
Ranchi: झारखंड की राजधानी रांची बनने के बाद रांची जिला की जमीन की कीमतें आसमान छूने लगीं हैं. अवैध तरीके से प्रतिबंधित भूमि जिसमें गैरमजरूआ जमीन भी है, का खरीद-फरोख्त कर रजिस्ट्री करा लेने के मामले सामने आ चुके हैं. रांची में जमीन संबंधी कानून के प्रावधानों का उल्लंघन आम से लेकर खास तक खुलेआम अवैध जमाबंदी करा चुके हैं.
इन मामलों की शिकायत होने के बाद भी जिला प्रशासन के द्वारा वर्षें से मामले को लटकाये रखा गया. रांची जिले में अवैध जमाबंदी के 17488 से अधिक मामले लंबित हैं. जिसका कुल रकबा 35131.65 एकड़ है.
अवैध जमाबंदी को रद्द करने संबंधी लंबित मामलों का त्वरित निष्पादन करने के लिए राजस्व निबंधन एवं भूमि सुधार विभाग के द्वारा रांची उपायुक्त को कहा गया है. अवैध जमाबंदी में वैसे मामले लंबित हैं, जिनमें बिहार भूमि सुधार अधिनियम के लागू होने के बाद भी लैंड रिकार्ड में अंचल के द्वारा सुधार नहीं किया गया.
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किस अंचल में अवैध जमाबंदी के कितने मामले लंबित हैं
अवैध जमाबंदी के मामले सिल्ली अंचल में सबसे अधिक 2834 हैं. वहीं अवैध जमांबेदी के 57 मामले बड़गाई अंचल के हैं. अवैध जमाबंदी के मामले को लेकर राजस्व निबंधन एवं भूमि सुधार विभाग के द्वारा रांची उपायुक्त को जिले के अंतर्गत अवैध जमाबंदी को रद्द करने संबंधी लंबित मामलों का त्वरित निष्पादन करने को कहा गया है.
जिसपर विधिपूर्वक कार्रवाई करते हुए रिपोर्ट की तलब की गयी है. इसमें वैसे जमाबंदी जो अवैध व संदेहास्पद हैं, का जिक्र किया गया है. इन मामलों की कुल संख्या 17488 है. जिसका कुल रकबा 35131.65 एकड़ के करीब है.
| अंचल | मामले |
| अनगड़ा | 1301 |
| अरगोड़ा | 63 |
| इटकी | 642 |
| ओरमांझी | 725 |
| कांके | 438 |
| खलारी | 675 |
| चान्हो | 1192 |
| तमाड़ | 1196 |
| नगड़ी | 478 |
| नामकुम | 1898 |
| बड़गाई | 57 |
| बेड़ो | 520 |
| बुढ़मू | 1766 |
| बुंडू | 565 |
| मांडर | 1294 |
| रातू | 232 |
| लापुंग | 554 |
| शहर | 64 |
| सिल्ली | 2834 |
| सोनाहातू | 1617 |
| राहे | 526 |
| हेहल | 94 |
रांची में फैला हुआ है जमीन खरीद-फरोख्त का काला कारोबार
वन विभाग की जमीन से लेकर नदी-नालों, भूईहरी, पहानइती, सीएनटी लैंड का भी अवैध ढंग से खरीद-फरोख्त के कई मामले समाने आ चुके हैं. जिसमें एक ही जमीन की रजिस्ट्री कई लोगों के नाम कर दी गयी. क्योंकि ग्रामीण क्षेत्रों में कई पीढ़ी के बीच कानूनी बंटवारा नहीं हो पाता है. ऐसे में जमीन का कोई भी हिस्सेदार किसी भी भूखंड को बेच देता है.
वहीं गैरमजरूआ भूमि के फर्जी दस्तावेज और लैंड रिकार्ड में बदलाव कर अवैध जमाबंदी करा ली जाती है. इसमें अंचल कार्यलाय की मिलीभगत होती है. रजिस्ट्री ऑफिस के पदाधिकारियों व कर्मचारियों की मिलीभगत के कारण आदिवासी, गैरमजरूआ, वन विभाग की जमीन के साथ-साथ नदी-नालों की जमीन की भी रजिस्ट्री आसानी से हो जाती है. जमीन लेने के बाद खरीदार अंचल कार्यालय से म्यूटेशन करा लेते हैं.
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