
Chandan Chaudhry
Ranchi : प्राइवेट अस्पताल में मरीजों को किस प्रकार लूटा जा रहा है, इसकी एक बानगी मंगलवार को देखी गयी. मेन रोड स्थित राज अस्पताल में मरीजों को सिर्फ पैसे उगलने की मशीन समझ लिया गया है. यहां मरीज के सिर्फ अस्पताल में भर्ती होने भर की देर है, इसके बाद खेल शुरू होता है बिल बनाने का. किस प्रकार बिल में कौन से अलग-अलग खर्च जोड़कर इसे पहाड़ की तरह बना दिया जाता है, कोई इन अस्पताल प्रबंधन से सीखे. राज अस्पताल प्रबंधन अपने मरीजों से संबंधित फाइलों की देखरेख के लिए प्रत्येक मरीज से दो हजार रुपये वसूलता है.
इसे भी पढ़ें- मधुबन उपस्वास्थ्य केंद्र का विवाद गहराया, डॉक्टर ने की आत्मदाह की कोशिश
मो. तौफीक ने उठाये प्रश्न, तो डिस्चार्ज नहीं करने की मिली धमकी
कुछ ऐसा ही एक उदाहरण मंगलवार को सामने आया, जब पलामू के रहनेवाले मो. तौफीक ने बिल से असतुंष्ट होकर इस पर सवाल खड़े कर दिये. मो. तौफीक शनिवार को सड़क दुर्घटना के बाद इलाज के लिए राज अस्पताल में भर्ती हुए. इसके बाद जब डिस्चार्ज हुए, तो उन्हें कुल 16,730 रुपये का बिल दिया गया. इसमें दो हजार रुपये एडीएमएन चार्ज लिया गया था. जब मो. तौफीक ने पूछा कि यह किस चीज का चार्ज लिया गया है, तो उन्हें बताया गया कि यह पुलिस खर्चा है. तौफीक ने बताया कि जब अस्पताल प्रबंधन से उन्होंने पूछा, तो उन्हें बताया गया कि प्रत्येक एक्सिडेंट केस में दो हजार रुपये अलग से पुलिस खर्चा देना होता है. मो. तौफीक ने बताया कि जब दो हजार रुपये देने पर आपत्ति जतायी, तो डिस्चार्ज नहीं करने की धमकी दी गयी. इसके बाद मजबूरन उन्हें दो हजार रुपये देने ही पड़े. इसके बाद मो. तौफीक को राज अस्पताल से छुट्टी कराकर दूसरे अस्पताल में इलाज के लिए भर्ती कराया गया.
इसे भी पढ़ें- रांची में फादर स्टेन स्वामी के घर पर पुणे की पुलिस ने मारा छापा, लैपटॉप-मोबाइल जब्त
फाइलों के रखरखाव के लिए लिया जाता है पैसा : अस्पताल प्रबंधन
इस संबंध में जब अस्पताल प्रबंधन से पूछा गया, तो प्रबंधन ने बताया कि फाइलों के रखरखाव के लिए एडीएमएन (प्रशासनिक) चार्ज लिया जाता है. यह पुलिस खर्च नहीं, बल्कि अस्पताल का प्रशासनिक खर्च होता है. यह सभी मरीजों से नहीं लिया जाता, सिर्फ दुर्घटनावाले केस में लेते हैं, क्योंकि इससे जुड़ी फाइल लंबे समय के लिए संभालकर रखनी पड़ती है.




