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पड़ोसी राज्यों ने जेएनयूआरएम के तहत पूरी कर ली सिवरेज परियोजनाएं, झारखंड में पहला चरण भी पूरा नहीं

Ranchi : केंद्र प्रायोजित योजनाओं से जहां पड़ोसी राज्य अधिक लाभ ले रहे हैं, वहीं झारखंड में इन योजनाओं को अमली जामा पहनाने में कांट्रैक्टर कंपनी सरकार को ही नचा रही है. झारखंड के पड़ोसी राज्यों के जबलपुर और विलासपुर शहर में सिवरेज-ड्रेनेज योजना पूरी हो गयी है. केंद्र की यूपीए सरकार ने जवाहर लाल नेहरू शहरी पुनरुद्धार योजना के तहत इस योजना को एक साथ 17 से अधिक शहरों में शुरू किया था, जिसमें राजधानी रांची को भी शामिल किया गया था. 2007 में शुरू की गयी योजना को 2012 में पूरा होना था. इसे 2014 तक विस्तार दिया गया था.

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जबलपुर के लिए 600 करोड़ की योजना हुई थी स्वीकृत

यहां बताते चलें कि मध्यप्रदेश के जबलपुर शहर में सिवरेज, ड्रेनेज और स्टोर्म वाटर मैनेजमेंट के तहत 600 करोड़ रुपये स्वीकृत किये गये थे. 376 करोड़ की सिवरेज परियोजना अब समाप्त हो गयी है. 2012 में जबलपुर की सिवरेज योजना को केंद्र ने स्वीकृत किया था. इसमें 80 प्रतिशत राशि केंद्र की तरफ से राज्य को दी गयी थी. इतना ही नहीं जबलपुर शहर की सिवरेज योजना को एलएनटी कंपनी ने समय से पहले पूरा कर दिया. 140 एमएलडी क्षमता का सिवरेज ट्रीटमेंट प्लांट भी स्थापित किया गया है. इसे 2019 तक की जनसंख्या के आधार पर बनाया गया है. इसका और विस्तार अब अमृत योजना से किया जा रहा है.

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विलासपुर में 211 किलोमीटर सिवर लाइन पूरा, 74 एमएलडी का एसटीपी भी बना

छत्तीसगढ़ के विलासपुर में योजना के तहत 211 किलोमीटर तक का सिवर लाइन पूरा कर लिया गया है. 422.94 करोड़ की योजना में जियो मिलर प्राइवेट लिमिटेड सिवरेज ट्रीटमेंट प्लांट और सिंपलेक्स इंफ्रास्ट्रक्चर लिमिटेड सिवरेज नेटवर्क का काम कर रही है. योजना के तहत विलासपुर शहर के 40 हजार घरों के सिवर निकासी को लेकर 71 एमएलडी (मिलियन प्रति दिन) क्षमता का एसटीपी प्लांट भी लगाया जा चुका है. 2007 में योजना 223 करोड़ की थी. इसकी लागत बढ़ कर 422.94 करोड़ हो गयी है.

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राजधानी में सिवरेज-ड्रेनेज योजना का पहला चरण भी पूरा नहीं

राजधानी रांची में 1900 करोड़ से अधिक की लागत वाले सिवरेज-ड्रेनेज की परियोजना फिलहाल ठंडी पड़ी हुई है. 1900 करोड़ से अधिक की लागत वाली योजना के लिए ज्योति बिल्डटेक कंपनी कानपुर को पहले चरण का काम दिया गया था. 380 करोड़ से अधिक के पहले चरण में कंपनी ने न तो सिवरेज ट्रीटमेंट प्लांट बनाया है और न ही सिवर लाइन बिछाने का काम भी पूरा किया है. कंपनी का दावा है कि उसने 180 किलोमीटर का सिवर लाइन बिछाया है, जिस पर नगर विकास विभाग और नगर निगम के अधिकारी संशय में हैं. कंपनी को पहले चरण में रातू रोड, मोरहाबादी, बूटी मोड़ में सिवर लाइन बिछाने और बूटी बस्ती में एसटीपी बनाने का काम मिला था. सरकार की तरफ से कंपनी को अग्रिम के रूप में 15 फीसदी राशि भी उपलब्ध करायी गयी थी.

 

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