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पोस्ट मैट्रिक छात्रवृत्तिः अनियमितता मामले में अनुसूचित जनजाति कल्याण विभाग को हो सकता है समन

Ranchi:  राज्य में अनुसूचित जनजाति के विद्यार्थियों को मिलने वाली पोस्ट मैट्रिक छात्रवृत्ति में हो रहे विलंब और गड़बड़ियों पर त्वरित कार्रवाई का आदेश राष्ट्रीय अनुसूचित जनजाति आयोग ने दिया था. अनुसूचित जनजाति कल्याण विभाग द्वारा देर किये जाने पर राष्ट्रीय मनवाधिकार अभियान के सुनील मिंज ने रिपोर्ट सौंपी थी. जिसके बाद राष्ट्रीय अनुसूचित जनजाति आयोग ने कार्रवाई की.

कार्रवाई के तहत अनूसूचित जनजाति कल्याण विभाग के सचिव को पत्र लिखकर संबंधित सूचना प्रस्तुत करने का निर्देश दिया. कहा कि एक महीने के अंदर ऐसा नहीं करने पर झारखंड के अनुसूचित जनजाति कल्याण विभाग को समन जारी किया जा सकता है. विभाग का पत्र एक मई को जारी किया गया है.

क्या लिखा है पत्र में

पत्र मे कहा गया कि  यदि दी गयी अवधि में आयोग को उत्तर नहीं मिलता है तो वे भारत के संविधान के अनुच्छेद 338-क के तहत दीवानी अदालत की शक्तियों का प्रयोग कर सकता है. साथ ही झारखंड सरकार के अनूसूचित जनजाति कल्याण विभाग के सचिव को आयोग के सामने उपस्थित होने के लिए समन जारी किया जा सकता है.

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क्यों की गयी शिकायत

कल्याण विभाग की पोस्ट मैट्रिक छात्रवृत्ति के लिए आवेदन की प्रक्रिया पिछल्ले वर्ष 15 अक्तूबर को खत्म हो गयी थी. करीब 55 हजार से अधिक छात्र आवेदन नही कर सके.

कई छात्र आवेदन करने से इस कारण वंचित  रह गये क्योंकि प्रमाण पत्र (जाति, आय, निवास आदि) बनवाने में समस्या आ रही थी. बिना इन प्रपत्रों को अपलोड किये बगैर छात्रवृत्ति आवेदन पूरा नहीं होता. ऐसे में ये छात्र छात्रवृत्ति प्राप्त करने से चूक गये.

कल्याण विभाग अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति और ओबीसी श्रेणी के पोस्ट मैट्रिक छात्रों को अधिकतम 50 हजार रुपये वार्षिक छात्रवृत्ति प्रदान करता है. यह राशि छात्रों को सीधे उनके आधार लिंक से जुड़े बैंक खाते में स्थानांतरित की जाती है.

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