
Ranchi: देवघर पुलिस ने देवघर समाहरणालय में तोड़फोड़ करने के मामले में मंत्री रणधीर सिंह को क्लीन चिट दी है. 8 सालों बाद इस मामले में अभियुक्त बनाए गए मंत्री रणधीर सिंह, अल्ताफ हुसैन और अभयानंद झा को सरकारी कार्य में बाधा डालने और गिरफ्तार अभियुक्तों को भगाने के मामले में देवघर पुलिस ने क्लीन चिट दी.
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बता दें कि यह मामला साल 2010 का है. जब मंत्री रणधीर सिंह, जेवीएम विधायक प्रदीप यादव सहित कई अन्य लोगों पर देवघर के नगर थाना में सरकारी कार्य में बाधा डालने और गिरफ्तार अभियुक्तों को भगाने के मामले में तत्कालीन श्रम प्रवर्तन पदाधिकारी सुधीर कुमार मोदी के द्वारा देवघर नगर थाना में 15 सितंबर 2010 को देवघर नगर थाना में मामला दर्ज कराया गया था.
जमानत पर बाहर निकले थे रणधीर सिंह
सरकारी कार्य में बाधा डालने और गिरफ्तार अभियुक्तों को भगाने के मामले में तत्कालीन श्रम प्रवर्तन पदाधिकारी सुधीर कुमार मोदी के द्वारा देवघर नगर थाना में 15 सितंबर 2010 को मंत्री रणधीर सिंह, प्रदीप यादव सहित जेवीएम के कई कार्यकर्ताओं के खिलाफ देवघर नगर थाने में मामला दर्ज कराया था.
जिसके बाद मंत्री रणधीर सिंह सहित सभी जेवीएम कार्यकर्ता के विरुद्ध सत्य एवं आरोप पत्र का साक्ष्य पाया गया. इस मामले में रणधीर सिंह 20 मई 2013 को न्यायालय में आत्मसमर्पण कर जमानत पर रिहा हो गए थे.
8 साल बाद देवघर पुलिस ने रणधीर सिंह को दी क्लीन चिट
सरकारी कार्य में बाधा डालने और गिरफ्तार अभियुक्तों को भगाने के मामले रणधीर सिंह के ऊपर दर्ज हुए मामले में पुलिस की जांच में पाया गया कि समाहरणालय में हुई तोड़फोड़ की घटना को जेवीएम पार्टी के कार्यकर्ता बलदेव सिंह,सहिम खा, नागेश्वर सिंह, मणिकांत यादव और गोविंद यादव के नेतृत्व में अंजाम दिया गया था.
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गौरतलब है कि गिरफ्तार कर जेवीएम कार्यकर्ताओं को केके स्टेडियम देवघर में रखा गया था. जिसके बाद जेवीएम विधायक प्रदीप यादव ने अपने 15 से 20 समर्थकों के साथ मिलकर सभी को छुड़ा लिया था और साथ लेकर चले गए.
इस घटना में रणधीर सिंह,अल्ताफ हुसैन और अभयानंद झा के शामिल होने की पुलिस के जांच में पुष्टि नहीं हो पाई और घटना स्थल पर उपस्थित किसी भी पुलिसकर्मियों के द्वारा इन तीनों का नाम नहीं बताया गया. जिसके बाद के घर पुलिस के द्वारा रणधीर सिंह, अल्ताफ हुसैन और अभयानंद झा के खिलाफ स्पष्ट साक्ष्य नहीं मिलने के बाद उन्हें क्लीन चिट दे दी.
मामले पर उठते सवाल
तीन नामजद अभियुक्तों को 8 सालों बाद प्रतिरक्षा साक्ष्य लेकर निर्दोष बताना बिल्कुल गलत है. यह याद रहना चाहिए कि इस कांड के वादी सरकारी कर्मचारी हैं. कांड दर्ज होने के बाद केस डायरी एक, दो, तीन आदि में इन अभियुक्तों के विरुद्ध गवाहों का बयान जरूर लिखा गया होगा.
क्या घटना की तिथि को स्टेशन डायरी में रणधीर सिंह, अल्ताफ, अभयानंद झा आदि को छोड़ने की बात अंकित है. यदि अंकित नहीं है तो गवाहों का बयान झूठा है और अनुसंधानकर्ता ने जानबूझकर अभियुक्तों को बचाने के लिए केस दैनिकी लिखी है. पुलिस अधीक्षक देवघर का यह प्रतिवेदन संदेह के दायरे में आता है.
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