
- परिजनों ने जांच को दूसरी दिशा में भटकाने की कोशिश का लगाया आरोप
Palamu: पलामू जिले के चैनपुर थाना क्षेत्र के पूर्वडीहा निवासी नौसेना के जवान सूरज कुमार दुबे हत्याकांड में मुंबई पुलिस के दावे को परिजनों ने खारिज कर दिया है. रविवार की दोपहर गांव में बात करते हुए परिजनों ने कहा कि सूरज की हत्या में बड़ी साजिश रची गई है. साथ ही जांच को दूसरी दिशा में भटकाने के लिए अपहरण का ढोंग रचा जा रहा है. अगर अपहरण की बात होती तो लापता होने के बाद उनसे किसी तरह की फिरौती की मांग जरूर हुई होती, लेकिन गायब होने के 3 से 4 दिनों के दौरान परिवार के किसी सदस्य के मोबाइल पर किसी तरह के पैसों की मांग नहीं की गई.
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विदित हो कि नेवी जवान सूरज कुमार दुबे एक महीने की छुट्टी बिताने के बाद गत 30 जनवरी को वापस ड्यूटी ज्वाइन करने के लिए अपने गांव पूर्वडीहा से कोयंबटूर जाने के लिए निकले थे. डाल्टनगंज से बस द्वारा रांची पहुंचे और उसके बाद फ्लाइट से हैदराबाद इसी दिन शाम में पहुंच गए थे. हैदराबाद से उन्हें चेन्नई और फिर कोयंबटूर जाना था, लेकिन रात नौ बजे हैदराबाद हवाई अड्डे से सूरज कुमार दुबे अचानक गायब हो गए थे. 5 दिनों के बाद सूरज कुमार दुबे हैदराबाद से 1500 किलोमीटर दूर महाराष्ट्र के पालघर इलाके में जंगल में जले अवस्था में गंभीर रूप से पाए गए थे. हालांकि 5 फरवरी की देर रात सूरज की इलाज के दौरान नेवी के अस्पताल में मौत हो गई.
सीबीआई जांच और शहीद का दर्जा देने की मांग
सूरज की हत्या से उसके परिजन पूरी तरह टूट गए हैं. यह घटना उन्हें अंदर से झकझोर दिया है. बात करते हुए परिजनों ने कहा कि सूरज काफी मेधावी और समझदार युवक था. उसके साथ ऐसी घटना कैसे हो गई. इससे उनके साथ साथ पूरे गांव में यह मामला सोचनीय पहलू बनकर उभरा है. परिजनों ने यह भी कहा कि सूरज की हत्या की जांच केंद्रीय जांच एजेंसी (सीबीआई) से कराई जाए और उसे शहीद का दर्जा दिया जाए.
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ड्यूटी जाने वाले दिन आया था धर्मेंद्र का फोन
नीरज कुमार दुबे ने कहा कि 30 जनवरी को धर्मेंद्र का फोन उसके पिता के मोबाइल नंबर पर आया था. फोन पर मौजूद धर्मेंद्र नामक युवक ने कहा कि वह सूरज के साथ कोयंबटूर में नेवी के आईएनएस अग्रणी में साथ रहकर ड्यूटी करता है.
बाद में पलामू पुलिस अधीक्षक कार्यालय से सूरज का सीडीआर निकालने पर जानकारी हुई है कि धर्मेंद्र की सूरज के साथ फोन पर मैसेज के माध्यम से 10 से 15 बार बातचीत हुई है और हर बार सूरज का लोकेशन धर्मेंद्र लेते हुए नजर आया है. मृत जवान के भाई ने कहा कि सूरज के लापता होने के बाद जब इस संबंध में उसकी यूनिट में जानकारी दी गई तो 2 दिनों तक उसके कमांडेंट मदद करते रहे, लेकिन जब उन्हें सूरज के साथ धर्मेंद्र की फोन पर हुई बातचीत और मैसेज की जानकारी दी गई तो उन्होंने मदद करने में आनाकानी करनी शुरू कर दी. उनकी सहानुभूति अचानक से बदल गया.
