
Amit Jha
Ranchi : कांग्रेस में वापसी के लिए कई दिग्गज नेता कोशिश कर रहे हैं. रांची से दिल्ली आलाकमान तक दौड़ लगायी जा रही है. फिर से पार्टी का सिपाही बनने का लाइसेंस हासिल करने को कांग्रेस के बड़े नेताओं को आवेदन दिया गया है. इनमें पूर्व प्रदेश अध्यक्ष रहे प्रदीप बलमुचु औऱ सुखदेव भगत शामिल हैं. इनके अलावा औऱ जिस एक नाम को राजनीतिक गलियारे में तलाशा जाता रहा है, वे हैं बरही के पूर्व विधायक मनोज यादव. वे उन नामों में शामिल रहे हैं जिन्होंने कांग्रेस की लंबे समय तक सेवा की.
पार्टी विधायक दल का नेता तक बने. पर अब वे फिलहाल कमल का फूल थामे ही आगे बढ़ने का इरादा जता चुके हैं. कांग्रेस में वापसी के लिए किसी संभावना को इंकार कर रहे हैं. भाजपा में ही खुश हैं.
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90 के दशक से शुरू किया था राजनीतिक सफर
मनोज यादव सक्रिय राजनीति में 90 के दशक में आये. कांग्रेस से राजनीतिक सफर की शुरुआत की. 1989 में बिहार विधानसभा चुनाव में पहली बार उतरे. उसमें वे हार गये. इसके बाद एक बार फिर 1995 में कांग्रेस से बरही सीट पर दावा ठोंका, विधानसभा पहली बार पहुंचे.
इसके बाद संयुक्त बिहार में वन मंत्रालय का दायित्व भी संभालने का मौका मिला. झारखंड अलग राज्य बनने के बाद 2007 में कांग्रेस विधायक दल का नेता उन्हें बनाया गया.
2019 में विधानसभा चुनाव हुए. इस दौरान मनोज यादव ने पहली बार कांग्रेस का दामन छोड़ कर भाजपा ज्वाइन की. उनके साथ पूर्व कांग्रेसी और विधायक सुखदेव भगत भी शामिल हुए.
चुनाव के दौरान भाजपा ने बरही सीट से उमाशंकर अकेला के बजाये मनोज यादव को ही मौका दिया. हालांकि वे अकेला से हार गये. पर इसके बावजूद वे अब सुखदेव या अन्य कांग्रेसी नेताओं की तरह घर वापसी के लिए इच्छुक नहीं.
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पार्टी, पब्लिक की सेवा में ही खुश
न्यूज विंग से बातचीत में मनोज यादव कहते हैं कि यह सच है कि भाजपा ज्वाइन करने के बाद उन्होंने फिर पार्टी मुख्यालय में पैर नहीं रखा है. पर हजारीबाग में जिला, क्षेत्र स्तर पर होने वाले पार्टी कार्यक्रमों में उनकी व्यस्तता बनी रहती है.
मीटिंग में बुलावे पर जरूर शामिल होते हैं. इसके अलावा कोराना काल में पार्टी की ओर से सौंपे गये दायित्वों को भी पूरा कर रहे. इसके इतर वे खुद से भी बरही विधानसभा की जनता की जरूरतों के लिए लगातार पहल करते रहे हैं.
जब भी जनता के सवाल उनके सामने आते हैं, वे उसके निदान में व्यक्तिगत तौर पर यथासंभव पहल करते हैं. भाजपा में आने पर उन्हें किसी तरह का अफसोस नहीं. ना ही दूसरे कांग्रेसी नेताओं की तरह पुरानी पार्टी में वापसी का कोई ख्याल आ रहा. अभी वे यहीं खुश हैं.
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