Dhanbad

धनबाद : एसएनएमएमसीएच का संयुक्त सचिव ने किया निरीक्षण, लगाई कड़ी फटकार

Dhanbad : शहर के सबसे बड़े सरकारी अस्पताल एसएनएमएमसीएच में आउटसोर्सिंग कर्मचारियों की हड़ताल से पूरी स्वास्थ्य व्यवस्था चरमरा गई है. कर्मचारियों के काम नहीं करने से मरीजों को काफी परेशानी झेलनी पड़ रही है. स्थिति यह है कि शुक्रवार की शाम 8:00 बजे इमरजेंसी पहुंची 63 वर्षीया मरीज बगोला देवी को पूरी रात इमरजेंसी में स्ट्रेचर पर गुजारनी पड़ी. इनके साथ कई और मरीज वही लेटे रहे. इमरजेंसी से वार्ड में शिफ्ट करने वाला कोई नहीं था. इनसब के बीच शनिवार को स्वास्थ्य विभाग के संयुक्त सचिव सदर अस्पताल एवं एसएनएमएमसीएच  का निरीक्षण किए. हर जगह अनियमितता पकड़ी और अधिकारियों को कड़ी फटकार लगाई. उन्होंने कड़े लहजे में कहा कि गड़बड़ी को तुरंत दूर नहीं किया गया तो इसके लिए वरीय अधिकारी जिम्मेवार होंगे. साथ ही उनपर कड़ी कार्रवाई की जाएगी.

इधर, दूसरी ओर मेडिकल कॉलेज अस्पताल में चल रहे आंदोलन में भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष दीपक प्रकाश, सांसद पीएन सिंह, विधायक राज सिन्हा समेत कांग्रेस के कई लोग शामिल हुए. दीपक प्रकाश के कर्मचारियों को इस मामले से राज्यपाल को अवगत कराने का भरोसा दिलाया. मेडिकल कॉलेज में हड़ताल पर बैठे पारा मेडिकल कर्मियों से विधायक राज सिन्हा ने बातचीत कर उनका हाल जाना. साथ ही उन्हें न्याय का भरोसा दिलाया. वहीं हड़ताल कर रहे कर्मियों से अस्पताल अधीक्षक ने वार्ता की. उन्हें उचित न्याय का आश्वासन दिया.

वहीं शहीद निर्मल महतो चिकित्सा महाविद्यालय अस्पताल के आउटसोर्सिंग संघ की ओर से पीएमसीएच गेट के सामने अनिश्चितकालीन धरना दे रहे सभी आउटसोर्सिंग कर्मचारियों से झारखंड प्रदेश कांग्रेस कमेटी के उपाध्यक्ष व प्रदेश अनुशासन समिति के चेयरमैन सह धनबाद जिला 20-सूत्री के उपाध्यक्ष ब्रजेन्द्र प्रसाद सिंह के नेतृत्व में एक प्रतिनिधिमंडल मिला. मौके पर धरना दे रहे आउटसोर्सिंग कर्मचारियों ने उन्हें मांग पत्र सौंप कर इस पर सकारात्मक पहल कराने की मांग की.

मालूम हो कि एसएनएमएमसीएच में आउटसोर्सिंग कर्मचारियों की हड़ताल से वार्डों में भर्ती मरीजों की स्थिति बदतर है. अस्पताल के ड्रेसर, ट्रॉली मैन, टेक्नीशियन, वार्ड बॉय सभी हड़ताल पर हैं. डॉक्टर मरीजों का इलाज तो कर रहे हैं लेकिन उनकी देखरेख और जांच पूरी तरह प्रभावित हो गई है. अस्पताल प्रबंधन इस मामले में अपने आप को लाचार बता रहा है. प्रबंधन का कहना है कि सरकार ने कर्मचारियों की संख्या कम कर दी है. ऐसे में उनकी छंटनी के अलावा कोई विकल्प नहीं है. सारी स्थिति से विभाग के आला अधिकारियों का अवगत कराया जा चुका है. उनके निर्देशों के अनुसार आगे की कार्रवाई होगी.

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