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रघुवर काल में हुए भ्रष्टाचार पर कार्रवाई की धीमी चाल से बिफरे सरयू ने लिखा सीएम हेमंत को कड़ा पत्र, कहा – ऐसी नौबत न आये कि…

न तो सदन में दिया आपका आश्वासन पूरा हुआ और न ही हाईकोर्ट में कही गयी बातों पर अमल, सरकार की सुस्ती के कारण गंभीर अपराध करने वालों का मनोबल बढ़ा

Jamshedpur : जमशेदपुर पूर्वी के विधायक सरयू राय ने मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन को एक चिट्ठी लिखी है. उन्होंने कहा है कि सरकार की सुस्ती के कारण गंभीर अपराध करने वालों का मनोबल बढ़ा है, वे जेल जाने का इंतजार करने की बात कहकर खुलेआम कानून को चुनौती दे रहे हैं. रघुवर दास की सरकार में मंत्री रहे सरयू राय ने हेमंत सोरेन से जानना चाहा है कि उनके द्वारा पर्याप्त प्रमाण देने के बाद भी सरकार कार्रवाई से हिचक क्यों रही है. श्री राय ने मुख्यमंत्री को यह भी लिखा है कि ऐसी नौबत न आये कि जो कार्रवाई सरकार को करनी चाहिए, उसके लिए हमें न्यायालय का दरवाज़ा खटखटाने के लिए मजबूर होना पड़े.

सरयू राय ने मुख्यमंत्री को जो पत्र लिखा है, वह इस प्रकार है

  • न तो सदन में दिया आपका आश्वासन पूरा हुआ और न ही हाईकोर्ट में कही गयी बातों पर सरकार में अमल हुआ

आपके नेतृत्व में झारखंड सरकार बने दो वर्ष हो गये. इस अवधि में मैंने भ्रष्टाचार के कतिपय गंभीर मुद्दों के बारे में ठोस प्रमाण देकर आपको अवगत कराया है. आरंभ में आपने इनका संज्ञान लिया. मेनहर्ट घोटाला के नाम से कुख्यात रांची शहर के सिवरेज-ड्रेनेज योजना में हुए भ्रष्टाचार की जांच करने का आदेश आपने भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो (एसीबी) को दिया. कंबल घोटाला की जांच का आदेश हुआ. मोमेंटम झारखंड के नाम पर हुए सरकारी धन की लूट की जांच कराने की बात आगे बढ़ी. झारनेट 2.0 योजना की बदहाली में पूर्ववर्ती सरकार के मुख्यमंत्री की भ्रष्ट भूमिका के प्रमाण मैंने सामने रखे. कौशल विकास एवं नियोजन के फर्जीवाड़ा का भी मैंने पर्दाफाश किया. राज्य स्थापना दिवस समारोह-2016 के अवसर पर टॉफी-टी-शर्ट की खरीद एवं सुनिधि चौहान का कार्यक्रम आयोजित करने में तत्कालीन मुख्यमंत्री सचिवालय की संलिप्तता के कारण लाखों रुपये के सरकारी धन का वारा-न्यारा होने के ठोस प्रमाण मैंने उपलब्ध कराये. इस बारे में विधानसभा पटल पर आपने एसीबी जांच कराने का आश्वासन भी दिया. इसी मामले में झारखंड हाईकोर्ट में दायर एक मुकदमे में सरकार के अधिवक्ता सुनवाई कर रही खंडपीठ को बार बार आश्वस्त कर रहे हैं कि सरकार इस मामले में कार्रवाई करने जा रही है. परंतु न तो विधानसभा में दिया गया आपका आश्वासन अबतक पूरा हुआ और न ही हाईकोर्ट में कही गयी बातों पर सरकार में अमल हुआ.

  • पता नहीं क्यों सरकार मेनहर्ट मामले में ढुलमुल रवैया अपना रही है

महोदय, मेनहर्ट घोटाला की जांच एसीबी से कराने का आपका आदेश एक साल पहले हुआ. परंतु यह आदेश एफआईआर कर जांच करने का नहीं हुआ, बल्कि प्रारंभिक जांच करने का हुआ. जहां तक मेरी जानकारी है,जांच पदाधिकारियों के समूह ने इसकी गहन जांच कर कई माह पूर्व जांच प्रतिवेदन सौंप दिया है. जांच में मुख्य अभियुक्त एवं अन्य दोषी चिन्हित हो गये हैं. दोषियों को उनका पक्ष रखने का मौका भी दे दिया गया है. परंतु एफआईआर दर्ज कर उनके विरूद्ध दंडात्मक कार्रवाई करने का मामला सरकारी संचिका में धूल फांक रहा है. इस मामले के जितने प्रमाण मैंने सरकार को उपलब्ध करा दिये हैं, वे मुख्य अभियुक्त एवं अन्य पर दंडात्मक कार्रवाई करने के लिये पर्याप्त हैं, फिर भी इसमें प्रारंभिक जांच करने का आपका आदेश हुआ. पता नहीं क्यों सरकार इस मामले में ढुलमुल रवैया अपना रही है. सरकार की सुस्ती के कारण गंभीर अपराध करने वालों का मनोबल बढ़ा है. वे जेल जाने का इंतजार करने की बात कहते हुए खुलेआम कानून को चुनौती दे रहे हैं.

  • टॉफी-टी-शर्ट-सुनिधि चौहान मामले में साक्ष्य होने के बावजूद कार्रवाई क्यों नहीं हो रही

इसी तरह टॉफी-टी-शर्ट-सुनिधि चौहान वाले मामले में हुए फर्जीवाड़ा एवं सरकारी धन की लूट का भी पुख्ता प्रमाण मैंने आपकी सरकार को और विधानसभा को दे दिया है. मुकदमा दायर कर दोषियों पर सीधी कार्रवाई करने के लिये पर्याप्त साक्ष्य होने के बावजूद दोषियों पर आखिर कार्रवाई क्यों नहीं हो रही है, ऐसा न हो कि यह मामला भी आरंभिक जांच की पेचीदगी में फंसकर नाहक समय गंवाने का उपक्रम बन जाये. जबकि यह भ्रष्टाचार एवं मनमानी का ज्वलंत उदाहरण है.

  • ऐसी नौबत न आये कि हमें न्यायालय का दरवाज़ा खटखटाने पर मजबूर होना पड़े

अनुरोध है कि भ्रष्टाचार के इन ज्वलंत मामलों पर एवं ऐसे अन्य मामलों पर अविलंब कारवाई करें. ऐसी नौबत न आये कि जो कार्रवाई सरकार को करनी चाहिए, उसके लिए हमें न्यायालय का दरवाज़ा खटखटाने के लिये मजबूर होना पड़े.

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