झारखंड सरकार पर मदद नहीं करने का आरोप
परिजनों ने यह भी कहा कि सूरज के गायब होने के बाद उसका पता लगाने में और छानबीन कराने में पलामू के सांसद को छोड़ दिया जाए तो किसी जनप्रतिनिधि ने उनकी मदद नहीं की. यहां तक की झारखंड सरकार ने भी उनकी कोई मदद नहीं की. राज्य के पुलिस महानिदेशक, मुख्यमंत्री, किसी मंत्री या फिर बिधायक ने उनका कोई हाल नहीं लिया.
परिजनों ने यह भी कहा कि सूरज 8 वर्ष से देश की सेवा में लगा हुआ था. लेकिन उसकी हत्या के बाद किसी तरह का सहयोग नहीं मिलना, समझ से परे लगता है. उसके परिवार से 60 प्रतिशत पुरुष सदस्य देश सेवा में लगे हैं. परिजनों ने झारखंड सरकार से अविलंब पहल करते हुए सीबीआई जांच की अनुशंसा करने की मांग की है.
सोमवार को पहुंचेगा शव
घटना के बाद से सूरज के पैतृक गांव पलामू के चैनपुर थाना क्षेत्र के कोल्हुआ गांव में मातम पसरा हुआ है. मुम्बई से 3.30 बजे फ्लाइट से शव रांची लाया जाएगा. जिसके बाद पैतृक घर आएगा. सोमवार को कोयल नदी के तट पर उनका अंतिम संस्कार किया जाएगा.
2012 में नेवी में सूरज का हुआ था चयन
सूरज कुमार दुबे का अगस्त 2012 में नेवी में चयन हुआ था. उनकी शुरुआती शिक्षा पलामू के ज्ञान निकेतन स्कूल से हुई थी. सूरज शुरू से ही मेधावी छात्र रहे थे. नेवी में चयन होने के बाद सूरज 2015 तक मुंबई में तैनात रहे थे. बाद में उनकी तैनाती कोयंबटूर स्टेट आईएनएस अग्रणी में कर दिया गया था.
15 जनवरी को हुई थी सगाई
सूरज कुमार दुबे जनवरी महीने में छुट्टी पर पलामू में पहुंचे थे. 15 जनवरी को उनकी सगाई हुई थी. जबकि मई महीने में उनकी शादी होने वाली थी. शादी की खरीदारी भी सूरज ने की थी. मुम्बई सूरज के पिता और छोटे भाई गए हैं. जबकि घर में मां और बड़े भाई हैं. मां बेहोशी की हालत में है.
मुंबई पुलिस का क्या है कहना
मुंबई पुलिस का कहना है कि एयरपोर्ट से बाहर आते ही तीन अज्ञात लोगों ने रिवाल्वर दिखाकर सफेद रंग की एसयूवी गाड़ी में बिठाकर सूरज का अपहरण किया और 10 लाख रुपए की फिरौती मांगी. वो लोग तीन दिन तक उसे चेन्नई में ही उसे घुमाते रहे. इसके बाद पांच फरवरी को सुबह नौ बजे पालघर जिले के घोलवड के वेवजी वैजलपाडा लाए, जहां पेट्रोल छिड़ककर जला दिया. इलाज के दौरान उसकी मौत हो गई. इस मामले में घोलवड पुलिसथाने में आईपीसी की धारा 302, 307, 364 ए, 392, 342, 34 के तहत मामला दर्ज किया गया है और पुलिस मामले की जांच कर रही है.
आपको बता दे कि पूर्व में भी पालघर जिले में ही दो साधुओं समेत तीन लोगों की भीड़ ने पीट पीटकर बेरहमी से हत्या कर दी थी.
वही इस घटना से पलामू सांसद वीडी राम दुःखी हैं. उन्होंने कहा कि यह ह्रदय विरायक घटना है. ऐसा नही होना चाहिए था. जो भी लोग इस घटना में शामिल हैं, उन्हें कड़ी से कड़ी सजा मिलनी चाहिए.




