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मंत्री नीलकंठ मुंडा के विधानसभा क्षेत्र में ही दम तोड़ रहीं योजनाएं, 13.44 लाख का शौचालय घोटाला

Khunti : राज्य के ग्रामीण विकास मंत्री नीलकंठ सिंह मुंडा के अपने विधानसभा क्षेत्र खूंटी में विकास योजनाएं कागजों पर तो फल-फूल रही हैं लेकिन धरातल पर दम तोड़ दे रही हैं.

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क्षेत्र की कुडापूर्ति पंचायत के जिलिंगकेल और गिडुंग टोला में 13 लाख 44 हजार रुपये का घोटाला हुआ है.

दरअसल, इन गांवों में शौचालय निर्माण का कार्य अधिकारियों की मिलीभगत से जिन ठेकेदारों को दिया गया उन्होंने बिना निर्माण कराये पैसों की निकासी कर ली. प्रत्येक शौचालय के लिए 12 हजार रुपये आवंटित थे.

चौंकाने वाली बात यह है कि राज्य सरकार ने पूरे खूंटी जिले को ही ओडीएफ घोषित कर रखा है जबकि खूंटी प्रखंड में ही कई पंचायतों में कुड़ापूर्ति की तरह आज भी शौचालय का निर्माण पूरा नहीं हुआ है.

जिले के जिन इलाकों में पत्थलगड़ी की गयी थी, उन इलाकों में ग्रामीणों द्वारा सरकारी योजनाओं के बहिष्कार की बात जिला प्रशासन के अधिकारी कहते रहे. लेकिन लेकिन जिन इलाकों में पत्थलगड़ी नही हुई थी उन इलाकों में भी सरकारी योजनाएं जमीन पर नहीं उतारी जा सकीं.

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पढ़िये मुरहू प्रखंड अंतर्गत कुड़ापूर्ति पंचायत के जिलिंगकेल और गिड़ुंग टोला से न्यूज विंग की ग्राउंड रिपोर्ट :

कुड़ापूर्ति पंचायत का जिलिंगकेल राजस्व गांव है जिसमें सात टोले हैं. सबसे बड़ा टोला जिलिंगकेल है. टोले में 78 परिवार रहते हैं. ग्रामीण बताते हैं कि गांव में कोई भी परिवार शौचालय का उपयोग नहीं करता.

इसका कारण पूछने पर वे कहते हैं कि गांव में शौचालय का निर्माण सिर्फ पैसा खाने के लिए किया गया है. एक भी शौचालय का निर्माण आज तक पूरा नहीं हुआ. सभी एक साल से अधूरे पड़े हैं. गांव के सभी शौचालय चदरा से बनाये गये हैं जिसमें किसी में सूखी टंकी नहीं बनायी गयी है. गांव पेयजल संकट से भी जूझ रहा है. ग्रामीण डांड़ी के पानी से अपनी जरूरत पूरी करते हैं.

‘गांव में मोदी जी के सभी शौचालय का यही हाल’

मंत्री नीलकंठ मुंडा के विधानसभा क्षेत्र में ही दम तोड़ रहीं योजनाएं, मात्र दो टोलों में 13.44 लाख का शौचालय घोटाला
गांव में सभी सरकारी शौचालय अधूरे पड़े हैं.

ग्रामीण खड़िया सोय कहते हैं, “गांव के निकट जंगल है. बरसात में झाड़ियां ज्यादा उग आती हैं. कई जहरीले जीवों के काटने का डर रहता है. शौचालय नहीं होने के कारण गांव के लोग खुले में ही शौचालय जाते हैं. मेरा खुद का चदरा वाला शौचालय एक साल से अधूरा पड़ा हुआ है. यह स्थिति गांव में बने मोदी जी के सभी शौचालयों की है.”

आधे-अधूरे कागजों पर बने शौचालय सिर्फ पंचायत के जिलिंगकेल में ही नही बल्कि दूसरे टोलों में भी नजर आते हैं. खूंटी-टाटा हाईवे पर स्थित कुड़ापूर्ति गांव में करीब दस शौचालय रंगरोगन के साथ बने हुए दिखते हैं. लेकिन गांव के गिडुंग टोला के 36 शौचालय एक साल से अधूरे हैं.

टोले में रहने वाले फगुआ मुंडा कहते हैं, “शौचालय के नाम पर छड़ और सीमेंट का एक-दो स्लैब लगाकर छोड़ दिया. टोले के सभी शौचालय एक साल से अधिक समय से अधूरे हैं.”

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बांबे ग्रुप ने नहीं किया काम : मुखिया

कुड़ापूर्ति पंचायत के मुखिया दशय मुंडा कहते हैं, “पीएचईडी द्वारा लाये गये ठेकेदार और बांबे ग्रुप के द्वारा शौलालय बनवाये गये हैं. उनलोगों ने काम ही नहीं किया. संपर्क करने पर जबाब नहीं देते. बांबे ग्रुप ने करीब 200 शौचालय बनाने का ठेका लिया है लेकिन काम पूरा नहीं किया है.”

मुरहू प्रखंड विकास पदाधिकारी प्रदीप भगत से इस संबध में पूछा गया तो उन्होंने कहा, “मामले को मैं खुद देख लेता हूं उसके बाद ही इस पर कुछ कहा जा सकता है.”

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