
Giridih: जयराम महतो के पार्टी JLKM ने देर रात प्रत्याशियों की लिस्ट जारी किया. जिसमें नौ प्रत्याशियों को उम्मीदवार बनाया गया है. इसमें गिरिडीह से नवीन आनंद चौरसिया भी शामिल है. तो राज्य के सतारूढ़ दल JMM ने 35 प्रत्याशियों का लिस्ट जारी किया. जिसमें गांडेय से कल्पना सोरेन और गिरिडीह विस से वर्तमान विधायक सुद्विया कुमार सोनू शामिल हैं. 2024 का चुनाव गिरिडीह सदर विधानसभा में बेहद दिलचस्प होने वाला है. क्योंकि एक समय तीनो बेहद खास दोस्त की भूमिका में रहे थे. यहां तक कि एक समय चुनाव में तीनो एक दूसरे का सहयोग तक कर चुके थे.
वहीं अब इस चुनाव में तीनों एक दूसरे के पॉलिटिकल विरोधी होंगे. राजनीति कब किस दिशा में करवट ले, इसकी बानगी इस चुनाव में देखने को मिल रहा है. एक तरफ सदर विधायक सोनू पिछले पांच साल में एक दो बार नहीं बल्कि कई बार पूर्व विधायक निर्भय शाहाबादी पर इशारों में जमकर शब्दों के तीर चला चुके हैं. वही दूसरी तरफ पूर्व विधायक निर्भय शाहाबादी ने पिछले पांच साल में वर्तमान विधायक सोनू के खिलाफ मुंह तक नहीं खोला.
लिहाजा, आने वाले दिनों में गिरिडीह की राजनीति में और गरमाहट बढ़ना तय है. शब्दों के तीर तक एक दूसरे पर जमकर चलेंगे. ये भी तय है. और कौन सा तीर 23 नवंबर को किस को जीत दिलाएगा. ये देखना भी कम दिचलस्प नहीं होगा. क्योंकि पूर्व विधायक निर्भय शाहाबादी को पिछले दो कार्यकाल का खासा अनुभव है. खास तौर पर जाति समीकरण साधने में. अगड़ी पिछड़ी जातियों में पूर्व विधायक निर्भय शाहाबादी की पकड़ भी मजबूत माना जाता है. लिहाजा, इस चुनाव में माना जा रहा है पूर्व विधायक निर्भय शाहाबादी को अपने इस पुराने अनुभव का फायदा मिल सकता है. वहीं दूसरी तरफ सदर विधायक सोनू इस चुनाव में पिछले पांच साल के कार्यकाल की उपलब्धियों को लेकर लोगो के समर्थन की उम्मीद लगाए हुए हैं. लेकिन हेमंत सरकार में स्वीकृत कराए गए कई बड़े अधूरे प्रोजेक्ट को लेकर चर्चा में भी हैं. और सोशल मीडिया में ट्रॉल किए जा रहे है.
हालात ऐसे भी हैं कि सदर विधायक सोनू के कई बड़े कट्टर समर्थकों को उनका बचाव भी करना पड़ रहा है. वही JLKM के प्रत्याशी नवीन आनंद चौरसिया पहली बार चुनाव मैदान में हैं. जमीन कारोबार से जुड़े नवीन आनंद चौरसिया को राजनीतिक का वैसे तो पुराना धुरंधर माना जाता है क्योंकि अपने इन दोनों दोस्तों के चुनाव में नवीन आनंद चौरसिया सहयोग कर चुके हैं. 2019 के चुनाव में नवीन आनंद ने जहां वर्तमान विधायक सोनू के समर्थन में खुल कर सहयोग में आए थे तो वही इसे पहले वो एक चुनाव में वो पूर्व विधायक निर्भय शाहाबादी को बैकअप दे चुके हैं. लेकिन अब बात हो रहा है खुद के चुनाव लड़ने को लेकर, लिहाजा, इसमें नवीन आनंद कितना सफल होंगे, ये 23 नवंबर को ही दिखेगा. क्योंकि सदर विस में हार जीत में पीरटांड़ की भूमिका को निर्णायक माना जाता है. जिसके नाम पर पीरटांड़ के बूथों के EVM से वोट निकलते है. वहीं मुकद्दर का सिकंदर कहलाता रहा है.




