
Ranchi: निशुल्क एवं अनिवार्य शिक्षा अधिकार अधिनियम 2009 के तहत बीपीएल कोटे से बच्चों का नामांकन डीएवी जामाडोबा झरिया में नहीं हो पाया था. जिला शिक्षा अधीक्षक ने आरटीई 2009 के तहत बीपीएल कोटे के साथ छात्रों के नामांकन करने के आदेश जारी किए थे. डीएसई के आदेश के बावजूद स्कूल ने नामांकन नहीं लिया था.
डीएवी जामाडोबा के प्रिंसिपल के विरुद्ध उचित कार्रवाई की मांग भी की गयी थी. इसको लेकर एनसीपीसीआर ने धनबाद डीसी ए डोडे को पत्र लिखकर संज्ञान लेने को कहा था. एनसीपीसीआर (राष्ट्रीय बाल अधिकार संरक्षण आयोग) ने डीसी को बताया कि वो स्कूल पर जांच कर कार्रवाई करना चाहती है.
इसको लेकर डीसी धनबाद को 3 बार पत्र लिखा गया. पर धनबाद डीसी ने एक बार भी पत्र का जवाब नहीं दिया है. डीसी के जवाब नहीं देने के करण स्कूल पर कार्रवाई नहीं हो पा रही है.
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एनसीपीसीआर ने 20 दिनों के अंदर डीसी से मांगी रिपोर्ट
एनसीपीसीआर ने धनबाद डीसी को तीसरी बार इस मामले पर रिमाइंडर भेजा है. एनसीपीसीआर ने 20 दिनों के अंदर जांच कर सारे डिटेल मांगे हैं. धनबाद डीसी को लिखे पत्र में एनसीपीसीआर ने स्पष्ट किया है कि डीसी द्वारा जवाब नहीं देने के कारण अब तक जांच प्रभावित है. जिसके कारण स्कूल पर कार्रवाई नहीं की जा रही है. स्थानीय लोगों के गरीब बच्चे इस स्कूल में आरटीई के तहत नामांकन नहीं करा पा रहे हैं. इस नोटिस के जरिए आरटीई एक्टा 2019 के सेक्शंन 12 (ई) का उल्लंएघन करते हुए 7 बच्चों का ईडब्लूनएस (EWS) कैटेगरी में एडमिशन नहीं लेने की बात कही गयी है.
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एक साल पहले प्रिंसिपल को भेजे नोटिस का नहीं मिला जवाब
इसकी शिकायत मिलने पर जिला शिक्षा अधीक्षक ने 18 सितंबर 2018 को टाटा डीएवी स्कूरल जामाटोबा के प्रिंसिपल को नोटिस भी भेजा और 24 घंटे के अंदर सभी 7 बच्चों को एडमिशन लेने का आदेश दिया. साथ ही बताओ नोटिस का जवाब मांगा. इससे पहले भी जिला शिक्षा अधीक्षक की ओर से टाटा डीएवी को 7 बच्चों के एडमिशन को लेकर लिखा गया था. 10 अप्रैल 2018 को लिखे गये आदेश के तहत स्कू्ल को उन बच्चों का एडमिशन 3 दिनों के अंदर लेने को कहा गया था.
भ्रष्टाचार की बू आ रही है : आरटीआई कार्यकर्ता
धनबाद के टाटा डीएवी स्कूल में बच्चों के एडमिशन के लिए आरटीआई कार्यकर्ता महेश कुमार बीते एक साल से संघर्ष कर रहे हैं. आरटीआई कार्यकर्ता महेश कुमार का कहना है कि धनबाद जिले में नि: शुल्क एवं अनिवार्य बाल शिक्षा का अधिकार अधिनियम 2009 का पालन नहीं किया जा रहा है. उपायुक्त धनबाद की ओर से राष्ट्रीय बाल अधिकार संरक्षण आयोग, नई दिल्ली के तीन पत्र का जवाब नहीं देने के कारण इस मामले में भ्रष्टाचार की बू आ रही है.
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