Crime NewsJharkhandRanchiTop Story

गलत अनुसंधान कर निर्दोषों को जेल भेजने का आरोप, सवालों में घिरी पुलिस

विज्ञापन

Saurav Singh

Ranchi: राज्य में जहां एक तरफ पुलिस जनता की रक्षा करने करने की बात कहती है तो वहीं दूसरी ओर पुलिस कुछ मामले में अपनी झूठी वाहवाही लूटने के लिए गलत अनुसंधान कर निर्दोष को जेल भेज रही है.

राज्य में पुलिस के गलत अनुसंधान के कारण कई लोगों को निर्दोष होते हुए भी जेल जाना पड़ा है. राज्य में इस तरह के कई मामले सामने आये हैं, जिस वजह से पुलिस अपनी ही कार्यप्रणाली को लेकर सवालों से घिर गयी है.

advt

गांजा तस्करी के आरोप में भेजा था जेल देनी पड़ी क्लीन चिट

धनबाद पुलिस ने 25 अगस्त 2019 को पश्चिम बंगाल के जिस ईसीएल कर्मचारी चिंरतीज घोष को गिरफ्तार कर गांजा तस्करी के आरोप में जेल भेजा था उसी को क्लिनचीट देनी पड़ी.

इसके बाद चिंरतीज घोष को धनबाद कोर्ट से जमानत मिल गयी. वह 1 अक्टूबर को जेल से अपने घर चला गया. लेकिन, इस पूरे प्रकरण से पुलिस की वर्दी पर कई बदनुमा दाग लग गये हैं और अपनी कार्यप्रणाली को लेकर धनबाद पुलिस सवालों से घिर गयी है.

निरसा थाना क्षेत्र में पुलिस ने 25 अगस्त 2019 को 40 किलो गांजा बरामद किया था. इसके बाद मीडिया के सामने आकर एसडीपीओ विजय कुमार कुशवाहा और थाना प्रभारी उमेश प्रसाद सिंह ने अपनी पीठ थपथपाई थी.

गांजा बरामदगी को बड़ी उपलब्धि बताया था. साथ ही यह भी कहा था कि एसएसपी के निर्देश पर यह कार्रवाई हुई. गांंजा टबेरा गाड़ी में रखा हुआ था. पुलिस की कहानी के अनुसार छापेमारी के दाैरान चालक और तस्कर भाग निकले थे.

adv

बाद में पुलिस ने ईसीएल के झांझरा प्रोजेक्ट के कर्मचारी चिरंजीत घोष को गांजा तस्कर बताते हुए गिरफ्तार कर जेल भेज दिया था.

इसे भी पढ़ें- News Wing Impact: जिस डिफेंस लैंड पर माफिया ने किया था कब्जा, प्रशासन ने रद्द किया उसका म्यूटेशन

शराब तस्करी के आरोप में 25 दिनों तक रखा था जेल में

रांची के तत्कालीन हटिया डीएसपी विनोद रवानी पर 31 सितंबर 2018 को शराब माफिया के साथ मिलकर हटिया के ही रहने वाले दो निर्दोष व्यक्तियों को झूठे मामले में फंसा कर जेल भेजने का आरोप है.

मामला सामने आने के बाद आनन-फानन में जांच करवाकर दोनों निर्दोष युवकों को जेल से बाहर निकाला गया. फर्जी शराब कांड में शामिल तीन थाना प्रभारी जिसमें धुर्वा डोरंडा और तुपुदाना के प्रभारी शामिल थे, उन्हें तुरंत लाइन हाजिर कर दिया गया.

लेकिन, हटिया डीएसपी पर कोई कार्रवाई नहीं की गयी. जबकि पीड़ित परिवार वालों के अनुसार और पुलिस की रिपोर्ट में फर्जी शराब कांड की पूरी साजिश रचने का मास्टरमाइंड हटिया डीएसपी को ही बताया गया है.

रांची हटिया तत्कालीन डीएसपी विनोद रवानी की साजिश के शिकार दो युवक मालवीय व नंदकिशोर को 25 दिनों के बाद कोर्ट से बेल मिली थी. इससे पहले कोर्ट ने दोनों युवकों की जमानत इसलिए खारिज कर दी थी क्‍योंकि पुलिस की ओर से मामले की केस डायरी कोर्ट में समर्पित नहीं की गयी थी.

रांची के धुर्वा में फर्जी तरीके से शराब प्लांट कर दो लोगों को जेल भेजे जाने के मामले में फंसे तत्कालीन हटिया के डीएसपी विनोद रवानी ने पुलिस मुख्यालय को शो-कॉज का जवाब दे दिया था, उन्होंने इस पूरे प्रकरण में खुद को निर्दोष बताया उनका कहना था कि उन्होंने थानेदारों को छापेमारी का आदेश दिया था. अब थानेदारों ने कहां गड़बड़ी की, इसकी जानकारी उन्हें नहीं मिल सकी थी.

इसे भी पढ़ें- ‘लाल किला’ को भेदने के लिए #CM निरसा से शुरू करेंगे जोहार जन आशीर्वाद यात्रा

मानव तस्करी के आरोप में 6 महीने जेल में रहकर बाहर निकली जिलानी लुगुन

22 जून 2017 रेल पुलिस ने अपनी जांच में जिस महिला को मानव तस्करी का दोषी पाया था, उस महिला को रेलवे न्यायालय ने क्लीन चिट दे दिया है. रेलवे न्यायालय ने यह पाया कि महिला पर लगाया गया मानव तस्करी का आरोप झूठा है.

यह आरोप लगा था सिमडेगा जिले की रहनेवाली जिलानी लुगुन पर. मानव तस्करी करने के आरोप में गिरफ्तार की गयी जिलानी लुगुन को छह महीने तक जेल में रहना पड़ा.

जिलानी लुगुन पर जिस बच्ची की तस्करी करने का आरोप लगाया गया था, उस बच्ची द्वारा धारा 164 के तहत कोर्ट में जिलानी लुगुन के पक्ष में बयान दिये जाने के बाद रेलवे न्यायलय के दंडाधिकारी ने इस मामले में जिलानी लुगुन के खिलाफ चार्ज फ्रेम कर दिया था. लेकिन रांची कोर्ट ने जिलानी लुगुन को क्लीन चिट दे दिया था.

इसे भी पढ़ें- #BiharFlood: राज्य में ऑरेंज अलर्ट जारी, 73 की मौत, जनजीवन प्रभावित

चार माह जेल में रहा निर्दोष फहीमुद्दीन

रांची पुलिस ने 64 वर्षीय व्यवसायी फहीमुद्दीन अहमद खान को मारपीट, छेड़खानी, चोरी और एससी- एसटी एक्ट के झूठे आरोप में चार माह तक जेल में रखा.

फहीमुद्दीन खान को 20 फरवरी 2015 को गिरफ्तार किया गया था. रांची डीआइजी अरुण कुमार सिंह और सिटी एसपी डॉ जया रॉय की रिपोर्ट में फहीमुद्दीन को झूठे केस में फंसा कर जेल भेजे जाने की पुष्टि हुई.

इसके बाद 19 जून 2015 को वह जमानत पर बाहर निकल पाये. मामले में तत्कालीन सदर डीएसपी सत्यवीर सिंह की भूमिका संदिग्ध पायी गयी है. उन्होंने ही फहीमुद्दीन के एक मामले का सुपरविजन किया था.

उन्होंने तीन युवकों के बयान को आधार बनाकर प्राथमिकी को सही करार और फहीमुद्दीन को गिरफ्तार करने का आदेश दिया गया था.

advt
Advertisement

Related Articles

Back to top button