. या फिर कुछ और ही बात होगी. नहीं तो इतने खुले तौर पर किसी खनिज का अवैध कारोबार हो और सभी चुप रहें. ऐसा होने से तो सवाल खड़ा होता है. न्यूज विंग इस खबर के माध्यम से सभी सत्ताशीर्ष अधिकारियों को याद दिला रहा है कि आखिर हो क्या रहा है. इसके बावजूद भी अगर कार्रवाई ना हो, तो… जनता सब जानती है. और इसके दूरगामी परिणाम भी देखने को मिल सकते हैं.
बोकारो डीसी और एसपी साहेब की मौन सहमति, चौंकाने वाली
झारखंड के बोकारो जिला के बेरमो अनुमंडल में अवैध कोयला कारोबार का बेलगाम और निर्बाध संचालन हो रहा है. बेरमो अनुमंडल के पेंक नारायणपुर, नावाडीह, दुग्धा, पेटरवार, बोकारो थर्मल, कथारा ओपी, तेनुघाट ओपी (सभी बेरमो, डुमरी और गोमिया विधानसभा क्षेत्र के अंतरगत) जैसे विभिन्न थानों के क्षेत्रों में बाइक, वैन, ट्रैक्टर और ट्रकों के माध्यम से अवैध कोयले का धंधा बेरोकटोक जारी है. व्यवस्था में बदलाव होते रहता है, लेकिन धंधा बदस्तूर जारी है. पहले कोयले का यह अवैध धंधा थाना स्तर से संचालित होता था, जिसकी कमाई का हिस्सा नीचे से लेकर ऊपर तक जाता था (मतलब सभी जगह). लेकिन वर्तमान स्थिति और भी भयावह है. धंधेबाजों की ही मानें तो अब यह आरोप है कि अवैध कारोबार और उसकी हिस्सेदारी की ’सेटिंग’ ऊपरी स्तर से नीचे तक पहुंच रही है.

सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि रामगढ़, धनबाद, गिरिडीह, हजारीबाग, रांची और बोकारो के संगठित धंधेबाज न सिर्फ यह अवैध कारोबार चला रहे हैं, बल्कि उनकी पहुंच इतनी गहरी है कि वो कथित तौर पर थाना में पदस्थापित पुलिस पदाधिकारियों को ही हटाने की धमकी तक देते हैं. कोयला तस्करों की इस पहुंच के कारण पुलिस पदाधिकारी भी मौन दर्शक बने हुए हैं. अवैध धंधेबाजों में पुलिस-प्रशासन का कोई खौफ नहीं दिखता है.

पर्यावरण नियमों को ठेंगे पर रखते हैं
अवैध फैक्ट्रियां और पर्यावरण का भयंकर उल्लंघन इस अवैध कारोबार से हो रहा है. पर्यावरण नियमों के उल्लघन में वो कोल फैक्ट्रियां हैं जो सिर्फ फैक्ट्री की आड़ में पोड़ा और स्टीम कोयले का अवैध कारोबार कर रही हैं.
नाम और पता
नावाडीह: चिरुडीह स्थित रूबी कोल फैक्ट्री
पेंक नारायणपुर: पिलपिलो स्थित जगदंबा कोल फैक्ट्री (रामा हरिया).
पेटरवार: पिछरी स्थित निषाद कोल फैक्ट्री.
गिरिडीह (निमियाघाट): पोरदाग और खाकी स्थित कोल फैक्ट्रियां.

इन सभी फैक्ट्रियों में, शाम सात बजे से लेकर सुबह चार बजे तक बाइक, ट्रैक्टर और वैनों से चोरी का कोयला पहुंचाया जाता है, जबकि बाइकों से तो सारा दिन कोयले की ढुलाई जारी रहती है. इससे भी गंभीर बात यह है कि ये फैक्ट्रियां पर्यावरण एवं प्रदूषण नियंत्रण के मानकों की धज्जियां उड़ा रही हैं. कोयला भट्टी (धवन भट्टी) में पोड़ा करने की बजाय, कोयला परिसर में खुले आसमान के नीचे पोड़ा किया जा रहा है. ये फैक्ट्रियां रिहायशी इलाकों के पास हैं, जहां ग्रामीण कार्बन मोनोऑक्साइड के भयंकर प्रदूषण की मार झेलने को विवश हैं. जिला में पर्यावरण संरक्षण समिति के अध्यक्ष खुद डीसी होते हैं, फिर भी उनकी ओर से कोई प्रभावी कार्रवाई न होना, स्थिति की गंभीरता और अंदरखाने की मजबूरियों को दर्शाता है.
राजस्व की खुली लूट और वसूली का तंत्र
कोयले की यह चोरी सीसीएल के बीएंडके, कथारा और ढोरी एरिया के खदानों से हो रही है. इसके अलावा पेंक नारायणपुर के तापानी, चरकपनिया, पिलपिलो, बोकारो थर्मल के जारंगडीह, कथारा कोलियरी, रेलवे साइडिंग, कुसुमडीह और सीसीएल कारो स्पेशल फेज-2 की बंद खदानों से अवैध खनन कर कोयला निकाला जा रहा है.
रेट लिस्ट…
बाइक: प्रति बाइक, प्रति माह ₹3,000
वैन: प्रति माह ₹50,000 से ₹60,000
ट्रैक्टर: प्रति ट्रैक्टर ₹1,000
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