
Ranchi : राज्य सरकार द्वारा विगत दिनों झारखंड की सिर्फ चार जनजातीय भाषाओं को आठवीं अनुसूची में शामिल करने की अनुसंशा किये जाने पर इंकलाबी नौजवान लेखक संघ ने नाराजगी जाहिर की है. सरकार के इस फैसले पर संघ के अध्यक्ष सुनील मिंज, महासचिव डॉ बीरेन्द्र कुमार महतो, प्रवक्ता डॉ लालदीप गोप, पुष्कर महतो व प्रो दिनेश कुमार दिनमणि ने सयुंक्त बयान जारी किया है. कहा कि देश ही नहीं पूरी दुनिया में झारखंड की पहचान इसकी अपनी विशिष्ट सांस्कृतिक मूल्यों के लिए रही है. जिसके केंद्र में यहां की भाषाएं रही हैं. झारखंड अलग होने के बाद पूर्ववर्ती सरकार ने सिर्फ दो भाषाओं को द्वितीय राजभाषा का दर्जा दिया, तो यहां के युवा लेखक, साहित्यकार एवं शिक्षाविदों ने इसका जोरदार विरोध किया.
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नौ भाषाओं को द्वितीय राजभाषा का दर्जा
यहां तक कि धरना प्रदर्शन भी हुए. अंततः सरकार ने यहां की नौ भाषाओं को द्वितीय राजभाषा का दर्जा दिया. उन्होंने कहा कि झारखंड अलग राज्य का गठन भाषा और संस्कृति के आधार पर संविधान की धारा 3-ए के तहत हुआ है. इसमें राज्य की सभी जनजातीय एवं क्षेत्रीय भाषाएं सम्माहित थीं. इन संवैधानिक मूल्यों को खंडित नहीं किया जाना चाहिये. बल्कि संविधान की मर्यादा का पालन करते हुए राज्य की सभी जनजातीय एवं क्षेत्रीय भाषाओं को समान रूप से आठवीं अनुसूची में शामिल करने के लिए केन्द्र को भेजना न्यायपूर्ण होगा.
उन्होंने कहा कि जिन भाषाओं की पढ़ाई अन्तरराष्ट्रीय भाषाविद-संस्कृतिकर्मी पद्मश्री डॉ रामदयाल मुण्डा के अथक प्रयास से ही विगत दशकों से जनजातीय एवं क्षेत्रीय भाषा विभाग, रांची विश्वविद्यालय, रांची में हो रही है. सरकार के इस फैसले से डॉ मुण्डा के अरमानों व सपनों का भी अपमान होगा.
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अहम होगी भाषा की भूमिका
वर्तमान में मौजूदा सरकार ने फिर कुछ चुनिंदा भाषाओं को ही आठवीं अनुसूची में शामिल करने के लिए केंद्र सरकार को पत्र लिखा है. उन्होंने कहा कि ऐसे में सरकार से हमारी गुजारिश है कि झारखंड की सभी नौ जनजातीय एवं क्षेत्रीय भाषाओं को आठवीं अनुसूची में शामिल कराने का कार्य करें. क्योंकि नई शिक्षा नीति में अब मातृभाषा की भूमिका काफी अहम हो जाएगी. इसलिए झारखंड की सभी नौ भाषाओं को संरक्षण एवं विकास की जरूरत है.
ताकि इस पर नए ढंग से शोध एवं साहित्य की उपलब्धता सुनिश्चित हो सके. और यह तभी संभव है जब इसे संवैधानिक अधिकार प्राप्त हो. उन्होंने कहा कि यह रोजगार और विकास से जुड़ा हुआ मामला है. सरकार इस पर गंभीरता से विचार करे.
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