
NewDelhi : भारतीय रिजर्व बैंक के गर्वनर शक्तिकांत दास ने कहा कि मौजूदा समय में वैश्विक अर्थव्यवस्था नये और तनावपूर्ण व्यापार वार्ताओं के अनिश्चित दौर में जा रही है. इस वजह से कुछ जरूरी मसलों का समाधान निकालना कठिन होता जा रहा है. शक्तिकांत दास India’s Relations with International Monetary Fund किताब के लॉन्च के मौके पर दिल्ली में भारतीय अर्थव्यवस्था पर अपनी बात रख रहे थे. इस क्रम में शक्तिकांत दास ने कहा कि सीमित संसाधनों के बीच व्यापक नीतियां बनाने का काम मुश्किल है.
कहा कि अधिकारियों द्वारा बनायी गयी और सुझाई गयी नीतियों को व्यापक पैमाने पर लागू किये जाने की जरूरत है. शक्तिकांत दास ने कहा कि इससे स्थायी विकास का पैमाना स्थापित किया जा सकेगा.
शक्तिकांत दास ने यह भी कहा कि मौजूदा समय में अर्थव्यवस्था को लेकर कई चुनौतियां सामने आ रही हैं. वर्तमान में संस्थाओं द्वारा लिये जाने वाले कर्ज का स्तर ज्यादा है और विकसित होती अर्थव्यवस्था वाली सरकारों द्वारा समूह में लिये जाने वाले कर्ज ने सकल घरेलू उत्पाद का 100 फीसदी पार कर लिया है.
करंसी पॉलिसी अंतरराष्ट्रीय मुद्राकोष की जिम्मेदारी
शक्तिकांत दास ने करंसी पॉलिसी पर कहा कि करंसी पॉलिसी को बनाये रखना किसी एक देश की नहीं बल्कि अंतरराष्ट्रीय मुद्राकोष की जिम्मेदारी है. उन्होंने कहा कि अमेरिका जैसे किसी एक देश द्वारा दूसरे देश पर एक्सचेंज रेट में साठगांठ करने का आरोप लगाना आधिपत्य जमाने जैसा दिखाई देता है.
जान लें कि अमेरिका के राष्ट्रपति डॉनल्ड ट्रंप भारत और चीन पर करंसी एक्सचेंज रेट को मजबूत बनाये रखने के लिए साठगांठ करने का आरोप लगाते रहे हैं. ट्रंप तो यहां तक भी कहते रहे हैं कि रिजर्व बैंक का बाजार से डॉलर की खरीदारी करना एक्सचेंज रेट को एक स्तर पर बनाये रखना जैसा करतब है.
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