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#Jharkhand: 7 लोगों की हुई मॉब लिंचिंग, एनसीआरबी की रिपोर्ट में कहा- कोई मामला नहीं

Ranchi: साल 2017 में झारखंड में मॉब लिंचिंग के कारण सात लोगों की मौत हुई, पर हाल ही में जारी राष्ट्रीय अपराध रिकॉर्ड ब्यूरो (एनसीआरबी) की रिपोर्ट में यह कहा गया है कि अफवाहों और फेक न्यूज के चलते कोई मौत नहीं हुई.

इंडियन एक्सप्रेस में प्रकाशित एक रिपोर्ट के मुताबिक, आइपीसी की धारा 505 और आइटी एक्ट के तहत दर्ज एफआइआर के आधार पर झूठी और फर्जी खबरों और अफवाहों के तहत पहली बार इस तरह के आंकड़े इकट्ठा किये गये हैं.

साल 2017 में सोशल मीडिया के माध्यम से बच्चा चोरी की अफवाह फैली. उसके बाद सरायकेला-खरसावां और पूर्वी सिंहभूम जिलों में हुई मॉब लिंचिंग में सात लोगों की मौत हुई.

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पुलिस के अनुसार इस मामले में एक स्थानीय पत्रकार सहित दो लोगों को गिरफ्तार किया गया था. इन लोगों पर आरोप था कि इन्होंने सोशल मीडिया पर बच्चा चोरी को लेकर सचेत करने के लिए कथित तौर पर एक पोस्ट डाला था.

पुलिस के अनुसार इससे लोगों में घबराहट फैली और 18 मई 2017 को सरायकेला-खरसावां के बागबेड़ा और पूर्वी सिंहभूम के राजनगर में भीड़ हिंसक हो गयी और मॉब लिंचिंग की घटना हुई.

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21 लोगों की मौत हुई

एनसीआरबी की रिपोर्ट में ऐसे मामले शून्य बताये गये हैं. यह आंकड़ा और भी महत्वपूर्ण तब हो जाता है जब बीते तीन साल में राज्य में गोकशी, चोरी, बच्चा चोरी और अफवाहों के चलते 21 लोगों की मौत हो गयी हो.

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यही नहीं राज्य में जनवरी 2017 से लेकर अब तक जादू-टोना करने के शक के आधार पर हुई भीड़ की हिंसा में 90 से अधिक लोगों की मौत हो गयी.

2017 की घटनाओं के बाद अफवाह फैलाने वाले लोगों के खिलाफ अलग-अलग एफआइआर दर्ज की गयी, जिससे पुलिस का कहना है कि जादूगोड़ा, हल्दीपोखार, बागबेड़ा और घाटशिला इलाकों में डर फैला.

पहला मामला आइपीसी की धारा 505, 153ए और 34 के तहत दो लोगों के खिलाफ दर्ज किया गया. दूसरी एफआइआर सोशल मीडिया पोस्ट फॉरवर्ड करने के लिए एक स्थानीय पत्रकार के खिलाफ आइपीसी की धारा 153 के तहत दर्ज की गयी.

एक आरोपी को पूर्वी सिंहभूम की सत्र अदालत ने जमानत दे दी. पहली घटना 18 मई 2017 को हुई. बच्चा चोरी की अफवाह को लेकर हलीम, नईम, सज्जाद और सिराज खान नाम के चार लोगों पर सरायकेला-खरसावां के शोभापुर और पदनामसाई जिलों में भीड़ ने हमला किया. भीड़ ने उन्हें बचाने आयी पुलिस पर भी हमला किया.

दूसरे मामले में हत्या और सरकारी कर्मचारी को उसकी ड्यूटी करने से रोकने को लेकर दर्ज हुआ. पहले मामले में सुनवाई चल रही है.

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फास्ट ट्रैक कोर्ट ने 12 लोगों को दोषी ठहराया

दूसरे मामले में 2018 में फास्ट ट्रैक कोर्ट ने 12 लोगों को दोषी ठहराया था और सरकारी कर्मचारियों के काम में बाधा पहुंचाने, हथियारों से उन पर हमला करने, अन्य घरों में तोड़फोड़ करने, कानून एवं व्यवस्था को बाधित करने, नियमों को तोड़ने के लिए चार साल की सजा सुनायी.

दूसरी घटना 18 मई की शाम की है. बच्चा चोरी की अफवाह पर विकास वर्मा और गौतम वर्मा नाम के दो भाई, उनकी दादी रामचंद्रा देवी और उनके दोस्त गणेश गुप्ता पर भीड़ ने हमला कर दिया. इस हमले में दोनों भाइयों और उनकी दादी की मौत हो गयी थी.

इस घटना के संबंध में कुल 26 लोगों को गिरफ्तार किया गया था और मामले में सुनवाई जारी है. एनसीआरबी की रिपोर्ट में कहा गया है कि ये आंकड़े राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों द्वारा उपलब्ध कराये गये हैं.

तत्कालीन डीएसपी (कानून एवं व्यवस्था) विमल कुमार ने कहा कि अफवाह फैलाने के लिए आइपीसी की धारा 505 के तहत मामला दर्ज किया गया था और ये अफवाहें मॉब लिंचिंग के कारणों में से एक थी. इन्हें एनसीआरबी के आंकड़ों में क्यों शामिल नहीं किया गया, इसकी जांच करने की जरूरत है.

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