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सबरीमाला मंदिर : हिंदूवादी संगठनों ने मीडिया को चेताया, कवरेज के लिए युवा महिला पत्रकारों को न भेजें

SC ने 10 से 50 वर्षीय महिलाओं के मंदिर में प्रवेश का अधिकार देकर सदियों पुरानी परंपरा को खत्म कर दिया था. बता दें कि 17 से 22 अक्टूबर के बीच मंदिर खुला था. महिलाओं के प्रवेश करने का प्रयास किया, लेकिन किसी को सफलता नहीं मिली.

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 NewDelhi : सबरीमाला मंदिर के द्वार खुलने को लेकर हिंदूवादी संगठनों ने मीडिया को चेताया है कि वे  कवरेज के लिए युवा महिला पत्रकारों को न भेजें. सबरीमाला मंदिर सोमवार को फिर से एक बार खुल रहा है. बता दें कि SC के आदेश के बाद अब 10-50 वर्ष की महिलाओं को भी मंदिर में प्रवेश का अधिकार प्राप्त हुआ है. मंदिर समिति के अलावा अन्य हिंदूवादी संगठन महिलाओं के प्रवेश के विरोध में हैं. SC ने 10 से 50 वर्षीय महिलाओं के मंदिर में प्रवेश का अधिकार देकर सदियों पुरानी परंपरा को खत्म कर दिया था. बता दें कि 17 से 22 अक्टूबर के बीच मंदिर खुला था. महिलाओं के प्रवेश करने का प्रयास किया, लेकिन किसी को सफलता नहीं मिली.  जान लें कि विरोध प्रदर्शन को कवर करने वाली महिला पत्रकारों पर भी हमले हुए. विरोध करने वाले संगठनों ने सुप्रीम कोर्ट के 28 सितंबर के आदेश की समीक्षा की मांग की है.

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मान्यता है कि सबरीमाला मंदिर के भगवान अयप्पा ब्रह्मचारी थे

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अदालत के प्रमुख न्यायाधीश अब्दुलकावी अहमद यूसुफ मे फैसला पढ़कर सुनाया. 16 में से 15 जज, भारत के हक में थे.

मान्यता है कि सबरीमाला मंदिर के भगवान अयप्पा ब्रह्मचारी थे, इसलिए इसमें महिलाओं का प्रवेश वर्जित था. मीडिया संपादकों को भेजे गये एक पत्र में विश्व हिंदू परिषद और हिंदू ऐक्यावेदी समेत हिंदूवादी संगठनों के संयुक्त मंच सबरीमाला कर्म समिति ने रविवार को कहा कि 10-50 आयु वर्ग की महिला पत्रकारों को भेजने से स्थिति और भी चिंताजनक जो सकती है और विरोध-प्रदर्शन को भड़क सकता है. इस मुद्दे पर भक्तों का समर्थन करने या विरोध करने के अपने अधिकार को स्वीकार करते हुए, हम उम्मीद करते हैं कि आप ऐसा कोई कदम नहीं उठाएयेंगे जिससे स्थिति और बिगड़े. खबरों के अनुसार त्रावणकोर के आखिरी राजा चिथिरा थिरुनल बलराम वर्मा के जन्मदिवस मंगलवार है. इस अवसर पर सोमवार शाम को पूजा के लिए मंदिर खोला जायेगा. मंदिर मंगलवार को रात दस बजे बंद किया जायेगा.

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