
Ranchi : रिम्स में एम्स की तर्ज पर ट्रॉमा सेंटर का निर्माण कराया गया है. 64 करोड़ की लागत से बने इस सेंटर के डिजाइन के अनुसार 100 सीटों पर इलाज की सुविधा होनी थी, पर मात्र 12 बेड पर ही इलाज हो पा रहा है.
14 जुलाई को इसका उद्घाटन किया गया था. तब से रोज 10 से 15 मरीज ऐसे होते हैं जिनका नाम वेटिंग लिस्ट में दर्ज कराया जाता है. पर नंबर आने में हमेशा देर हो जाती है और उचित इलाज के अभाव में कई मरीजों की मौत हो जाती है.
हालांकि ट्रामा सेंटर में मिलने वाली सुविधाएं किसी भी प्राइवेट अस्पतालों से बेहतर हैं.
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डॉक्टरों और नर्सिंग स्टॉफ की कमी है मुख्य वजह
ट्रामा सेंटर में सिर्फ 12 बेडों पर इलाज होने का प्रमुख कारण है डॉक्टरों और नर्सिंग स्टॉफ की भारी कमी.
रिम्स ट्रामा सेंटर का जिम्मा कोई भी सीनियर डॉक्टर लेने को तैयार नहीं है. इसकी वजह का पता लगाकर समाधान करना प्रबंधन का काम है जो हो नहीं रहा है.
पर इसकी कीमत गरीब और जरूरतमंद मरीजों को अपनी जान देकर चुकानी पड़ रही है. ट्रामा सेंटर में इलाज के लिए बहुत ही सीरियस कंडीशन वाले मरीजों को लाया जाता है.
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सीनियर रेजीडेंट के भरोसे हो रहा इलाज
ट्रामा सेंटर में इलाज के लिए स्पेशलिस्ट डॉक्टर की जरूरत है जबकि इसे सीनियर रेजीडेंट डॉक्टरों के भरोसे चलाया जा रहा है.
नर्सिंग स्टॉफ भी उतने ही हैं जितने में 12 बेड पर इलाज हो सके. अगर सभी फ्लोर में ईलाज चालू हो जाये तो इनकी भारी कमी हो जायेगी.
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