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प्रशासनिक कार्यों के लिए हेडमास्टर की राह देख रहे स्कूल, तीन हजार में केवल 130 कार्यरत

Ranchi : राज्य के प्राथमिक और माध्यमिक स्तर के स्कूलों में शिक्षकों की कमी तो है ही वहीं प्रशासनिक कार्यों के लिए हेडमास्टर्स की भी भारी कमी है. ऐसे में हेड मास्टर्स के काम का बोझ प्रभार के रूप में किसी न किसी शिक्षक को दिया गया है. अब स्थिति यह है कि शिक्षक न तो अच्छे से पढ़ा ही पा रहे हैं और न ही प्रशासनिक कार्यों का ही निष्पादन कर पा रहे हैं. इसकी वजह यह है कि राज्य बनने के बाद से अब तक एक बार भी हेड मास्टर की नियुक्ति नहीं हुई.

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3226 सृजित पद में से मात्र 130 कार्यरत

राज्य के स्कूलों में हेड मास्टर के 3226 पद सृजित होने के बाद भी मात्र 130 हेडमास्टर ही अपनी सेवाएं दे रहे हैं. 3226 सृजित पदों में से वर्तमान में 3096 पद खाली हैं. राज्य में मात्र पांच ही ऐसे जिले हैं, जहां प्राइमरी स्तर पर एक-एक हेडमास्टर काम कर रहे हैं. जानकारी के अनुसार, राज्य के 24 जिलों में सात ऐसे जिले हैं, जहां के मिडिल स्कूलों में एक भी स्थायी हेडमास्टर नहीं हैं. इन जिलों में हजारीबाग, चतरा, सरायकेला, लोहरदगा, रामगढ़, साहेबगंज व पाकुड़ शामिल हैं. इसके अलावा प्राइमरी स्कूलों की बात करें तो रामगढ़, कोडरमा, पश्चिमी सिंहभूम, सिमडेगा व जामताड़ा में एक-एक स्थायी हेडमास्टर हैं.

2017 में निकला था विज्ञापन, अब तक नियुक्ति नहीं

राज्य के प्राथमिक माध्यमिक स्कूलों में हेडमास्टर की नियुक्ति हो सके इसके लिए जेपीएससी ने सीधी नियुक्ति के लिए आवेदन मंगवाये थे. सरकार ने 23 फरवरी 2017 को 668 हेडमास्टर पदों के लिए विज्ञापन निकाला था. फिर अपरिहार्य कारण का हवाला देते हुए सरकार ने 18 सितंबर 2019 को 668 हेडमास्टरों की नियुक्ति वाले विज्ञापन को रद्द कर दिया. सीधी नियुक्ति के अलावा प्रोन्नति कर हेडमास्टर की सीटों को भरना था, लेकिन प्रोन्नति नियमावली में संशोधन नहीं होने की वजह से ऐसा करना संभव नहीं हो पाया.

क्या कहती है नियमावली

बिहार की प्रमोशन नियमावली-1993 ही राज्य में शिक्षकों की प्रोन्नति को देख रही है. इस नियम के तहत प्रोन्नति के लिए शिक्षकों को ग्रेड फोर में सात साल का कार्य अनुभव होना चाहिए. जानकारी के मुताबिक, यहां कार्यरत शिक्षक ग्रेड फोर में तो हैं, पर समय-समय पर प्रोन्नति नहीं मिल पाने की वजह से उनके पास सात साल का अनुभव नहीं मिल पाता है. शिक्षक संघ के मुताबिक, इस नियमावली में संशोधन कर अधिकांश पदों को भरा जा सकता है.

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