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#Big_Tragedy : चार वर्षों से स्मार्टनेस तलाश रही है राज्य सरकार की सीएम स्मार्ट ग्राम योजना

Amit Jha

Ranchi : वर्ष 2016 में पूर्व सीएम रघुवर दास के समय शुरू हुई थी- सीएम स्मार्ट ग्राम योजना. योजना कछुआ चाल से बढ़ रही है. जो तस्वीर है, इस योजना को धरातल पर उतरने में और एक-दो साल लगने की संभावना है. डीपीआर, वीडीपी और दूसरे कारणों से यह योजना स्मार्टलेस योजना का तमगा पा चुकी है.

जिन पांच पंचायतों का चयन योजना के लिए हुआ था, वे स्मार्ट पंचायत बनने की हसरत लिए बाट जोह रही हैं.

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इस योजना से क्या मिलेगा ग्रामीणों को

योजना के अनुसार ग्रामीण आपस में बैठकर गांव के विकास के लिए खाका तैयार करेंगे. गांव का विकास अब गांव वालों के हिसाब से किया जायेगा. चयनित पंचायतों में नवाचार और आधुनिक तकनीक का प्रयोग करते हुए पंचायत को नया रूप दिया जायेगा.

इंटरनेट कनेक्टिविटी की सुविधा, स्मार्ट क्लासेज, सीसीटीवी का प्रयोग करते हुए गांव में सुरक्षा का माहौल बनाने, वाटर एटीएम, सोलर पावर का उपयोग, किसानों के लिए आदर्श हाट बाजार व्यवस्था, ई-लाइब्रेरी और अन्य ऐसी ही सुविधाओं को धरातल पर उतारना है. इसके लिए जिन पंचायतों का चयन होगा वे ग्राम विकास योजना यानि वीडीपी बनाकर ग्रामीण विकास विभाग को देंगे.

विभाग की स्वीकृति के बाद डीपीआर बनाकर उसे दिया जायेगा. इसके बाद अलग-अलग किश्तों में राशि का आवंटन पंचायतों को होगा. राशि आवंटन की प्रक्रिया आरंभ होते ही सालभर के भीतर पंचायतें पूर्णरूप से स्मार्ट विलेज बनाने की योजनाओं को पूरा कर लेंगी.

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  875 पंचायतों में से पांच पंचायतों ने मारी थी बाजी

वर्ष 2016 में ग्रामीण विकास विभाग, झारखंड सरकार ने सीएम स्मार्ट ग्राम योजना का लाभ लेने के लिए पंचायतों को आमंत्रित किया था. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की सांसद आदर्श ग्राम योजना की तर्ज पर सीएम स्मार्ट योजना तैयार हुई थी.

योजना के तहत पांच पंचायतों के लिए कुल 420 लाख रुपये तय किये गये. इसकी शत-प्रतिशत राशि राज्यांश से निर्धारित की गयी. ग्रामीण विकास विभाग द्वारा जारी विज्ञापन के आलोक में 875 पंचायतों ने आवेदन डाले. इनमें से 50 को शार्टलिस्टेड करते हुए निर्धारित प्रावधान के अनुसार कुल पांच पंचायतों को अंतिम रूप से चयनित किया गया. यह सब होते-होते सालभर लग गये.

और नवंबर 2017 में जाकर यह प्रक्रिया पूरी हुई. योजना के तहत गुमला में शिवराजपुर, रांची में गिंजो ठाकुर, हजारीबाग में चेनारो, बोकारो में बुंडू और पूर्वी सिंहभूम में कन्ताशोल पंचायत को शामिल किया गया है.

सिर्फ एक पंचायत को आवंटन, बाकियों पर मंथन

पिछले साल अक्टूबर-नवंबर में कंताशोल को 8.50 लाख रुपये की पहली किस्त जारी की गयी. 57 स्कीमों के लिए उसने कुल 70.83 लाख रुपये का डीपीआर विभाग को सौंपा था. जिसे स्वीकृति मिल गयी. इसके अलावा चेनारो ग्राम पंचायत के द्वारा 21 स्कीमों के लिए 79.80 लाख रुपये का डीपीआर तैयार किया जा चुका है.

बाकी तीन पंचायतें डीपीआर बनाने के फेर में उधेड़बून में पड़ी हैं. खासकर बुंडू और ठाकुर गिंजो पंचायत. दोनों पंचायतों ने सीएम स्मार्ट ग्राम योजना में चयन के लिए स्वयं अपना प्रस्ताव बनाया था. ऐसे में उन्हें समुचित जानकारी के अभाव में पहले तो वीडीपी बनाने में सरदर्द हुआ और अब वे डीपीआर बनाने में उलझे हैं.

तकनीकी दक्षता वाले एक्सपर्ट का अभाव

बुंडू मुखिया अजय सिंह के अनुसार हमारे पास तकनीकी दक्षता वाले एक्सपर्ट का अभाव है. यही समस्या ठाकुर गिंजो की भी है. विभाग को वीडीपी और डीपीआर बनाने में मदद करने को एक संस्था से सहयोग को लिखा था. विभाग ने उत्साह नहीं दिखाया.

अब ऐसी कोई राह ही नहीं दिख रही कि बिना अनुभवी और दक्ष व्यक्ति के डीपीआर कैसे और किससे तैयार कराएं. ऐसे में कन्ताशोल तो एक कदम आगे बढ़ा भी, बाकी स्मार्ट विलेज बनने के लिए आस लगाये बैठे हैं.

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