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पेयजल और स्वच्छता विभाग में हो रहा है स्क्रैप बेचने के नाम पर घोटाला

गिरिडीह में हुए घोटाले को लेकर कार्यपालक अभियंता और कनीय अभियंता पर कार्रवाईपुराना है स्क्रैप बेचने का धंधा, हर साल बिकता है 40 करोड़ से अधिक का स्क्रैप

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Ranchi: पेयजल और स्वच्छता विभाग (पीएचइडी) में स्क्रैप बेचने के नाम पर घोटाला सामने आया है. लोकायुक्त कार्यालय के निर्देश के बाद अब विभाग की तरफ से गिरिडीह अंचल के दो अभियंताओं पर कार्रवाई की गयी है. 2012-13 में गिरिडीह अंचल में स्क्रैप की बिक्री के लिए 01-2013 के जरिये नोटिस निकाली गयी थी. इसमें वहां पदस्थापित कनीय अभियंता वृज कुमार उपाध्याय (अब सेवानिवृत) को दोषी पाया गया है, वहीं तत्कलीन कार्यपालक अभियंता सुशील कुमार को सरकारी राजस्व में हानि पहुंचाने की बातों की पुष्टि हुई है. कनीय अभियंता पर विभाग की तरफ से विभागीय कार्रवाई शुरू की गयी है, जबकि कार्यपालक अभियंता के खिलाफ निंदन की सजा सुनायी गयी है. विभाग में स्क्रैप की बिक्री में अनियमितता कोई नयी बात नहीं है. विभाग के सभी 34 अंचलों में स्क्रैप की बिक्री प्रत्येक वर्ष की जाती है.

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क्या था अभियंताओं पर आरोप

लोकायुक्त कार्यालय में जयप्रकाश नगर बूटी के शत्रुघ्‍न सिंह ने स्क्रैप घोटाले की शिकायत की थी. उन्होंने अपनी शिकायत में कहा था कि गिरिडीह अंचल-1 में स्क्रैप की जो नोटिस निकाली गयी थी. उसकी इंट्री एकाउंट्स (लेखा पुस्तिका) में नहीं की गयी थी. इससे अंचल के एकाउंट्स का संधारण (मिलान) नहीं हो पाया. स्क्रैप बेचने में भारी अनियमितता की गयी थी. जिसकी पुष्टि अधीक्षण अभियंता ने अपनी रिपोर्ट में मार्च 2015 में की थी. इसी अंचल के तत्कालीन कार्यपालक अभियंता सुशील कुमार पर बिना वैट (वैल्यू एडेड टैक्स) की गणना किये संवेदक को स्क्रैप उपलब्ध करा दिया. इससे सरकार को राजस्व के रूप में करोड़ों रुपये की हानि हुई. इन पर अपने पद पर रहते हुए अपने वित्तीय अधिकार का दुरुपयोग करने के आरोपों की भी पुष्टि हुई है. फिलहाल ये रांची नागरिक अंचल में पदस्थापित हैं.

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पुराने राइजर पाइप समेत जलापूर्ति के अन्य मैटेरियल भी बिकते हैं स्क्रैप में

विभाग में प्रत्येक वर्ष 40 करोड़ से अधिक का स्क्रैप बेचा जाता है. अमूमन ट्यूबवेल के राइजर पाईप जो खराब हो जाते हैं, उन्हें स्क्रैप में बेचने का प्रावधान है. सलाना 18 से 22 करोड़ का राइजर पाइप बदला जाता है. वहीं शहरी जलापूर्ति योजनाओं से जुड़े अंचलों में पाइप, एसी-डीसी मोटर तथा अन्य सामग्रियां भी स्क्रैप के नाम पर बेची जाती हैं. इसके लिए संबंधित अंचलों को समाचार पत्रों में नोटिस देना जरूरी होता है.

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